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शीतलहर से छूटी कंपकंपी, सूर्यदेव के दर्शन को तरसे लोग
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Shivering left by cold wave, people yearn for the sight of Sun God
- फोटो : Kaithal
कैथल। सप्ताह भर से मौसम में बदलाव के कारण ठंड से लोग बेहाल हैं। शीतलहर से जहां लोगों की कंपकंपी बढ़ गई है। वहीं सूर्यदेव के दर्शन के लिए लोग तीसरे दिन भी तरस गए।कड़ाके की ठंड का आम जन-जीवन सहित सब्जियों और फलों की फसलों की आपूर्ति पर भी असर पड़ा है। मौसम विशेषज्ञों का अनुमान है कि 19 जनवरी तक मौसम के परिवर्तनशील रहने की संभावना हैं। 17 जनवरी से पश्चिमी विक्षोभ के आंशिक प्रभाव के कारण बादल छाए रहेंगे और ठंडी हवाएं चलेंगी।
बर्फीली हवाओं ने आमजन की परेशानी बढ़ गई है। धूप न निकलने, हल्की धुंध छाई रहने के चलते सामान्य जनजीवन भी प्रभावित हुआ। पिछले 24 घंटों के दौरान कैथल जिले में अधिकतम तापमान 15 और न्यूनतम 4.5 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। धुंध न होने के कारण दृश्यता पूरी रही, लेकिन शीतलहर के चलते लोगों को ठंड का एहसास हुआ। शनिवार को दिनभर कड़ाके की ठंड पड़ने व शीतलहर चलने की वजह से केवल जरूरी सामान के खरीददार ही घर से बाहर दिखाई दिए। पिछले एक सप्ताह से तापमान में लगातार गिरावट का सिलसिला जारी रहने, दिन रात शीतलहर चलने से जिले के ग्रामीण व शहरी क्षेत्र में लोगों की दिनचर्या प्रभावित हुई है। कृषि विज्ञान केंद्र के मुख्य वैज्ञानिक डॉ. रमेश वर्मा ने बताया कि 19 जनवरी तक मौसम आमतौर पर परिवर्तनशील रहने की संभावना है। 16 जनवरी को उत्तर पश्चिमी हवा शीतलहर की संभावना बना रही है। 17 जनवरी से पश्चिमी विक्षोभ के आंशिक प्रभाव से हवा में बदलाव उत्तर पश्चिम से दक्षिण पूर्व व पूर्वी हो जाने से राज्य के ज्यादातर क्षेत्रों में आंशिक बादल छाए रहने की संभावना है।
बच्चों और बुजुर्गों का विशेष ध्यान रखें
मौसम में बदलाव के चलते ठंड से जुड़ी बीमारियों से प्रभावित मरीजों की संख्या तेजी से बढ़ती जा रही है। इनमें वायरल, जुकाम, बुखार, टायफाइड, उच्च रक्तचाप, मधुमेह, हृदय रोग से प्रभावित मरीजों की संख्या अधिक है। चिकित्सक डा. एमएस शाह का कहना है कि सर्दी में बच्चों और बुजुर्गों का विशेष ध्यान रखा जाए। गर्म कपड़े पहनने चाहिए। गर्म खाद्य पदार्थ खाएं। बुखार होने पर चिकित्सक को दिखाएं।
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सब्जियों को ठंड से बचाने के लिए चारों ओर करें धुआं
रात के समय में पाला पड़ने और बारिश की वजह से सब्जी की फसलों में काफी नुकसान हुआ है। सब्जी उत्पादक किसान राजेश कुमार ने बताया कि बीते दिनों जो बारिश हुई है, उससे आलू, गाजर, मूली, मटर, गोभी की फसल को नुकसान हुआ है। इस वजह से सब्जियों का उत्पादन कम हो गया है और मंडियों में भी कम मात्रा में ही सब्जियां पहुंच रही है। उन्होंने कहा कि मौजूदा सर्दी से फसल को नुकसान नहीं है। यदि पाला जमता है तो नुकसान हो सकता है।
कृषि उपनिदेशक डॉ. कर्मचंद ने बताया कि पाला पड़ने से सब्जियों की फसलों को नुकसान हुआ है।
जिलेभर में लगभग 4 हजार हेक्टेयर में सब्जियों का उत्पादन होता है। सब्जियों को पाले से बचाने के लिए सब्जियों के चारों ओर धुआं करना चाहिए। हरे चारे की फसल को सर्दी से बचाव के लिए आधा लीटर सल्फर का स्प्रे बरसीन में करें या सुबह के समय ताजा पानी का स्प्रे भी कर सकते हैं।
पशुओं के बैठने का स्थान को रखें सूखा
