{"_id":"677fb40ba3e6b6c025d247623ab6aab9","slug":"sivan-youth-back-from-iraq","type":"story","status":"publish","title_hn":"‘सरकार मदद न करती तो इराक से लाश ही भारत आती’","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
‘सरकार मदद न करती तो इराक से लाश ही भारत आती’
ब्यूरो/अमर उजाला, कैथ्ाल
Updated Sun, 06 Jul 2014 11:55 PM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
सीवन। केंद्र सरकार की मदद से सीवन के गांव कक्योर माजरा का निवासी मस्तान सिंह इराक से सही सलामत अपने गांव में लौट आया। मस्तान घर लौटने से परिवार के साथ-साथ पूरे गांव में जश्न का माहौल है। देर सांय मस्तान सिंह ने जैसे ही अपने गांव में कदम रखा तो उसने सबसे पहले गांव की मिट्टी को अपने माथे पर लगाया, जिससे उसके इंतजार में बैठे परिजन व गांव के अन्य लोगों की आंखों में खुशी के आंसू छलक पड़े।
माहौल गमगीन होता देख गांव के बड़े-बुजुर्गों ने मस्तान सिंह व उसके परिजनों को ढांढस देकर संभाला। इसके बाद शुरू हुई मस्तान के इराक में रहने और वतन वापसी के लिए की गई जद्दोजहद की कहानी। फिल्मी सी लगने वाली कहानी का हीरो खुद मस्तान सिंह है, जिसने करीब एक महीने तक भूखे-प्यासे रहकर जीवन जीने का संकल्प बनाए रखा और अपने वतन वापसी का रास्ता खोजा।
भारतीय दूतावास के अधिकारियों की प्रशंसा
भारत सरकार और इराक में स्थित भारतीय दूतावास के अधिकारियों की कार्यप्रणाली की प्रशंसा करते हुए मस्तान सिंह ने कहा यदि भारतीय दूतावास के अधिकारी उनकी मदद नहीं करते तो आज वह जिंदा भारत न लौटता। अलबत्ता, देर- सवेर उसकी लाश ही भारत आती। मस्तान नेे बताया कि उन्होंने किसी तरह भारतीय दूतावास का फोन नंबर प्राप्त किया और संबंधित अधिकारियों को फोन पर अपनी आपबीती सुनाई। मस्तान सिंह के अनुसार, दूतावास के अधिकारियों ने तुरंत कार्रवाई की और वह बताई गई जगह पर पहुंच गया।
विज्ञापन
इसके बाद दूतावास के अधिकारियों ने उसे भारत भिजवाने का बंदोबस्त किया। मस्तान ने बताया कि भारतीय दूतावास ने न केवल उनकी वतन वापसी का इंतजाम किया और आते समय बीस डालर भी दिए। इराक से जयपुर की फ्लाइट में भी उन्हें फ्री में ही बिठाया गया। इसके बाद वह सड़क रास्ते से अपने घर आ गया।
चार महीने पहले इराक गया था मस्तान
मस्तान सिंह ने बताया कि वह चार महीने पहले ही रोजगार की तलाश और अपने घर की खुशहाली के लिए शिव इंटरप्राइज कंपनी के माध्यम से इराक गया था। उसने बताया कि जब इराक में युद्ध जैसे हालात बन रहे थे तो उसने व उसके साथियों ने कंपनी के अधिकारियों को कहा था कि वे भारत लौटना चाहते हैं। परंतु कंपनी ने उनका पासपोर्ट छीन लिया।
भूना के युवक केे लौटने का इंतजार
सलामत घर आने से न केवल उसके परिजनों में बल्कि समूचे गांव में खुशी का माहौल है। दूसरी तरफ भूना प्लाट का एक और युवक इराक गया हुआ है। उसके परिजनों को अभी तक उसकी वापसी का इंतजार है। उसके साथ अब उनकी फोन पर बात हो जाती है और उन्हें उम्मीद है कि उनके जिगर का टुकड़ा भी शीघ्र ही वतन लौटेगा।
ऐसी नौकरी की जरूरत नहीं: मां
