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Kaithal News: महिला दिवस मनाने का मकसद सशक्तीकरण का एक कदम

Fri, 08 Mar 2024 11:36 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल Updated Fri, 08 Mar 2024 11:36 PM IST
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The purpose of celebrating Women's Day is a step towards empowerment.
संवाद न्यूज एजेंसी
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गुहला-चीका। आठ मार्च मार्च को अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के मौके पर अपराजिता कार्यक्रम के तहत गुहला में कुछ समाजसेवी महिलाओं से बातचीत की। इन महिलाओं का कहना है इस दिवस को मनाने का मकसद महिला सशक्तीकरण की तरफ एक कदम है। महिलाओं की उन्नति और विकास को बढ़ावा देना भी इस दिन का मकसद है।राष्ट्र निर्माण में अहम भूमिका निभा रहीं महिलाएं

साल 1977 में यूनाइटेड नेशंस जनरल असेंबली ने आठ मार्च को महिला दिवस घोषित किया था जिसके बाद से ही अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस मनाया जाने लगा है। हालांकि इस दिन को मनाने की नींव 1909 में ही रख दी गई थी। आज महिलाएं हर क्षेत्र में नई-नई बुलंदियों को छू रही हैं और महिलाएं किसी भी क्षेत्र में पुरुषों से पीछे नहीं हैं। बड़े-बड़े पदों पर महिलाएं अपनी सेवाएं देकर देश व राष्ट्र निर्माण में अपनी अहम भूमिका निभा रही हैं।
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-पूनम सिंह, प्रिंसिपल, डीएवी स्कूल चीका।

इस वर्ष की कैंपेन थीम है इंस्पायर इंक्लूजन

इस साल महिला दिवस की कैंपेन थीम इंस्पायर इंक्लूजन है जिसका अर्थ है महिलाओं के महत्व को समझने के लिए लोगों को जागरूक करना। इसका अर्थ महिलाओं के लिए एक ऐसे समाज के निर्माण को बढ़ावा देना भी है जहां महिलाएं खुद को जुड़ा हुआ महसूस कर सकें। यदि किसी क्षेत्र विशेष में यदि महिलाएं नहीं हैं तो इंस्पायर इंक्लुजन कैंपेन के तहत मकसद यह है कि पूछा जाए कि महिलाएं क्यों नहीं हैं। -डाॅ. सुखविंद्र कौर, चेयरपर्सन, कोहिनूर शिक्षण सोसायटी, चीका।
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हर क्षेत्र में नारी शक्ति को

आगे आना चाहिए

नारी शक्ति को हर क्षेत्र में आगे आना चाहिए। वर्तमान समय में सरकार ने भी अनेक योजनाएं महिलाओं के लिए चलाई हैं। हालांकि आज के समय में राजनीति में भी महिलाएं आगे आ रही हैं लेकिन देश में महिलाओं की आधी आबादी होने के बावजूद जितनी भागीदारी राजनीति में होनी चाहिए उतनी नहीं है। आज भी महिलाएं राजनीति में आने पर संकोच करती है जबकि राष्ट्र निर्माण में अपना योगदान देने के लिए महिलाओं की राजनीति में भागीदारी जरूरी है। -अमनदीप शर्मा, पूर्व अध्यक्ष, नगरपालिका चीका।

अपने अधिकारों के प्रति

जागरूक हों महिलाएं

आज के समय में महिलाओं को अपने अधिकारों के प्रति जागरूक होना बहुत जरूरी है।

अक्सर देखने में आता है कि जो महिलाएं अपने अधिकारों के प्रति जागरूक नहीं हो पाती उनका समाज में किसी न किसी रूप से शोषण होता है।

महिलाओं को बिना किसी संकोच व डर के समाज में अपने हकों की आवाज उठानी चाहिए क्योंकि वर्तमान समय में जितने हक पुरुषों को मिले हुए हैं उतने ही अधिकार महिलाओं के भी हैं। दोनोंं को बराबरी का अधिकार है।


-कृष्णा सीड़ा, अधिवक्ता

शिक्षा के साथ धार्मिक कार्यों में भी रुचि लें महिलाएं

आज महिलाएं विशेषकर नई आयु की लड़कियां धार्मिक कार्यों से अपना मुंह मोड़ रही जबकि ऐसा नहीं करना चाहिए। उन्होंने कहा कि शिक्षा के साथ धार्मिकता भी जरूरी है हमारा देश पीर-पगंबरों का देश है जिन्होंने पूरे विश्व को धार्मिकता का पाठ पढ़ाया है। हमारी संस्कृति के कारण ही पूरे विश्व में भारत देश की पहचान है और इस संस्कृति को बनाए रखने के लिए नई पीढ़ी को उच्च शिक्षा के साथ-साथ धार्मिक कार्यक्रमों में भी अपनी रुचि दिखानी होगी। -मीनू गर्ग, समाजसेवी, चीका।
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