सर्दी बढ़ने के साथ पशुओं में भी बीमारियों का प्रभाव बढ़ा है। सर्दी के कारण पशुओं में पेट चलना, बुखार, पशु का ठीक से घास न खाना जैसी बीमारियां वायरल हैं। वेटनरी सर्जन डॉ. सुरेंद्र नैन ने बताया कि पशुओं को सर्दी से बचाव के लिए अंदर बांध के रखें, ताजा पानी पिलाएं, पशुओं के बांधने का जो स्थान है, उसे ढककर रखें ताकि सीधी हवा पशुओं को न लग पाए, इसके साथ पशुओं को बोरी से ढकें। पशुओं के बैठने के स्थान पर सूखा रखें, यदि दिन में धूप निकलती है तो बाहर बांधे, यदि अधिक ठंड है तो पशुओं के पास अंगीठी लगाएं। सर्दी के मौसम में पशुओं का नहलाना नहीं चाहिए।
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बर्फीली हवाओं ने आमजन की परेशानी बढ़ गई है। धूप न निकलने, हल्की धुंध छाई रहने के चलते सामान्य जनजीवन भी प्रभावित हुआ। पिछले 24 घंटों के दौरान कैथल जिले में अधिकतम तापमान 15 और न्यूनतम 4.5 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। धुंध न होने के कारण दृश्यता पूरी रही, लेकिन शीतलहर के चलते लोगों को ठंड का एहसास हुआ। शनिवार को दिनभर कड़ाके की ठंड पड़ने व शीतलहर चलने की वजह से केवल जरूरी सामान के खरीददार ही घर से बाहर दिखाई दिए। पिछले एक सप्ताह से तापमान में लगातार गिरावट का सिलसिला जारी रहने, दिन रात शीतलहर चलने से जिले के ग्रामीण व शहरी क्षेत्र में लोगों की दिनचर्या प्रभावित हुई है। कृषि विज्ञान केंद्र के मुख्य वैज्ञानिक डॉ. रमेश वर्मा ने बताया कि 19 जनवरी तक मौसम आमतौर पर परिवर्तनशील रहने की संभावना है। 16 जनवरी को उत्तर पश्चिमी हवा शीतलहर की संभावना बना रही है। 17 जनवरी से पश्चिमी विक्षोभ के आंशिक प्रभाव से हवा में बदलाव उत्तर पश्चिम से दक्षिण पूर्व व पूर्वी हो जाने से राज्य के ज्यादातर क्षेत्रों में आंशिक बादल छाए रहने की संभावना है।
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बच्चों और बुजुर्गों का विशेष ध्यान रखें
मौसम में बदलाव के चलते ठंड से जुड़ी बीमारियों से प्रभावित मरीजों की संख्या तेजी से बढ़ती जा रही है। इनमें वायरल, जुकाम, बुखार, टायफाइड, उच्च रक्तचाप, मधुमेह, हृदय रोग से प्रभावित मरीजों की संख्या अधिक है। चिकित्सक डा. एमएस शाह का कहना है कि सर्दी में बच्चों और बुजुर्गों का विशेष ध्यान रखा जाए। गर्म कपड़े पहनने चाहिए। गर्म खाद्य पदार्थ खाएं। बुखार होने पर चिकित्सक को दिखाएं।
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सब्जियों को ठंड से बचाने के लिए चारों ओर करें धुआं
रात के समय में पाला पड़ने और बारिश की वजह से सब्जी की फसलों में काफी नुकसान हुआ है। सब्जी उत्पादक किसान राजेश कुमार ने बताया कि बीते दिनों जो बारिश हुई है, उससे आलू, गाजर, मूली, मटर, गोभी की फसल को नुकसान हुआ है। इस वजह से सब्जियों का उत्पादन कम हो गया है और मंडियों में भी कम मात्रा में ही सब्जियां पहुंच रही है। उन्होंने कहा कि मौजूदा सर्दी से फसल को नुकसान नहीं है। यदि पाला जमता है तो नुकसान हो सकता है।
कृषि उपनिदेशक डॉ. कर्मचंद ने बताया कि पाला पड़ने से सब्जियों की फसलों को नुकसान हुआ है।
जिलेभर में लगभग 4 हजार हेक्टेयर में सब्जियों का उत्पादन होता है। सब्जियों को पाले से बचाने के लिए सब्जियों के चारों ओर धुआं करना चाहिए। हरे चारे की फसल को सर्दी से बचाव के लिए आधा लीटर सल्फर का स्प्रे बरसीन में करें या सुबह के समय ताजा पानी का स्प्रे भी कर सकते हैं।
पशुओं के बैठने का स्थान को रखें सूखा
सर्दी बढ़ने के साथ पशुओं में भी बीमारियों का प्रभाव बढ़ा है। सर्दी के कारण पशुओं में पेट चलना, बुखार, पशु का ठीक से घास न खाना जैसी बीमारियां वायरल हैं। वेटनरी सर्जन डॉ. सुरेंद्र नैन ने बताया कि पशुओं को सर्दी से बचाव के लिए अंदर बांध के रखें, ताजा पानी पिलाएं, पशुओं के बांधने का जो स्थान है, उसे ढककर रखें ताकि सीधी हवा पशुओं को न लग पाए, इसके साथ पशुओं को बोरी से ढकें। पशुओं के बैठने के स्थान पर सूखा रखें, यदि दिन में धूप निकलती है तो बाहर बांधे, यदि अधिक ठंड है तो पशुओं के पास अंगीठी लगाएं। सर्दी के मौसम में पशुओं का नहलाना नहीं चाहिए।