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राज्यस्तरीय पशु प्रदर्शनी में चमका कथा का ‘चांद’
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कैथल। हरियाणा पशुओं की उत्तम और उन्नत नस्लों में देशभर में जाना जाता है। इसमें सबसे पहला नाम मुर्राह का आता है। पशुओं में हरियाणा का मुर्राह और ताऊ का तुर्रा अपनी खास पहचान रखता है। यही वाक्य कैथल के गांव जांबा के चांद नामक झोटे ने सिद्ध कर दिया है। भिवानी में आयोजित राज्य स्तरीय पशु प्रदर्शनी प्रतियोगिता में चांद कद-काठी, सींग और अन्य विशेषताओं के कारण प्रदेश में चौथे स्थान पर आया है। इससे एक दिन पहले कुरुक्षेत्र में नॉर्थ जोन की प्रतियोगिता में चांद ने पहला स्थान हासिल किया था।
चांद के मालिक राजपाल ने बताया कि उसने लगभग 27 महीने 15 दिन पहले हिसार से चांद की मां रानी को 2 लाख 60 रुपये में खरीदा था। उस समय चांद 15 दिन का था। अब चांद 28 महीने का हो गया है। चांद की मां रानी मुर्राह नस्ल की भैंस है जो इस समय 23 किलो 100 ग्राम दूध देती है। चांद के पिता अर्जुन खुंगड़ है, जो हिसार जिले में है। राजपाल ने बताया कि भिवानी मेले में चांद की 15 लाख 50 हजार रुपये कीमत लग चुकी है लेकिन उन्होंने बेचने से इनकार कर दिया।
हर रोज खाने पर होता है दो हजार खर्च
चांद झोटे के मालिक राजपाल ने बताया कि चांद के खाने पर हर रोज दो हजार रुपये खर्च होते हैं। इसमें चांद को प्रतिदिन सात से आठ किलो गाय का दूध, पांच किलो चने, पांच किलो गेहूं का आटा, पांच किलो सेब, दो किलो गुड़ और तीन से चार किलो बिनौले दिए जाते हैं। वहीं एक महीने में एक किलो देशी घी खिलाया जाता है और हर रोज एक लीटर सरसों के तेल से मालिश की जाती है। खाने की डाइट और दिनचर्या, पशु चिकित्सकों की सलाह के अनुसार चलती है। साथ ही रोज पांच किलोमीटर की सैर भी कराते हैं। चांद दिन में दो से तीन बार नहाता है। गर्मियों में कूलर की हवा में गद्दे पर सोता है।
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चांद के मालिक राजपाल ने बताया कि उसने लगभग 27 महीने 15 दिन पहले हिसार से चांद की मां रानी को 2 लाख 60 रुपये में खरीदा था। उस समय चांद 15 दिन का था। अब चांद 28 महीने का हो गया है। चांद की मां रानी मुर्राह नस्ल की भैंस है जो इस समय 23 किलो 100 ग्राम दूध देती है। चांद के पिता अर्जुन खुंगड़ है, जो हिसार जिले में है। राजपाल ने बताया कि भिवानी मेले में चांद की 15 लाख 50 हजार रुपये कीमत लग चुकी है लेकिन उन्होंने बेचने से इनकार कर दिया।
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हर रोज खाने पर होता है दो हजार खर्च
चांद झोटे के मालिक राजपाल ने बताया कि चांद के खाने पर हर रोज दो हजार रुपये खर्च होते हैं। इसमें चांद को प्रतिदिन सात से आठ किलो गाय का दूध, पांच किलो चने, पांच किलो गेहूं का आटा, पांच किलो सेब, दो किलो गुड़ और तीन से चार किलो बिनौले दिए जाते हैं। वहीं एक महीने में एक किलो देशी घी खिलाया जाता है और हर रोज एक लीटर सरसों के तेल से मालिश की जाती है। खाने की डाइट और दिनचर्या, पशु चिकित्सकों की सलाह के अनुसार चलती है। साथ ही रोज पांच किलोमीटर की सैर भी कराते हैं। चांद दिन में दो से तीन बार नहाता है। गर्मियों में कूलर की हवा में गद्दे पर सोता है।
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