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पहले दिन नहीं हुई धान की सरकारी खरीद, किसान मायूस
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sell in rice
- फोटो : Kaithal
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सरकार ने कागजों में तो सरकारी खरीद के आदेश जारी कर दिए। लेकिन अनाज मंडियों में न धान खरीद की तैयारियां हैं और न ही सरकार द्वारा खरीद पोर्टल शुरू किया गया है। अधिकारी कहने को तो नमी को खरीद न होने का कारण बता रहे हैं, लेकिन सचाई यह है कि मंडियों में तैयारियां नहीं हैं। जिस कारण पहले दिन रविवार को धान की सरकारी खरीद नहीं हो पाई। सरकारी खरीद में नया पेंच अब सरकार द्वारा जारी नई खरीद प्रक्रिया का आ गया है। आढ़तियों का कहना है कि सरकार बिना मिलर्स के खरीद करने की बात कह रही है। जो संभव नहीं है।
एसडीएम संजय कुमार ने शहर की दोनों मंडी के प्रधानों व आढ़तियों के साथ बैठक की। जिसमें आढ़तियों ने उनको साफ कह दिया है कि जब तक सरकारी खरीद में खरीद एजेंसियों के अधिकारियों के साथ राइस मिल वाले नहीं आते, वे किसी भी कीमत पर खरीद शुरू नहीं करेंगे। यदि सरकार अपनी तरफ से खरीद शुरू करना चाहती है तो वे किसानों को बुलाए और अधिकारी उनका धान खरीद कर स्वयं उठा कर ले जाए और बेशक फसल की अदायगी भी उनके ही खाते में कर दे। आढ़ती बीच में नहीं आएंगे। दूसरी ओर अनाज मंडी में किसान धान की फसल लिए बैठे रहे। लेकिन बिक्री नहीं हो पाई।
आढ़ती एसोसिएशन के प्रधान कृष्ण मित्तल व श्याम बहादुर खुरानिया ने कहा कि बिना मिलर्स के खरीद संभव नहीं है। एसडीएम को अवगत करवा दिया है। साथ ही चंडीगढ़ से एसएमएस प्रक्रिया से भी परेशानी आएगी। रविवार को धान की खरीद नहीं हो पाई।
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मार्केट कमेटी सचिव दीपक कुमार ने कहा कि जब तक किसानों के पास एसएमएस न आ जाए, तब तक वे धान लेकर मंडी में नहीं आएं।
डीएफएससी प्रमोद शर्मा का कहना है कि रविवार को अधिकारी खरीद के लिए गए थे। नमी 17 प्रतिशत से ज्यादा होने के कारण खरीद नहीं हो पाई। आढ़ती खरीद करवाएं या ना करवाएं। सोमवार से धान की खरीद शुरू करवा दी जाएगी।
राइस मिलर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष अमरजीत छाबड़ा ने कहा कि सरकार की सीएमआर पॉलिसी के अनुसार मिल चलाने में मिलर्स को नुकसान है। बंद रखने में कम नुकसान है। इसीलिए अभी तक मिलर्स ने रजिस्ट्रेशन ही नहीं करवाया है।
आढ़तियों के सवाल:
सरकार ने गेहूं की तर्ज पर बिना राइस मिलर्स के इंस्पेक्टर द्वारा खरीद करके मंडी से ट्रांसपोर्टर के माध्यम से उठान करवाए जाने के आदेश दिए हैं। इस पर आढ़तियों को आपत्ति है।
1. पीआर ग्रुप में कई किस्में है और जिनको राइस मिल वाले या तो लेना ही नही चाहते और यदि लेना चाहते हैं तो बहुत कम कीमत पर। ऐसी हालत में जब उसको खरीद अधिकारी लेकर जाएगा और बाद में राइस मिल उतारने से मना कर देगा तो उस धान को वहां लेकर जाने और वापस मंडी में लेकर आने का खर्च कौन वहन करेगा।
2. इंस्पेक्टर द्वारा धान की खरीद के बाद यदि तीन-चार दिन तक धान का उठान नहीं हुआ तो यह खराब हो जाएगा, इसकी जिम्मेवारी किसकी होगी?
3. नुकसान से बचने के लिए आढ़ती अपनी दुकान से जल्दी माल उठवाने के लिए ट्रांसपोर्टर को प्रति कट्टा रिश्वत देगा। गेहूं के सीजन की तरह से इससे आढ़तियों को भारी नुकसान होगा।
4. इस बार चंडीगढ़ से किसानों के पास एसएमएस जाएंगे। जिसका आढ़तियों को पता नहीं होगा। यदि किसी जमींदार की फसल तैयार नहीं है तो वह तुरंत कैसे अपनी फसल एसएमएस जाते ही मंडी में ले आएगा। उस दिन नहीं ला सका तो उसकी फसल कब बिकेगी?
