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Kaithal News: सिल्ला खेड़ा गांव में राजकीय प्राथमिक स्कूल 60 साल पुराना पर झेल रहा बदहाली की मार

Fri, 01 Aug 2025 01:10 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल Updated Fri, 01 Aug 2025 01:10 AM IST
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The 60 year old Government Primary School in Silla Kheda village is facing the brunt of bad condition
कमल बहल
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कैथल। शहर मुख्यालय से महज पांच किलोमीटर दूर स्थित सिल्ला खेड़ा गांव स्थित राजकीय प्राथमिक स्कूल 60 साल पुराना है, लेकिन यह बदहाली की मार झेल रहा है। इस स्कूल का निर्माण 1965 में हुआ था, लेकिन इसके बाद इसकी किसी ने कोई सुध नहीं ली।

इस गांव की आबादी करीब दो हजार है और मतदाताओं की संख्या करीब 800 मतदाता है। यह स्कूल इस समय शिक्षा विभाग की ओर से जर्जर घोषित किया गया है, लेकिन इसके भवन के निर्माण के लिए अभी तक बजट को मंजूरी नहीं मिल पाई है।
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दूसरी ओर अभिभावकों का भी कहना है कि उन्हें अपने बच्चों को इस स्कूल में पढ़ाना जरूरी हैं, क्योंकि वे निजी विद्यालयों में भारी भरकम फीस अदा नहीं कर सकते हैं। इसलिए ही स्कूल में दाखिला करवा रखा है, लेकिन इसके भवन का हर समय गिरने का खतरा रहता है।
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सर्दियों में यहां के अध्यापक मैदान में ब्लैक बोर्ड लगाकर बच्चों को पढ़ा लेते हैं, लेकिन गर्मी के समय में महज इन तीन कमरों में ही सभी कक्षाएं चलानी पड़ती है। कुछ कक्षाएं कमरे और कुछ बरामदे में चलानी पड़ती हैं।



स्कूल में पढ़ाई कर चुके बुजुर्ग का भी कहना है कि यहां पर केवल एक बार ही मरम्मत हुई है। जर्जर घोषित होने के बावजूद नया भवन नहीं बनाया गया। इस समय स्कूल में 50 बच्चे पढ़ते हैं। यही नहीं इस स्कूल में कोरोना महामारी से पहले ऐसा समय आया था कि स्कूल में बच्चों की संख्या बढ़ाने के लिए अध्यापकों को स्वयं अपने वाहनों से घर से लाकर और छुट्टी के बाद छोड़ना पड़ता था। इस समय यह स्कूल केवल तीन कमरों में ही चलाया जा रहा है। जबकि मिड डे मिल भी बरामदे में बनता है।



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ये बोले ग्रामीण :



मैं 1968 में यहीं पढ़ा, अब भी वही हालत है



स्कूल में 60 साल में केवल एक बार मरम्मत का काम हुआ है। अपग्रेडेशन की मांग भी कई बार की गई, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई। पांचवीं के बाद बच्चों को तीन-चार किलोमीटर दूर स्कूल जाना पड़ता है।

– दर्शन सिंह, वरिष्ठ नागरिक, सिल्ला खेड़ा निवासी।



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स्कूल की कभी भी हालत नहीं सुधारी गई



इस स्कूल की कभी भी हालत नहीं सुधारी गई है। कुछ समय पहले तो इस स्कूल में बच्चे काफी कम हो गए थे। इसके चलते विभाग ने इसे बंद करने का भी फैसला ले लिया था, लेकिन उस समय के अध्यापकों की मेहनत के चलते यह स्कूल बंद होने से बच गया। अपग्रेड करने की ग्रामीणों की मांग अनसुनी कर दी गई। जर्जर हालत के कारण बच्चों की जान खतरे में हमेशा रहती है।

- मलकीत सिंह, सिल्ला खेड़ा निवासी।



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गरीबों का स्कूल, इसलिए नहीं बन रहा भवन



इस सरकारी स्कूल में ज़्यादातर गरीब तबके के बच्चे पढ़ते हैं, इसीलिए प्रशासन और सरकार ध्यान नहीं दे रहे। राजनेताओं की निजी स्कूलों में रुचि है, सरकारी नहीं।

योगा सिंह, सिल्ला खेड़ा निवासी।



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रसोई भी घटिया सामग्री से बनी, अब टूट चुकी

मैंने भी सिल्ला खेड़ा गांव में राजकीय प्राथमिक स्कूल से ही पढ़ाई की है।  तब भी तीन कमरे थे और अब भी वही हैं। मिड डे मील की रसोई भी घटिया सामग्री से बनी थी, जो अब जर्जर हो चुकी है। अब खाना बरामदे में बनता है।



– परमजीत, सिल्ला खेड़ा निवासी।

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भवन जर्जर होने के कारण हर समय रहती है बच्चों की चिंता

हम बच्चों को निजी स्कूल में नहीं पढ़ा सकते, इसलिए यहीं दाखिला करवाया है। एक बार लेंटर का हिस्सा भी एक कमरे का गिरा था, लेकिन तब स्कूल की छुट्टी हो चुकी थी। इस वजह से किसी भी प्रकार से जानमाल का नुकसान नहीं हुआ था। - सोनी, अभिभावक।



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किसी भी प्रकार का निर्माण कार्य होता नहीं देखा:
मैं करीब 70 साल का हूं और 50 साल से इसी गांव में रह रहा हूं लेकिन कभ भी स्कूल में किसी भी प्रकार का निर्माण कार्य होता नहीं देखा। यहां पर गरीब तबके के लोग ही अपने बच्चों को पढ़ा रहे हैं। वे क्या करें, क्योंकि उनके पास विकल्प नहीं हैं।




- पृथ्वी राम, अभिभावक।

राजकीय प्राथमिक पाठशाला, पट्टी डोगर व सिल्ला खेड़ा


स्थापना वर्ष: 1965



विद्यार्थियों की संख्या: 50



स्वीकृत शिक्षकों की संख्या: 2



कार्यरत शिक्षक: 2



कक्षाओं की संख्या: 3



कंडम कक्षाएं: 3



अतिरिक्त आवश्यकता: 3 कमरे और आवश्यक



वर्जन

सिल्ला खेड़ा गांव स्थित राजकीय प्राथमिक स्कूल में कमरों और रास्तों के निर्माण के लिए लगभग 40 लाख रुपये का एस्टीमेट भेजा गया है। अनुमति मिलते ही निविदा प्रक्रिया शुरू कर कार्य आरंभ किया जाएगा। इस बारे में उच्चाधिकारियों से पत्राचार भी किया गया है।



– विजय लक्ष्मी, जिला मौलिक शिक्षा अधिकारी, कैथल।
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