अपने बेटे की घर वापसी से आनंदित मस्तान की मां प्रीतम कौर ने कहा कि उनका लाड़ला उनके पास आ गया है और उन्हें कुछ नहीं चाहिए। ऐसी नौकरी की उन्हें जरूरत नहीं है।
वाहेगुरु पर पूरा भरोसा था: पत्नी
मस्तान सिंह की पत्नी जसबीर कौर ने अपने सुहाग की घर वापसी पर भगवान का धन्यवाद प्रकट करते हुए कहा कि उन्हें वाहेगुरु पर पूरा भरोसा था कि उसका सुहाग उग्रवादियों के बीच में भी सुरक्षित रहेगा और जल्द ही सही-सलामत उनके पास लौट आएगा।
विज्ञापन
माहौल गमगीन होता देख गांव के बड़े-बुजुर्गों ने मस्तान सिंह व उसके परिजनों को ढांढस देकर संभाला। इसके बाद शुरू हुई मस्तान के इराक में रहने और वतन वापसी के लिए की गई जद्दोजहद की कहानी। फिल्मी सी लगने वाली कहानी का हीरो खुद मस्तान सिंह है, जिसने करीब एक महीने तक भूखे-प्यासे रहकर जीवन जीने का संकल्प बनाए रखा और अपने वतन वापसी का रास्ता खोजा।
विज्ञापन
भारतीय दूतावास के अधिकारियों की प्रशंसा
भारत सरकार और इराक में स्थित भारतीय दूतावास के अधिकारियों की कार्यप्रणाली की प्रशंसा करते हुए मस्तान सिंह ने कहा यदि भारतीय दूतावास के अधिकारी उनकी मदद नहीं करते तो आज वह जिंदा भारत न लौटता। अलबत्ता, देर- सवेर उसकी लाश ही भारत आती। मस्तान नेे बताया कि उन्होंने किसी तरह भारतीय दूतावास का फोन नंबर प्राप्त किया और संबंधित अधिकारियों को फोन पर अपनी आपबीती सुनाई। मस्तान सिंह के अनुसार, दूतावास के अधिकारियों ने तुरंत कार्रवाई की और वह बताई गई जगह पर पहुंच गया।
विज्ञापन
इसके बाद दूतावास के अधिकारियों ने उसे भारत भिजवाने का बंदोबस्त किया। मस्तान ने बताया कि भारतीय दूतावास ने न केवल उनकी वतन वापसी का इंतजाम किया और आते समय बीस डालर भी दिए। इराक से जयपुर की फ्लाइट में भी उन्हें फ्री में ही बिठाया गया। इसके बाद वह सड़क रास्ते से अपने घर आ गया।
चार महीने पहले इराक गया था मस्तान
मस्तान सिंह ने बताया कि वह चार महीने पहले ही रोजगार की तलाश और अपने घर की खुशहाली के लिए शिव इंटरप्राइज कंपनी के माध्यम से इराक गया था। उसने बताया कि जब इराक में युद्ध जैसे हालात बन रहे थे तो उसने व उसके साथियों ने कंपनी के अधिकारियों को कहा था कि वे भारत लौटना चाहते हैं। परंतु कंपनी ने उनका पासपोर्ट छीन लिया।
भूना के युवक केे लौटने का इंतजार
सलामत घर आने से न केवल उसके परिजनों में बल्कि समूचे गांव में खुशी का माहौल है। दूसरी तरफ भूना प्लाट का एक और युवक इराक गया हुआ है। उसके परिजनों को अभी तक उसकी वापसी का इंतजार है। उसके साथ अब उनकी फोन पर बात हो जाती है और उन्हें उम्मीद है कि उनके जिगर का टुकड़ा भी शीघ्र ही वतन लौटेगा।
ऐसी नौकरी की जरूरत नहीं: मां
अपने बेटे की घर वापसी से आनंदित मस्तान की मां प्रीतम कौर ने कहा कि उनका लाड़ला उनके पास आ गया है और उन्हें कुछ नहीं चाहिए। ऐसी नौकरी की उन्हें जरूरत नहीं है।
वाहेगुरु पर पूरा भरोसा था: पत्नी
मस्तान सिंह की पत्नी जसबीर कौर ने अपने सुहाग की घर वापसी पर भगवान का धन्यवाद प्रकट करते हुए कहा कि उन्हें वाहेगुरु पर पूरा भरोसा था कि उसका सुहाग उग्रवादियों के बीच में भी सुरक्षित रहेगा और जल्द ही सही-सलामत उनके पास लौट आएगा।