इन सवालों पर एसडीएम संजय कुमार ने कहा कि आढ़तियों की जो भी परेशानी है। उसके बारे में आला अधिकारियों को अवगत करवा दिया जाएगा। एसडीएम ने प्रधानों व आढ़तियों से मंडी में समस्याओं के बारे में भी जाना। आढ़तियों ने मंडी के गेट नंबर चार पर गेट न लगने, सड़कों, पेयजल, बिजली आदि की अनेक समस्यायें बताई। पुरानी मंडी प्रधान श्याम बहादुर खुरानियां, नई मंडी प्रधान कृष्ण मितल, आढ़ती जसमेर ढांडा, सुभाष चंद, गुलाब सिंह, पवन बंसल , कमेटी डी एम ओ अजय श्योंराण आदि मौजूद थे।
मंडी में ये मिली व्यवस्था
1. मार्केटिंग बोर्ड द्वारा जो पोर्टल शुरू किया जाना है, वह खरीद पोर्टल अभी शुरू नहीं हुआ है तो खरीद कैसे होगी? इस पोर्टल में एसएमएस किसान के पास जाएंगे, जिस किसान के पास एसएमएस जाएगा, उसी किसान का मंडी में गेटपास कटेगा।
2. किसान सरकारी खरीद के लिए अधिकारियों की बाट जोहते रहे। लेकिन कोई अधिकारी खरीद के लिए नहीं पहुंचा।
पाई की अनाज मंडी में खरीद के दूसरे दिन रविवार को भी किसानों की एमएसपी वाली धान की खरीद नही हो सकी। खरीद एजेंसी के अधिकारियों ने सोमवार को खरीद शुरू करने का आश्वासन दिया है। मार्केट कमेटी सचिव गुलाब सिंह नैन ने बताया कि पाई अनाज मंडी में एफसीआई के द्वारा खरीद की जानी है। उधर मंडी प्रधान राजेश ढुल ने भी बताया कि उन्होंने भी खरीद शुरू करने की कही थी।
अनाज मंडी में 17 प्रतिशत से अधिक नमी होने के कारण धान की खरीद नहीं हो पाई। रविवार को शुरू हुई सरकारी खरीद के लिए हैफेड के डीएम, मैनेजर पिंकी देवी, करण सिंह व मार्केट कमेटी की और से सचिव सविता चौधरी व ओमप्रकाश मौजूद रहे। पिंकी ने बताया कि रविवार को अनाज मंडी में 70 क्विंटल पीआर धान की आवक हुई थी। सरकारी निर्देशों के अनुसार 17 प्रतिशत नमी तक की मात्रा वाले धान की ही खरीद की जा सकती है। रविवार को मंडी में जो धान आया था उसमें नमी की मात्रा 22 प्रतिशत होने के कारण उसे खरीदा नही जा सका। सचिव सविता चौधरी ने कहा कि किसान मंडी में अपनी फसल मार्केट कमेटी या आढ़ती के बुलाए पर ही लेकर आएं।
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एसडीएम संजय कुमार ने शहर की दोनों मंडी के प्रधानों व आढ़तियों के साथ बैठक की। जिसमें आढ़तियों ने उनको साफ कह दिया है कि जब तक सरकारी खरीद में खरीद एजेंसियों के अधिकारियों के साथ राइस मिल वाले नहीं आते, वे किसी भी कीमत पर खरीद शुरू नहीं करेंगे। यदि सरकार अपनी तरफ से खरीद शुरू करना चाहती है तो वे किसानों को बुलाए और अधिकारी उनका धान खरीद कर स्वयं उठा कर ले जाए और बेशक फसल की अदायगी भी उनके ही खाते में कर दे। आढ़ती बीच में नहीं आएंगे। दूसरी ओर अनाज मंडी में किसान धान की फसल लिए बैठे रहे। लेकिन बिक्री नहीं हो पाई।
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आढ़ती एसोसिएशन के प्रधान कृष्ण मित्तल व श्याम बहादुर खुरानिया ने कहा कि बिना मिलर्स के खरीद संभव नहीं है। एसडीएम को अवगत करवा दिया है। साथ ही चंडीगढ़ से एसएमएस प्रक्रिया से भी परेशानी आएगी। रविवार को धान की खरीद नहीं हो पाई।
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मार्केट कमेटी सचिव दीपक कुमार ने कहा कि जब तक किसानों के पास एसएमएस न आ जाए, तब तक वे धान लेकर मंडी में नहीं आएं।
डीएफएससी प्रमोद शर्मा का कहना है कि रविवार को अधिकारी खरीद के लिए गए थे। नमी 17 प्रतिशत से ज्यादा होने के कारण खरीद नहीं हो पाई। आढ़ती खरीद करवाएं या ना करवाएं। सोमवार से धान की खरीद शुरू करवा दी जाएगी।
राइस मिलर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष अमरजीत छाबड़ा ने कहा कि सरकार की सीएमआर पॉलिसी के अनुसार मिल चलाने में मिलर्स को नुकसान है। बंद रखने में कम नुकसान है। इसीलिए अभी तक मिलर्स ने रजिस्ट्रेशन ही नहीं करवाया है।
आढ़तियों के सवाल:
सरकार ने गेहूं की तर्ज पर बिना राइस मिलर्स के इंस्पेक्टर द्वारा खरीद करके मंडी से ट्रांसपोर्टर के माध्यम से उठान करवाए जाने के आदेश दिए हैं। इस पर आढ़तियों को आपत्ति है।
1. पीआर ग्रुप में कई किस्में है और जिनको राइस मिल वाले या तो लेना ही नही चाहते और यदि लेना चाहते हैं तो बहुत कम कीमत पर। ऐसी हालत में जब उसको खरीद अधिकारी लेकर जाएगा और बाद में राइस मिल उतारने से मना कर देगा तो उस धान को वहां लेकर जाने और वापस मंडी में लेकर आने का खर्च कौन वहन करेगा।
2. इंस्पेक्टर द्वारा धान की खरीद के बाद यदि तीन-चार दिन तक धान का उठान नहीं हुआ तो यह खराब हो जाएगा, इसकी जिम्मेवारी किसकी होगी?
