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प्रशासनिक कार्रवाई का असर, दूसरे ने किया सरेंडर

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Sat, 30 Apr 2022 12:45 AM IST
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The effect of administrative action, the other surrendered
कैथल। नगर परिषद की जमीन पर कब्जा कर दुकान बनाने के प्रयास में प्रशासनिक कार्रवाई का असर यह हुआ कि एक अन्य व्यक्ति ने स्वयं सरेंडर कर दिया। प्रशासन के पास इस मामले में भी शिकायत पहुंची थी। तब उसे डीसी कार्यालय की ओर से नोटिस दिया गया था। नोटिस पहुंचते ही आरोपी व्यक्ति डीसी के पास पहुंचा और कहा कि उसे नहीं पता कि यह रजिस्टरी कैसे हुई। अब इस रजिस्टरी को भी रद करने की कार्रवाई अमल में लाई जाएगी।
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गौरतलब है कि होली के दिन राजकीय कन्या वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय के निकट मुख्य बाजार में लगभग 180 वर्ग गज की जगह में एक व्यक्ति ने दुकान का निर्माण शुरू किया था। मामले की जानकारी डीसी प्रदीप दहिया तक पहुंची। उनके निर्देश पर नगर परिषद ईओ कुलदीप मलिक ने थाना शहर में केस दर्ज करवाया। साथ ही न्यायालय में मजबूती से पैरवी की। इसके बाद डीसी प्रदीप दहिया ने बतौर कलेक्टर इस जमीन की रजिस्टरी को रद कर दिया। इस एक तरह उन्होंने नगर परिषद की जमीन पर कब्जा होने से बचा लिया।
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इसी प्रकार से छात्रावास रोड पर 180 वर्ग गज में एक व्यक्ति ने नगर परिषद की भूमि पर कब्जा करके रजिस्टरी करवा ली थी। कागजों में हुए फर्जीवाड़े के आधार पर रजिस्टरी के बाद नगर परिषद की ओर से संबंधित व्यक्ति को नोटिस भेजा गया। इसके बाद यह व्यक्ति डीसी प्रदीप दहिया के सामने जा पहुंचा। उसने रजिस्टरी व अन्य कागजातों से खुद का कोई वास्ता नहीं बताया। उसने एक तरह से इस कब्जे को सरेंडर कर दिया।
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ईओ कुलदीप मलिक ने बताया कि इन दो प्लाटों की शिकायत एक साथ की गई थी। एक प्लाट की रजिस्टरी रद करते हुए डीसी महोदय के निर्देशानुसार थाने में केस दर्ज करवाया गया है। दूसरे मामले में संबंधित व्यक्ति को नोटिस जारी किया गया तो उसने जमीन से कोई वास्ता नहीं बताया है। सरेंडर करने के बाद अब इस रजिस्टरी को भी रद्द करने की कार्रवाई की जा रही है।

जिले में कहीं भी सरकारी जमीन पर कब्जा नहीं होने दिया जाएगा। यदि कहीं ऐसा कोई करते हुए पाया गया तो निश्चित तौर पर उन केवल उस व्यक्ति के खिलाफ कार्रवाई होगी, बल्कि उसके साथ मिलीभगत में यदि कोई सरकारी कर्मचारी या अधिकारी भी संलिप्त मिला तो उसके खिलाफ भी सख्त कार्रवाई की जाएगी। यह एक सुखद बात है कि लोग अब खुद ही कब्जे छोड़ने लगे हैं। -प्रदीप दहिया, डीसी
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