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Kaithal News: लोगों को जागरूक करने के लिए नई पॉलिसी बनाए नई सरकार
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कैथल। सरकार की ओर से एमएसएमई सेक्टर का नाम तो कई बार लिया, लेकिन उस तरह की सुविधाएं धरातल पर एमएसएमई सेक्टर को नहीं मिल सकीं। छोटे और बड़े उद्योगों के लिए अलग टैक्स की मांग पर कोई सहमति नहीं बन सकी है। इसके साथ ही आयकर में रिटर्न भरने को लेकर भी नई सरकार की ओर से लोगों को जागरूक करने के लिए नई पॉलिसी बनानी चाहिए। ऐसा होने से लोगों में मन में आयकर प्रणाली को लेकर होने वाल भय भी नहीं रहेगा।
लोगों में जागरूकता के लिए पॉलिसी बनाए सरकार
लोगों में जागरूकता होना चाहिए। लोगों में भय रहता है कि चार्टर्ड अकाउंटेंट का काम काफी रिस्क का होता है। इनकम टैक्स को लेकर काफी संशय रहता है। नई सरकार का गठन होने के बाद सरकार जागरूकता को लेकर कदम उठाए। लोग इस समय से पूरी तरह से जागरूक नहीं है। आयकर प्रणाली को लेकर लोगों में काफी भय का माहौल रहता है। उन्हें जागरूक होना बेहद जरूरी है।
सन्नी आहूजा, सीए, सीवन।
रिफंड की प्रक्रिया पारदर्शी बनाने की जरूरत
जीएसटी रिफंड की प्रक्रिया आयकर की तरह पारदर्शी बनाने की जरूरत है, जितनी असमानताएं जीएसटी को लेकर है उन्हें दूर किया जाए। बेवजह नोटिस भेज उद्यमियों का उत्पीड़न बंद हो। प्रोपराइटर शिप और पार्टनरशिप एमएसएमई की भी कंपनी की तरह आयकर की दरें निर्धारित की जाए।
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अर्पित बंसल, सीए, सीवन।
बैंकों की भी जवाबदेही तय होनी चाहिए
छोटे व्यापारियों को लोन देने में बैंकों की ओर से आना-कानी होती है। ऐसे बैंकों की भी जवाबदेही तय होनी चाहिए। जीएसटी के सरलीकरण नहीं होने से उद्यमियों को फैक्टरी छोड़ सीए, अधिवक्ता और विभागीय अधिकारियों का चक्कर काटना पड़ता है। कुटीर उद्योग के प्रचार, प्रसार की जरूरत है।
अशोक गोयल, सीए, कैथल।
टैक्स के ढांचे को सरल बनाने की अधिक जरूरत
टैक्स के ढांचे को सरल बनाने की अधिक जरूरत है। टैक्स देने वाले लोगों को नई सरकार से राहत की उम्मीद है। इनकम टैक्स में एक साल के अंदर आयकर अपील का निस्तारण कर देना चाहिए। इस व्यवस्था से छोटे और मध्यम वर्गीय कारोबारियों को राहत होगी। युवाओं के लिए विशेष योजनाएं शुरू की जानी चाहिए। क्योंकि युवाओं को योजनाएं न मिलने से वह पलायन कर रहे हैं।
- भारत गर्ग, सीए, कैथल।
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लोगों में जागरूकता के लिए पॉलिसी बनाए सरकार
लोगों में जागरूकता होना चाहिए। लोगों में भय रहता है कि चार्टर्ड अकाउंटेंट का काम काफी रिस्क का होता है। इनकम टैक्स को लेकर काफी संशय रहता है। नई सरकार का गठन होने के बाद सरकार जागरूकता को लेकर कदम उठाए। लोग इस समय से पूरी तरह से जागरूक नहीं है। आयकर प्रणाली को लेकर लोगों में काफी भय का माहौल रहता है। उन्हें जागरूक होना बेहद जरूरी है।
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सन्नी आहूजा, सीए, सीवन।
रिफंड की प्रक्रिया पारदर्शी बनाने की जरूरत
जीएसटी रिफंड की प्रक्रिया आयकर की तरह पारदर्शी बनाने की जरूरत है, जितनी असमानताएं जीएसटी को लेकर है उन्हें दूर किया जाए। बेवजह नोटिस भेज उद्यमियों का उत्पीड़न बंद हो। प्रोपराइटर शिप और पार्टनरशिप एमएसएमई की भी कंपनी की तरह आयकर की दरें निर्धारित की जाए।
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अर्पित बंसल, सीए, सीवन।
बैंकों की भी जवाबदेही तय होनी चाहिए
छोटे व्यापारियों को लोन देने में बैंकों की ओर से आना-कानी होती है। ऐसे बैंकों की भी जवाबदेही तय होनी चाहिए। जीएसटी के सरलीकरण नहीं होने से उद्यमियों को फैक्टरी छोड़ सीए, अधिवक्ता और विभागीय अधिकारियों का चक्कर काटना पड़ता है। कुटीर उद्योग के प्रचार, प्रसार की जरूरत है।
अशोक गोयल, सीए, कैथल।
टैक्स के ढांचे को सरल बनाने की अधिक जरूरत
टैक्स के ढांचे को सरल बनाने की अधिक जरूरत है। टैक्स देने वाले लोगों को नई सरकार से राहत की उम्मीद है। इनकम टैक्स में एक साल के अंदर आयकर अपील का निस्तारण कर देना चाहिए। इस व्यवस्था से छोटे और मध्यम वर्गीय कारोबारियों को राहत होगी। युवाओं के लिए विशेष योजनाएं शुरू की जानी चाहिए। क्योंकि युवाओं को योजनाएं न मिलने से वह पलायन कर रहे हैं।
- भारत गर्ग, सीए, कैथल।