3. नुकसान से बचने के लिए आढ़ती अपनी दुकान से जल्दी माल उठवाने के लिए ट्रांसपोर्टर को प्रति कट्टा रिश्वत देगा। गेहूं के सीजन की तरह से इससे आढ़तियों को भारी नुकसान होगा।
4. इस बार चंडीगढ़ से किसानों के पास एसएमएस जाएंगे। जिसका आढ़तियों को पता नहीं होगा। यदि किसी जमींदार की फसल तैयार नहीं है तो वह तुरंत कैसे अपनी फसल एसएमएस जाते ही मंडी में ले आएगा। उस दिन नहीं ला सका तो उसकी फसल कब बिकेगी?
इन सवालों पर एसडीएम संजय कुमार ने कहा कि आढ़तियों की जो भी परेशानी है। उसके बारे में आला अधिकारियों को अवगत करवा दिया जाएगा। एसडीएम ने प्रधानों व आढ़तियों से मंडी में समस्याओं के बारे में भी जाना। आढ़तियों ने मंडी के गेट नंबर चार पर गेट न लगने, सड़कों, पेयजल, बिजली आदि की अनेक समस्यायें बताई। पुरानी मंडी प्रधान श्याम बहादुर खुरानियां, नई मंडी प्रधान कृष्ण मितल, आढ़ती जसमेर ढांडा, सुभाष चंद, गुलाब सिंह, पवन बंसल , कमेटी डी एम ओ अजय श्योंराण आदि मौजूद थे।
मंडी में ये मिली व्यवस्था
1. मार्केटिंग बोर्ड द्वारा जो पोर्टल शुरू किया जाना है, वह खरीद पोर्टल अभी शुरू नहीं हुआ है तो खरीद कैसे होगी? इस पोर्टल में एसएमएस किसान के पास जाएंगे, जिस किसान के पास एसएमएस जाएगा, उसी किसान का मंडी में गेटपास कटेगा।
2. किसान सरकारी खरीद के लिए अधिकारियों की बाट जोहते रहे। लेकिन कोई अधिकारी खरीद के लिए नहीं पहुंचा।
पाई की अनाज मंडी में खरीद के दूसरे दिन रविवार को भी किसानों की एमएसपी वाली धान की खरीद नही हो सकी। खरीद एजेंसी के अधिकारियों ने सोमवार को खरीद शुरू करने का आश्वासन दिया है। मार्केट कमेटी सचिव गुलाब सिंह नैन ने बताया कि पाई अनाज मंडी में एफसीआई के द्वारा खरीद की जानी है। उधर मंडी प्रधान राजेश ढुल ने भी बताया कि उन्होंने भी खरीद शुरू करने की कही थी।
अनाज मंडी में 17 प्रतिशत से अधिक नमी होने के कारण धान की खरीद नहीं हो पाई। रविवार को शुरू हुई सरकारी खरीद के लिए हैफेड के डीएम, मैनेजर पिंकी देवी, करण सिंह व मार्केट कमेटी की और से सचिव सविता चौधरी व ओमप्रकाश मौजूद रहे। पिंकी ने बताया कि रविवार को अनाज मंडी में 70 क्विंटल पीआर धान की आवक हुई थी। सरकारी निर्देशों के अनुसार 17 प्रतिशत नमी तक की मात्रा वाले धान की ही खरीद की जा सकती है। रविवार को मंडी में जो धान आया था उसमें नमी की मात्रा 22 प्रतिशत होने के कारण उसे खरीदा नही जा सका। सचिव सविता चौधरी ने कहा कि किसान मंडी में अपनी फसल मार्केट कमेटी या आढ़ती के बुलाए पर ही लेकर आएं।