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Kaithal News: प्रेम और सद्भाव के रंगों से आध्यत्मिक होली
Wed, 04 Mar 2026 12:33 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
Updated Wed, 04 Mar 2026 12:33 AM IST
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संवाद न्यूज एजेंसी
राजौंद। सेवा केंद्र पर होली का पर्व हर्षोल्लास और आध्यात्मिक वातावरण में मनाया गया। कार्यक्रम में उपस्थित भाई-बहनों को संबोधित करते हुए राजयोगिनी ब्रह्माकुमारी सरिता दीदी ने कहा कि होली का त्योहार हमें जीवन को प्रेम, शांति, खुशी, आनंद, सद्भाव और एकता के रंगों से भरने का संदेश देता है।
उन्होंने कहा कि यदि किसी से लंबे समय से संवाद नहीं हुआ है या रिश्तों में मनमुटाव आ गया है, तो होली के अवसर पर पहल करते हुए उन्हें शुभकामनाएं दें और संबंधों में जमी कड़वाहट को प्रेम के रंग से मिटाएं। उन्होंने कहा कि इस पहल से मिलने वाली खुशी और आत्मसंतोष का वर्णन शब्दों में नहीं किया जा सकता।
ब्रह्माकुमारी बहनों ने पिचकारी से गुलाब जल छिड़ककर तथा फूलों से होली खेली और पर्व के आध्यात्मिक महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि होलिका दहन के समय अग्नि के समक्ष संकल्प लेना चाहिए कि जीवन की बुराइयां, नकारात्मक विचार और कमजोरियां इस पवित्र अग्नि में जलकर समाप्त हो जाएं। साथ ही अपनी एक कमजोरी को कागज पर लिखकर होलिका में समर्पित करने से मन हल्का होता है और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है। इस अवसर पर ब्रह्माकुमारी किरण बहन और आशा बहन ने भी विचार व्यक्त करते हुए कहा कि आत्मा के मूल स्वरूप में खुशी, शांति, प्रेम, सुख, पवित्रता, आनंद और शक्ति जैसी सात विशेषताएं निहित हैं। कार्यक्रम में अशोक, प्रताप भाई, मुकेश भाई, सोनू भाई और कमला माता आदि उपस्थित रहे।
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राजौंद। सेवा केंद्र पर होली का पर्व हर्षोल्लास और आध्यात्मिक वातावरण में मनाया गया। कार्यक्रम में उपस्थित भाई-बहनों को संबोधित करते हुए राजयोगिनी ब्रह्माकुमारी सरिता दीदी ने कहा कि होली का त्योहार हमें जीवन को प्रेम, शांति, खुशी, आनंद, सद्भाव और एकता के रंगों से भरने का संदेश देता है।
उन्होंने कहा कि यदि किसी से लंबे समय से संवाद नहीं हुआ है या रिश्तों में मनमुटाव आ गया है, तो होली के अवसर पर पहल करते हुए उन्हें शुभकामनाएं दें और संबंधों में जमी कड़वाहट को प्रेम के रंग से मिटाएं। उन्होंने कहा कि इस पहल से मिलने वाली खुशी और आत्मसंतोष का वर्णन शब्दों में नहीं किया जा सकता।
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ब्रह्माकुमारी बहनों ने पिचकारी से गुलाब जल छिड़ककर तथा फूलों से होली खेली और पर्व के आध्यात्मिक महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि होलिका दहन के समय अग्नि के समक्ष संकल्प लेना चाहिए कि जीवन की बुराइयां, नकारात्मक विचार और कमजोरियां इस पवित्र अग्नि में जलकर समाप्त हो जाएं। साथ ही अपनी एक कमजोरी को कागज पर लिखकर होलिका में समर्पित करने से मन हल्का होता है और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है। इस अवसर पर ब्रह्माकुमारी किरण बहन और आशा बहन ने भी विचार व्यक्त करते हुए कहा कि आत्मा के मूल स्वरूप में खुशी, शांति, प्रेम, सुख, पवित्रता, आनंद और शक्ति जैसी सात विशेषताएं निहित हैं। कार्यक्रम में अशोक, प्रताप भाई, मुकेश भाई, सोनू भाई और कमला माता आदि उपस्थित रहे।
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