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बसों की कमी से जूझ रहा है रोडवेज
ब्यूरो कैथ्ाल
Updated Thu, 02 Mar 2017 12:12 AM IST
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डिपो में काफी संख्या में खड़ी हैं कंडम बसें
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
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रोडवेज में बसों की कमी के कारण यात्रियों को भारी परेशानी झेलनी पड़ रही है। डिपो में आवश्यकता के अनुसार बसें न होने के कारण यात्रियों को अपने गंतव्य पर पहुंचे में दोगुना से तिगुना समय लग जाता है। वहीं बसों में भीड़ होने के कारण सबसे अधिक परेशानी बुजुर्गों और महिलाओं को होती है। कई गांव तो ऐसे हैं। जहां बसें ही नहीं हैं।
डिपो में 200 की बजाय 143 बसें
वर्तमान में जिले में बसों की भारी कमी है। डिपों में 200 से अधिक बसों की आवश्यकता है। लेकिन जो बसें सुचारु रूप से रूटों पर चल रही है, उनकी संख्या केवल 143 ही है। जिनमें से 50 बसें केवल गांवों के रूट के लिए लगाई गई है। बस स्टैंड पर कंडम बसों की संख्या भी लगातार बढ़ती जा रही है। नई बसों की संख्या की अपेक्षा प्रत्येक वर्ष कंडम बसों की संख्या में बढ़ोत्तरी हो रही है। सरकार द्वारा नई बसें नहीं दी जा रहीं।
इन गांवों में नहीं है बस की सुविधा
जिले के गांव अटैला, मलिकपुर, फिरोजपुर, कक्योर माजरा सहित अन्य कई गंावों में बस की सेवा नहीं है। इसके साथ ही सैर, सौथा, हरनौला व नागल गांव में केवल एक बस की सुविधा है जो सुबह, दोपहर व शाम के समय चक्कर लगाती है।
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पिछले तीन सालों में मिली महज आठ बस
जीएम रामकुमार ने बताया कि वर्ष 2014 के बाद विभाग को केवल 8 नई बसें मिली हैं। जबकि 4 बसें कंडम हुई है। उन्होंने बताया कि विभाग में 30 से भी अधिक कंडम बसें है।
यात्री सचिन कुमार ने बताया कि सरकार परिवहन नीति के तहत कई प्रकार की घोषणाएं करती है। लेकिन बसों की कमी के कारण गांव से शहर में आने वाले विद्यार्थियों व अन्य यात्रियों को बसों में धक्के खाने पड़ते हैं। प्रदेश सरकार द्वारा पेश किये जाने वाले बजट में परिवहन नीति को मजबूती प्रदान करने के लिए विशेष योजना लानी चाहिए।
बजट में विद्यार्थियों के लिए लाएं विशेष योजना
एसएफआई के राज्य महासचिव गौरव शर्मा ने कहा कि बसों की कमी के कारण सबसे अधिक कठिनाई विद्यार्थियों को होती है। विभाग द्वारा विद्यार्थियों से बस पास के रुपये भी ले लिए जाते हैं। लेकिन उन्हें कॉलेज से बस स्टैंड और गांव से बस स्टैंड आने में काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। विभाग द्वारा अभी तक लोकल बस सेवा को शुरू नहीं की गई है। जबकि अन्य शहरों में लोकल बस सेवा पूर्ण रूप से चालू है। इस बजट में पहले तो सरकार नई बसों को चलाने की घोषणा करे दूसरा छात्र व छात्राओं के लिए विशेष बस सुविधा दे।
कर्मचारियों को मिले विशेष सौगात
रोडवेज यूनियन के प्रधान कृष्ण गुलियाणा ने कहा कि सरकार द्वारा कर्मचारियों के हितों को कई घोषणाएं की गई है। लेकिन दो साल बीत जाने के बाद भी उन्हें अभी तक पूरा नहीं किया गया है। कर्मचारियों की मांगों में विभाग में नई बसों को शामिल करने की सबसे महत्वपूर्ण मांग है। अगर विभाग बसों की संख्या में इजाफा करे तो नए कर्मचारियों की भर्ती होगी ऐसे में विभाग को इसका काफी फायदा मिलेगा।
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डिपो में 200 की बजाय 143 बसें
वर्तमान में जिले में बसों की भारी कमी है। डिपों में 200 से अधिक बसों की आवश्यकता है। लेकिन जो बसें सुचारु रूप से रूटों पर चल रही है, उनकी संख्या केवल 143 ही है। जिनमें से 50 बसें केवल गांवों के रूट के लिए लगाई गई है। बस स्टैंड पर कंडम बसों की संख्या भी लगातार बढ़ती जा रही है। नई बसों की संख्या की अपेक्षा प्रत्येक वर्ष कंडम बसों की संख्या में बढ़ोत्तरी हो रही है। सरकार द्वारा नई बसें नहीं दी जा रहीं।
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इन गांवों में नहीं है बस की सुविधा
जिले के गांव अटैला, मलिकपुर, फिरोजपुर, कक्योर माजरा सहित अन्य कई गंावों में बस की सेवा नहीं है। इसके साथ ही सैर, सौथा, हरनौला व नागल गांव में केवल एक बस की सुविधा है जो सुबह, दोपहर व शाम के समय चक्कर लगाती है।
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पिछले तीन सालों में मिली महज आठ बस
जीएम रामकुमार ने बताया कि वर्ष 2014 के बाद विभाग को केवल 8 नई बसें मिली हैं। जबकि 4 बसें कंडम हुई है। उन्होंने बताया कि विभाग में 30 से भी अधिक कंडम बसें है।
यात्री सचिन कुमार ने बताया कि सरकार परिवहन नीति के तहत कई प्रकार की घोषणाएं करती है। लेकिन बसों की कमी के कारण गांव से शहर में आने वाले विद्यार्थियों व अन्य यात्रियों को बसों में धक्के खाने पड़ते हैं। प्रदेश सरकार द्वारा पेश किये जाने वाले बजट में परिवहन नीति को मजबूती प्रदान करने के लिए विशेष योजना लानी चाहिए।
बजट में विद्यार्थियों के लिए लाएं विशेष योजना
एसएफआई के राज्य महासचिव गौरव शर्मा ने कहा कि बसों की कमी के कारण सबसे अधिक कठिनाई विद्यार्थियों को होती है। विभाग द्वारा विद्यार्थियों से बस पास के रुपये भी ले लिए जाते हैं। लेकिन उन्हें कॉलेज से बस स्टैंड और गांव से बस स्टैंड आने में काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। विभाग द्वारा अभी तक लोकल बस सेवा को शुरू नहीं की गई है। जबकि अन्य शहरों में लोकल बस सेवा पूर्ण रूप से चालू है। इस बजट में पहले तो सरकार नई बसों को चलाने की घोषणा करे दूसरा छात्र व छात्राओं के लिए विशेष बस सुविधा दे।
कर्मचारियों को मिले विशेष सौगात
रोडवेज यूनियन के प्रधान कृष्ण गुलियाणा ने कहा कि सरकार द्वारा कर्मचारियों के हितों को कई घोषणाएं की गई है। लेकिन दो साल बीत जाने के बाद भी उन्हें अभी तक पूरा नहीं किया गया है। कर्मचारियों की मांगों में विभाग में नई बसों को शामिल करने की सबसे महत्वपूर्ण मांग है। अगर विभाग बसों की संख्या में इजाफा करे तो नए कर्मचारियों की भर्ती होगी ऐसे में विभाग को इसका काफी फायदा मिलेगा।