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प्रेम और भाव का भूखा है सृष्टि का रचयिता : हरिप्रिया
Fri, 22 Mar 2024 03:42 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
Updated Fri, 22 Mar 2024 03:42 AM IST
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संवाद न्यूज एजेंसी
कलायत। श्रीमद्भागवत कथा के सातवें और अंतिम दिन कथा व्यास देवी हरिप्रिया ने सुदामा चरित्र, द्रोपदी चीर हरण, गोपी उद्धव संवाद की कथा सुनाकर उपस्थित श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। कहा कि सृष्टि का रचयिता प्रेम और भाव का भूखा होता है।
सुदामा चरित्र का प्रसंग सुनाते हुए कथा व्यास ने कहा कि ईश्वर अंतर्यामी होते हैं। वह सबके मन की व्यथा और दशा सब जानते हैं। भगवान अपने भक्त के लिए सबसे बड़ा त्याग कर सकते हैं। बशर्ते हमारे हृदय में छल कपट नहीं होना चाहिए। जिसके मन में ईश्वर के प्रति सच्ची श्रद्धा होती है वह उसी के वश में होता।
उन्होंने कहा कि भगवान के दरबार में जो भी सच्चे मन से आता है वह उसकी झोलियां भर देता है जैसा सुदामा की भरी थी। द्रोपदी चीर हरण का मार्मिक प्रसंग सुनाते हुए कहा कि ईश्वर सर्वव्यापी हैं। यदि हम उन्हें एक निष्ठ भाव से युक्त होकर सच्चे मन से पुकारेंगे तो वह अपने आप दौड़े चले आएंगे। जिसके साथ भगवान खड़े होते हैं दुनिया उसका बाल भी बांका नहीं कर सकती। द्रोपदी की लाज इसलिए बच गई क्योंकि भगवान श्री कृष्ण के प्रति उनका अटूट विश्वास था।
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गोपी उद्धव संवाद श्रवण करके लोग प्रेम भक्ति में डूब गए। उन्होंने कहा कि निर्गुण निराकार ब्रह्म अगम-अगोचर है। भक्तों के लिए सुगम नहीं है इसलिए सगुण ब्रह्म की उपासना सुलभ है। सगुण रूप की प्रेमा भक्ति के आगे ब्रह्म का निर्गुण निराकार स्वरूप फीका पड़ जाता है। ऐसा प्रेम श्री कृष्ण के प्रति गोपिकाओं के हृदय में भरा था। उसी प्रेम के आगे उद्धव का निर्गुण ब्रह्म की उपासना का उपदेश प्रभाव हीन रहा। मुख्य यजमान जबर सिंह राणा ने बताया कि श्रीमद्भागवत कथा का समापन हो गया है। शुक्रवार 22 मार्च को हवन पूर्णाहुति व भंडारे का आयोजन किया जाएगा।
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कलायत। श्रीमद्भागवत कथा के सातवें और अंतिम दिन कथा व्यास देवी हरिप्रिया ने सुदामा चरित्र, द्रोपदी चीर हरण, गोपी उद्धव संवाद की कथा सुनाकर उपस्थित श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। कहा कि सृष्टि का रचयिता प्रेम और भाव का भूखा होता है।
सुदामा चरित्र का प्रसंग सुनाते हुए कथा व्यास ने कहा कि ईश्वर अंतर्यामी होते हैं। वह सबके मन की व्यथा और दशा सब जानते हैं। भगवान अपने भक्त के लिए सबसे बड़ा त्याग कर सकते हैं। बशर्ते हमारे हृदय में छल कपट नहीं होना चाहिए। जिसके मन में ईश्वर के प्रति सच्ची श्रद्धा होती है वह उसी के वश में होता।
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उन्होंने कहा कि भगवान के दरबार में जो भी सच्चे मन से आता है वह उसकी झोलियां भर देता है जैसा सुदामा की भरी थी। द्रोपदी चीर हरण का मार्मिक प्रसंग सुनाते हुए कहा कि ईश्वर सर्वव्यापी हैं। यदि हम उन्हें एक निष्ठ भाव से युक्त होकर सच्चे मन से पुकारेंगे तो वह अपने आप दौड़े चले आएंगे। जिसके साथ भगवान खड़े होते हैं दुनिया उसका बाल भी बांका नहीं कर सकती। द्रोपदी की लाज इसलिए बच गई क्योंकि भगवान श्री कृष्ण के प्रति उनका अटूट विश्वास था।
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गोपी उद्धव संवाद श्रवण करके लोग प्रेम भक्ति में डूब गए। उन्होंने कहा कि निर्गुण निराकार ब्रह्म अगम-अगोचर है। भक्तों के लिए सुगम नहीं है इसलिए सगुण ब्रह्म की उपासना सुलभ है। सगुण रूप की प्रेमा भक्ति के आगे ब्रह्म का निर्गुण निराकार स्वरूप फीका पड़ जाता है। ऐसा प्रेम श्री कृष्ण के प्रति गोपिकाओं के हृदय में भरा था। उसी प्रेम के आगे उद्धव का निर्गुण ब्रह्म की उपासना का उपदेश प्रभाव हीन रहा। मुख्य यजमान जबर सिंह राणा ने बताया कि श्रीमद्भागवत कथा का समापन हो गया है। शुक्रवार 22 मार्च को हवन पूर्णाहुति व भंडारे का आयोजन किया जाएगा।