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Kaithal News: गुलियाणा को देश ने सैनिकों के नाम से जाना
Sun, 13 Aug 2023 01:05 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
Updated Sun, 13 Aug 2023 01:05 AM IST
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कैथल। जिले के गांव गुलियाणा के युवाओं में सेना में भर्ती होने का जुनून बना हुआ है। बीते पांच वर्ष में गांव के 250 से अधिक युवा सेना में भर्ती हो चुके हैं। वर्तमान में 2750 के करीब लोग सेना में नौकरी कर रहे हैं। वहीं, 1965 से लेकर अब तक गांव के 13 जवान शहीद देश सेवा में अपने प्राण न्यौछावर कर चुके हैं और शहादत पा चुके हैं।
जिला मुख्यालय से करीब 28 किलोमीटर दूर स्थित गांव जिले के साथ-साथ प्रदेश के युवाओं के लिए मिसाल बना हुआ है। इस गांव को सैनिकों का गांव भी कहा जाता है। गांववासी रमेश, सुनील, मजेंद्र, प्रदीप व संदीप बताते हैं कि गांव में सेना की तैयारी करने वाले युवा सुबह शाम अभ्यास में जुटे दिखाई देते हैं।
रोजाना सैकड़ों की संख्या में युवा खाली स्थानों और गांव के साथ लगते मार्गों पर तैयारी के लिए पसीना बहाते नजर आते हैं। भारतीय सेना के साथ-साथ गांव के युवा एयरफोर्स, नेवी, बीएसएफ, हरियाणा, दिल्ली व चंडीगढ़ पुलिस में भी अपनी सेवाएं दे रहे हैं। गांव में लगभग 1200 परिवार हैं, जिसमें से इस समय 700 से अधिक परिवारों में सरकारी नौकर हैं। एक-एक घर में कई-कई सदस्य नौकरी पर हैं। गांव के युवा क्लब व जयहिंद क्लब
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युवाओं की सहायता के लिए हमेशा आगे रहते हैं। ऐसी कोई भर्ती नहीं, जिसमें गांव के युवाओं का चयन न हो।
ग्रामीणों का कहना है कि जिस प्रकार से गांव के युवा पढ़ लिखकर सरकारी नौकरियों में अपनी सेवा दे रहे हैं, उसी के अनुसार गांव में सभ्य समाज के निर्माण में भी सहयोग मिल रहा है। ग्रामीण हमेशा एक-दूसरे के सहयोग के लिए तत्पर रहते हैं। गांव में आज तक कोई बड़ा झगड़ा या विवाद नहीं हुआ है। अगर किसी के बीच थोड़ी-बहुत कहासुनी हो भी जाती है तो आसपास के बुजुर्ग दोनों पक्षों को समझा-बुझाकर सुलह करवा देते हैं। ग्रामीणों का कहना है कि युवाओं के भविष्य को लेकर जो भी निर्णय लिए जाते हैं, उनमें पूरे गांव की सहमति होती है। उनका कहना है कि ग्राम पंचायतें भी युवाओं के सहयोग के लिए तैयार रहती हैं।
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जिला मुख्यालय से करीब 28 किलोमीटर दूर स्थित गांव जिले के साथ-साथ प्रदेश के युवाओं के लिए मिसाल बना हुआ है। इस गांव को सैनिकों का गांव भी कहा जाता है। गांववासी रमेश, सुनील, मजेंद्र, प्रदीप व संदीप बताते हैं कि गांव में सेना की तैयारी करने वाले युवा सुबह शाम अभ्यास में जुटे दिखाई देते हैं।
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रोजाना सैकड़ों की संख्या में युवा खाली स्थानों और गांव के साथ लगते मार्गों पर तैयारी के लिए पसीना बहाते नजर आते हैं। भारतीय सेना के साथ-साथ गांव के युवा एयरफोर्स, नेवी, बीएसएफ, हरियाणा, दिल्ली व चंडीगढ़ पुलिस में भी अपनी सेवाएं दे रहे हैं। गांव में लगभग 1200 परिवार हैं, जिसमें से इस समय 700 से अधिक परिवारों में सरकारी नौकर हैं। एक-एक घर में कई-कई सदस्य नौकरी पर हैं। गांव के युवा क्लब व जयहिंद क्लब
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युवाओं की सहायता के लिए हमेशा आगे रहते हैं। ऐसी कोई भर्ती नहीं, जिसमें गांव के युवाओं का चयन न हो।
ग्रामीणों का कहना है कि जिस प्रकार से गांव के युवा पढ़ लिखकर सरकारी नौकरियों में अपनी सेवा दे रहे हैं, उसी के अनुसार गांव में सभ्य समाज के निर्माण में भी सहयोग मिल रहा है। ग्रामीण हमेशा एक-दूसरे के सहयोग के लिए तत्पर रहते हैं। गांव में आज तक कोई बड़ा झगड़ा या विवाद नहीं हुआ है। अगर किसी के बीच थोड़ी-बहुत कहासुनी हो भी जाती है तो आसपास के बुजुर्ग दोनों पक्षों को समझा-बुझाकर सुलह करवा देते हैं। ग्रामीणों का कहना है कि युवाओं के भविष्य को लेकर जो भी निर्णय लिए जाते हैं, उनमें पूरे गांव की सहमति होती है। उनका कहना है कि ग्राम पंचायतें भी युवाओं के सहयोग के लिए तैयार रहती हैं।