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Kaithal News: राजौंद मंडी में उठान धीमी, जताया रोष
Sun, 27 Apr 2025 12:43 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
Updated Sun, 27 Apr 2025 12:43 AM IST
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राजौंद। अनाज मंडी में गेहूं की उठान धीमी गति से होने को लेकर आढ़तियों सहित मजदूरों व किसानों ने रोष जताया है। अनाज मंडी में गेहूं के अंबार लगे हुए हैं। पूरी अनाज मंडी गेहूं से भरी पड़ी है, लेकिन उठान नहीं हो रहा। इस कारण आढ़तियों व किसानों और मजदूरों ने रोष प्रकट किया है।
आढ़तियों ने बताया कि लगभग 15 दिन से उठान का कार्य न मात्र हो रहा है। राजौंद अनाज मंडी एसोसिएशन के प्रधान महिपाल राणा ने बताया कि राजौंद अनाज मंडी में साढे़ पांच लाख कट्टे गेहूं के आ चुके हैं। जिनमें से मात्र 70 हजार कट्टों का ही उठान अभी तक हो पाया है।
दूसरा किसानों का भुगतान न होने से किसान उन पर भुगतान के लिए दबाव बना रहे हैं जबकि गेहूं अभी तक मंडी में ही पड़ी है। उन्होंने कहा कि गेहूं उठान के 72 घंटे बाद किसानों के खाते में रुपये आते हैं, लेकिन 15 दिन से अभी गेहूं मंडी में ही पड़ी है ऐसे में किसान को पैसे कहां से मिलेंगे।
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उन्होंने बताया कि इस बारे एसडीएम कैथल से भी मिले थे लेकिन गेहूं उठान में कोई सुधार नहीं हुआ। पूरी मंडी गेहूं की बोरियों व खुले गेहूं से भरी पड़ी है। उधर, प्रवासी मजदूरों ने कहा कि 15 दिन से वे खाली बैठे हैं। एक से दो गाड़ी बड़ी मुश्किल से दिन में आती है और 300 मजदूरों को 100 से 150 रुपये तक ही प्रतिदिन बन पाते हैं। ऐसे में वह अपना गुजारा कैसे करें और अपने परिवार को क्या भेजेंगे। उन्होंने सरकार व प्रशासन से मांग करते हुए कहा है कि गेहूं की लिफ्टिंग का कार्य शीघ्र बढ़ाया जाए। संवाद
आढ़तियों ने बताया कि लगभग 15 दिन से उठान का कार्य न मात्र हो रहा है। राजौंद अनाज मंडी एसोसिएशन के प्रधान महिपाल राणा ने बताया कि राजौंद अनाज मंडी में साढे़ पांच लाख कट्टे गेहूं के आ चुके हैं। जिनमें से मात्र 70 हजार कट्टों का ही उठान अभी तक हो पाया है।
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दूसरा किसानों का भुगतान न होने से किसान उन पर भुगतान के लिए दबाव बना रहे हैं जबकि गेहूं अभी तक मंडी में ही पड़ी है। उन्होंने कहा कि गेहूं उठान के 72 घंटे बाद किसानों के खाते में रुपये आते हैं, लेकिन 15 दिन से अभी गेहूं मंडी में ही पड़ी है ऐसे में किसान को पैसे कहां से मिलेंगे।
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उन्होंने बताया कि इस बारे एसडीएम कैथल से भी मिले थे लेकिन गेहूं उठान में कोई सुधार नहीं हुआ। पूरी मंडी गेहूं की बोरियों व खुले गेहूं से भरी पड़ी है। उधर, प्रवासी मजदूरों ने कहा कि 15 दिन से वे खाली बैठे हैं। एक से दो गाड़ी बड़ी मुश्किल से दिन में आती है और 300 मजदूरों को 100 से 150 रुपये तक ही प्रतिदिन बन पाते हैं। ऐसे में वह अपना गुजारा कैसे करें और अपने परिवार को क्या भेजेंगे। उन्होंने सरकार व प्रशासन से मांग करते हुए कहा है कि गेहूं की लिफ्टिंग का कार्य शीघ्र बढ़ाया जाए। संवाद