{"_id":"68546a5da8542e0a430aa558","slug":"tea-leaves-are-being-found-instead-of-fertilizer-mahavir-kaithal-news-c-18-1-knl1004-673778-2025-06-20","type":"story","status":"publish","title_hn":"खाद की जगह मिल रही चाय पत्ती : महावीर","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
खाद की जगह मिल रही चाय पत्ती : महावीर
Fri, 20 Jun 2025 01:21 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
Updated Fri, 20 Jun 2025 01:21 AM IST
विज्ञापन
संवाद न्यूज एजेंसी
कैथल। भारतीय किसान मजदूर यूनियन (कमेरा वर्ग) के प्रदेश अध्यक्ष महावीर चहल ने सरकार पर किसानों की अनदेखी का आरोप लगाते हुए कहा कि सरकार साल दर साल खाद पर दी जाने वाली सब्सिडी में कटौती कर रही है, जिससे किसानों की परेशानियां लगातार बढ़ रही हैं। उन्होंने कहा कि धान की रोपाई के इस महत्वपूर्ण समय में किसान खेत में होने के बजाय डीएपी खाद के लिए घंटों लाइन में भूखे पेट खड़े रहने को मजबूर हैं।
महावीर चहल ने आरोप लगाया कि सरकारी एजेंसी हैफेड किसानों को खाद उपलब्ध कराने की बजाय जबरदस्ती अपने अनबिके उत्पाद बेचने की कोशिश कर रही है। उन्होंने बताया कि हैफेड द्वारा 50 किलो डीएपी खाद की एक बोरी के साथ एक किलो चाय पत्ती खरीदने की शर्त थोपना किसानों की मजबूरी का फायदा उठाने जैसा है।
चहल ने कहा कि भाजपा की डबल इंजन सरकार ने वित्तीय वर्ष 2023-24 में खाद सब्सिडी के लिए 2.25 लाख करोड़ रुपये का प्रावधान किया था, जो 2024-25 में घटाकर 1.77 लाख करोड़ रुपये कर दिया गया और 2025-26 के लिए यह राशि और घटकर 1.67 लाख करोड़ रुपये रह गई है। यह किसानों के साथ धोखा है।
विज्ञापन
इस मौके पर यूनियन के युवा प्रदेश अध्यक्ष नरेंद्र मागो माजरी ने भी सरकार की नीतियों की आलोचना करते हुए कहा कि सरकार को किसानों की जरूरतों को प्राथमिकता देनी चाहिए, न कि व्यापारिक शर्तें थोपनी चाहिए। वहीं जिला अध्यक्ष बलकार मलिक खुराना ने कहा कि महंगाई के इस दौर में खेती किसानों के लिए घाटे का सौदा बनती जा रही है। ऐसे में सरकार को सब्सिडी बढ़ाकर किसानों को राहत देनी चाहिए थी।
इस अवसर पर कृष्ण मालखेड़ी, सुरेंद्र प्यौदा, डीसी चहल, बिंदर गिल सिरटा, विक्रम चहल, जोगिंद्र कुंडू, सुरेश नरड़, जोरा भैनी माजरा सहित कई किसान नेता मौजूद रहे।
विज्ञापन
कैथल। भारतीय किसान मजदूर यूनियन (कमेरा वर्ग) के प्रदेश अध्यक्ष महावीर चहल ने सरकार पर किसानों की अनदेखी का आरोप लगाते हुए कहा कि सरकार साल दर साल खाद पर दी जाने वाली सब्सिडी में कटौती कर रही है, जिससे किसानों की परेशानियां लगातार बढ़ रही हैं। उन्होंने कहा कि धान की रोपाई के इस महत्वपूर्ण समय में किसान खेत में होने के बजाय डीएपी खाद के लिए घंटों लाइन में भूखे पेट खड़े रहने को मजबूर हैं।
महावीर चहल ने आरोप लगाया कि सरकारी एजेंसी हैफेड किसानों को खाद उपलब्ध कराने की बजाय जबरदस्ती अपने अनबिके उत्पाद बेचने की कोशिश कर रही है। उन्होंने बताया कि हैफेड द्वारा 50 किलो डीएपी खाद की एक बोरी के साथ एक किलो चाय पत्ती खरीदने की शर्त थोपना किसानों की मजबूरी का फायदा उठाने जैसा है।
विज्ञापन
चहल ने कहा कि भाजपा की डबल इंजन सरकार ने वित्तीय वर्ष 2023-24 में खाद सब्सिडी के लिए 2.25 लाख करोड़ रुपये का प्रावधान किया था, जो 2024-25 में घटाकर 1.77 लाख करोड़ रुपये कर दिया गया और 2025-26 के लिए यह राशि और घटकर 1.67 लाख करोड़ रुपये रह गई है। यह किसानों के साथ धोखा है।
विज्ञापन
इस मौके पर यूनियन के युवा प्रदेश अध्यक्ष नरेंद्र मागो माजरी ने भी सरकार की नीतियों की आलोचना करते हुए कहा कि सरकार को किसानों की जरूरतों को प्राथमिकता देनी चाहिए, न कि व्यापारिक शर्तें थोपनी चाहिए। वहीं जिला अध्यक्ष बलकार मलिक खुराना ने कहा कि महंगाई के इस दौर में खेती किसानों के लिए घाटे का सौदा बनती जा रही है। ऐसे में सरकार को सब्सिडी बढ़ाकर किसानों को राहत देनी चाहिए थी।
इस अवसर पर कृष्ण मालखेड़ी, सुरेंद्र प्यौदा, डीसी चहल, बिंदर गिल सिरटा, विक्रम चहल, जोगिंद्र कुंडू, सुरेश नरड़, जोरा भैनी माजरा सहित कई किसान नेता मौजूद रहे।