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Kaithal News: श्रीमद्भागवत कथा के सातवें दिन सुदामा चरित्र का वर्णन, सात दिवसीय कथा को दिया विश्राम

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Sat, 10 Oct 2026 12:45 AM IST
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The story of Sudama was narrated on the seventh day of the Shrimad Bhagwat Katha, marking the conclusion of the seven-day recitation.
श्री दुर्गा मंदिर में श्रीमद्भागवत महापुराण कथा सुनते श्रद्धालु।
राजौंद। राजौंद के वार्ड नंबर 8 स्थित श्री दुर्गा मंदिर में चल रही श्रीमद्भागवत महापुराण कथा के सातवें दिन श्रद्धालुओं ने पहुंचकर कथा का श्रवण किया। कथा के अंतिम दिन भगवान श्रीकृष्ण की महिमा का गुणगान किया गया और विभिन्न धार्मिक प्रसंगों के माध्यम से श्रद्धालुओं को भक्ति, प्रेम, मित्रता और आध्यात्मिक ज्ञान का संदेश दिया गया। सात दिनों तक चली श्रीमद्भागवत महापुराण कथा को विधिवत विश्राम दिया गया। वहीं शनिवार को मंदिर परिसर में भंडारे का आयोजन किया जाएगा जिसमें श्रद्धालुओं को प्रसाद वितरित किया जाएगा। कथा के सातवें दिन मुख्य रूप से सुदामा चरित्र, परीक्षित मोक्ष, शुकदेव जी की विदाई और उद्धव गीता के सार सहित श्रीमद्भागवत महापुराण के महत्वपूर्ण प्रसंगों का वर्णन किया गया।
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सुदामा चरित्र ने दिया सच्ची मित्रता का संदेश
कथा के दौरान भगवान श्रीकृष्ण और उनके परम मित्र सुदामा के प्रसंग का भावपूर्ण वर्णन किया गया। सुदामा चरित्र सच्ची मित्रता, प्रेम, त्याग और निस्वार्थ भाव का प्रतीक है। सुदामा की आर्थिक स्थिति कमजोर होने के बावजूद भगवान श्रीकृष्ण के प्रति उनकी श्रद्धा और प्रेम अटूट रहा। जब सुदामा अपने मित्र श्रीकृष्ण से मिलने द्वारका पहुंचे, तो भगवान ने उनका प्रेमपूर्वक स्वागत किया। इस प्रसंग से संदेश मिलता है कि सच्ची मित्रता धन-दौलत या पद-प्रतिष्ठा पर निर्भर नहीं करती, बल्कि प्रेम, विश्वास और समर्पण से मजबूत होती है।
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परीक्षित मोक्ष और शुकदेव जी की विदाई का प्रसंग
सातवें दिन राजा परीक्षित के मोक्ष से संबंधित प्रसंग का भी वर्णन किया गया। कथा के माध्यम से बताया गया कि भगवान की भक्ति, सत्कर्म और आध्यात्मिक ज्ञान मनुष्य को जीवन के वास्तविक उद्देश्य को समझने की प्रेरणा देते हैं। शुकदेव जी की ओर से सुनाई गई श्रीमद्भागवत कथा के महत्व पर प्रकाश डालते हुए श्रद्धालुओं को धर्म और भक्ति के मार्ग पर चलने का संदेश दिया गया।
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उद्धव गीता के सार से समझाया आध्यात्मिक ज्ञान का महत्व
कथा में उद्धव गीता के सार के माध्यम से भगवान श्रीकृष्ण के उपदेशों पर प्रकाश डाला गया। श्रद्धालुओं को बताया गया कि मनुष्य को अहंकार, मोह और लोभ से दूर रहकर सत्य, धर्म, सेवा और भक्ति का मार्ग अपनाना चाहिए। भगवान के प्रति सच्चा समर्पण और अच्छे कर्म जीवन को सार्थक बनाते हैं। सात दिवसीय श्रीमद्भागवत महापुराण कथा के विश्राम के साथ मंदिर में आयोजित धार्मिक कार्यक्रम का समापन हुआ। आयोजकों ने कथा में भाग लेने वाले सभी श्रद्धालुओं का आभार व्यक्त किया।

श्री दुर्गा मंदिर में श्रीमद्भागवत महापुराण कथा सुनते श्रद्धालु।

श्री दुर्गा मंदिर में श्रीमद्भागवत महापुराण कथा सुनते श्रद्धालु।

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