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वन स्टॉप सखी सेंटर में जांची सुविधाएं
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01-कैथल। वन स्टॉप सेंटर सखी का दौरा करते हुए डीसी डॉ. संगीता तेतरवाल।
- फोटो : Kaithal
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कैथल। वन स्टॉप सखी सेंटर का बृहस्पतिवार को डीसी डॉ. संगीता तेतरवाल ने दौरा कर वहां की सुविधाओं का जायजा लिया। निरीक्षण के दौरान उन्होंने कहा कि वन स्टॉप सेंटर में पीड़ितों को दी जा रही कानूनी सहायता और काउंसलिंग का पूरा ब्योरा कार्यालय के रजिस्टर में दर्ज होना चाहिए।
उन्होंने कहा कि निर्धारित नियमों के अनुसार सेंटर में आने वाली पीड़ितों को पूरा मान-सम्मान और सुविधाएं दी जाएं। इसके साथ-साथ उनकी काउंसलिंग भी की जाए। विषम परिस्थियों में किया गया सहयोग और मार्गदर्शन बड़ी राहत देने का काम करता है। इसके साथ ही ड्यूटी का निर्वाह भी सुचारु रूप से होता है। घरेलू हिंसा, दहेज उत्पीड़न, यौन उत्पीड़न से पीड़ित सभी आयु वर्ग की महिलाओं व 18 वर्ष से कम आयु की लड़कियों को पुलिस सहायता, कानूनी सहायता, चिकित्सा सुविधा, काउंसलिंग की सुविधा व पांच दिन के लिए अस्थायी आश्रय की सुविधा प्रदान की जाती है।
वन स्टॉप सेंटर में ऐसी महिलाओं व लड़कियों के पांच दिनों तक अस्थायी रूप से ठहरने तथा खाने-पीने आदि के प्रबंध हैं। महिला संरक्षण अधिकारी सुनीता शर्मा ने डीसीको बताया कि इस केंद्र में शौचालयों की व्यवस्था है, तीन कक्ष, काउंसलिंग सेंटर व रसोई घर व हॉल की सुविधा भी है। अब तक 530 केस रजिस्टर्ड किए गए हैं तथा 346 सरवाइवर को आश्रय दिया गया है।
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उन्होंने कहा कि निर्धारित नियमों के अनुसार सेंटर में आने वाली पीड़ितों को पूरा मान-सम्मान और सुविधाएं दी जाएं। इसके साथ-साथ उनकी काउंसलिंग भी की जाए। विषम परिस्थियों में किया गया सहयोग और मार्गदर्शन बड़ी राहत देने का काम करता है। इसके साथ ही ड्यूटी का निर्वाह भी सुचारु रूप से होता है। घरेलू हिंसा, दहेज उत्पीड़न, यौन उत्पीड़न से पीड़ित सभी आयु वर्ग की महिलाओं व 18 वर्ष से कम आयु की लड़कियों को पुलिस सहायता, कानूनी सहायता, चिकित्सा सुविधा, काउंसलिंग की सुविधा व पांच दिन के लिए अस्थायी आश्रय की सुविधा प्रदान की जाती है।
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वन स्टॉप सेंटर में ऐसी महिलाओं व लड़कियों के पांच दिनों तक अस्थायी रूप से ठहरने तथा खाने-पीने आदि के प्रबंध हैं। महिला संरक्षण अधिकारी सुनीता शर्मा ने डीसीको बताया कि इस केंद्र में शौचालयों की व्यवस्था है, तीन कक्ष, काउंसलिंग सेंटर व रसोई घर व हॉल की सुविधा भी है। अब तक 530 केस रजिस्टर्ड किए गए हैं तथा 346 सरवाइवर को आश्रय दिया गया है।
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