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पीएम विश्वकर्मा योजना के लंबित आवेदनों का जल्द करें निपटान : डीसी
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कैथल। प्रधानमंत्री विश्वकर्मा योजना को लेकर लघु सचिवालय के सभागार में समीक्षा बैठक का आयोजन किया गया। बैठक की अध्यक्षता डीसी प्रीति ने की। डीसी प्रीति ने कहा कि इस योजना के तहत लंबित आवेदनों पर त्वरित कार्रवाई करते हुए पात्रों को इस योजना का लाभ प्रदान करना सुनिश्चित किया जाए। सभी संबंधित अधिकारी इस योजना को गंभीरता से लें।
जल्द से जल्द इस संबंध में सरपंचों की ट्रेनिंग करवाना सुनिश्चित करें। डीसी प्रीति ने कहा कि योजना के तहत विभिन्न प्रकार के पारंपरिक व्यवसायों को शामिल किया गया है, जिनमें नाव बनाना, शस्त्राकार, लुहार, हथौड़ा व लोहे के औजार बनाना, ताला बनाना, सुनार, कुंभकार, मूर्तिकार, मोची, राजमिस्त्री, टोकरी, सुथार, चटाई बनाना, गुडि़या व खिलौने बनाना, बारबर, धोबी, दर्जी और मछली पकड़ने के लिए जाल बनाने का काम शामिल है।
उन्होंने ग्रामीण क्षेत्रों में इस स्कीम के तहत आवेदनों की संख्या बढ़ाने को लेकर डीडीपीओ व बीडीपीओ तथा शहरी क्षेत्रों में नगर परिषद व नगर पालिकाओं के सचिवों को निर्देश जारी किए। उन्होंने योजना के पात्र सभी कारीगरों का आह्वान किया कि वे तुरंत इस योजना को लेकर अपना रजिस्ट्रेशन करें और लाभ उठाएं। योजना के तहत आवेदन फार्म को गांव के सरपंच और शहरी स्थानीय निकाय के पार्षद द्वारा सत्यापित किया जाएगा कि आवेदनकर्ता की ओर से दर्शाया गया कारीगरी का कार्य वह करता है या नहीं।
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उन्होंने कहा कि शिल्पकार व कारीगर समाज के नवनिर्माण में अपना बहुमूल्य सहयोग देते हैं। शिल्पकारों व कारीगरों के हुनर को सम्मान देते हुए केंद्र सरकार की ओर से पीएम विश्वकर्मा योजना की शुरुआत की गई है, जिससे शिल्पकारों व कारीगरों के हुनर को पहचान मिलेगी।
एमएसएमई केंद्र कैथल के उप-निदेशक कपिल मित्तल ने बताया कि इस योजना के तहत पात्र लाभार्थी को प्रशिक्षण तथा सर्टिफिकेट दिया जाएगा। टूल किट खरीदने के लिए 15 हजार रुपये का अनुदान मिलेगा तथा सस्ता ऋण दिया जाएगा।
योग्यता मापदंड के बारे में जानकारी देते हुए बताया कि इस स्कीम का लाभ लेने के लिए न्यूनतम आयु 18 वर्ष, पिछले पांच वर्षों में पीएमईजीपी, पीएम स्वनिधि एवं मुद्रा योजना के तहत ऋण नहीं लिया हो। सरकारी सेवा में कार्यरत नहीं होना चाहिए। इस अवसर पर डीडीपीओ कंवर दमन, एमएसएमई डीएफओ मुकेश वर्मा, एलडीएम एसके नंदा, ईओ कुलदीप, बलदेव, बीडीपीओ जगजीत, नेहा, अन्नू टोंक, प्रवीण प्रजापति, रामपाल के अलावा अन्य अधिकारीगण मौजूद रहे।
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जल्द से जल्द इस संबंध में सरपंचों की ट्रेनिंग करवाना सुनिश्चित करें। डीसी प्रीति ने कहा कि योजना के तहत विभिन्न प्रकार के पारंपरिक व्यवसायों को शामिल किया गया है, जिनमें नाव बनाना, शस्त्राकार, लुहार, हथौड़ा व लोहे के औजार बनाना, ताला बनाना, सुनार, कुंभकार, मूर्तिकार, मोची, राजमिस्त्री, टोकरी, सुथार, चटाई बनाना, गुडि़या व खिलौने बनाना, बारबर, धोबी, दर्जी और मछली पकड़ने के लिए जाल बनाने का काम शामिल है।
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उन्होंने ग्रामीण क्षेत्रों में इस स्कीम के तहत आवेदनों की संख्या बढ़ाने को लेकर डीडीपीओ व बीडीपीओ तथा शहरी क्षेत्रों में नगर परिषद व नगर पालिकाओं के सचिवों को निर्देश जारी किए। उन्होंने योजना के पात्र सभी कारीगरों का आह्वान किया कि वे तुरंत इस योजना को लेकर अपना रजिस्ट्रेशन करें और लाभ उठाएं। योजना के तहत आवेदन फार्म को गांव के सरपंच और शहरी स्थानीय निकाय के पार्षद द्वारा सत्यापित किया जाएगा कि आवेदनकर्ता की ओर से दर्शाया गया कारीगरी का कार्य वह करता है या नहीं।
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उन्होंने कहा कि शिल्पकार व कारीगर समाज के नवनिर्माण में अपना बहुमूल्य सहयोग देते हैं। शिल्पकारों व कारीगरों के हुनर को सम्मान देते हुए केंद्र सरकार की ओर से पीएम विश्वकर्मा योजना की शुरुआत की गई है, जिससे शिल्पकारों व कारीगरों के हुनर को पहचान मिलेगी।
एमएसएमई केंद्र कैथल के उप-निदेशक कपिल मित्तल ने बताया कि इस योजना के तहत पात्र लाभार्थी को प्रशिक्षण तथा सर्टिफिकेट दिया जाएगा। टूल किट खरीदने के लिए 15 हजार रुपये का अनुदान मिलेगा तथा सस्ता ऋण दिया जाएगा।
योग्यता मापदंड के बारे में जानकारी देते हुए बताया कि इस स्कीम का लाभ लेने के लिए न्यूनतम आयु 18 वर्ष, पिछले पांच वर्षों में पीएमईजीपी, पीएम स्वनिधि एवं मुद्रा योजना के तहत ऋण नहीं लिया हो। सरकारी सेवा में कार्यरत नहीं होना चाहिए। इस अवसर पर डीडीपीओ कंवर दमन, एमएसएमई डीएफओ मुकेश वर्मा, एलडीएम एसके नंदा, ईओ कुलदीप, बलदेव, बीडीपीओ जगजीत, नेहा, अन्नू टोंक, प्रवीण प्रजापति, रामपाल के अलावा अन्य अधिकारीगण मौजूद रहे।