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सर्दियों को मौसम शुरू, सड़क दुर्घटनाओं से बचाव के प्रबंध अधूरे
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road accident
- फोटो : Kaithal
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सुबह-शाम हल्के कोहरे के साथ सर्दी की शुरूआत हो गई है। कोहरा बढ़ने और दृश्यता शून्य होने पर सड़क दुघर्टनाओं की संख्या बढ़ जाती है। जिले में कुछ ऐसे प्वाइंट चिह्नित हैं जहां पर हर साल वाहन दुघर्टनाएं होती हैं। लेकिन उसके बाद भी जिले में अभी तक सड़कों पर सुरक्षा के प्रबंध अधूरे पड़े हैं। न तो सड़कों पर संकेतक चिन्हों को दुरुस्त किया गया है और न ही गड्ढों को भरने और उन पर पट्टियां लगाने का काम पूरा हुआ है।
शहर के अंदर व शहर को गांवों से जोड़ने वाले ज्यादातर मार्ग ऐसे हैं, जिन पर बने तीव्र मोड़ों पर पेड़-पौधों की टहनियों और झाड़ियों के कारण सामने से आ रहे वाहन दिखाई नहीं देते हैं। इस कारण लोग दुर्घटनाओं का शिकार हो रहे हैं। अंधे चौराहों, खतरनाक मोड़ व ब्लैक स्पॉटों पर सुरक्षा का कोई पुख्ता प्रबंध नहीं किया गया है। हालांकि सड़क सुरक्षा को लेकर पहले हुई अधिकारियों की बैठकों में भी मुद्दे उठते रहे हैं, लेकिन महीनों का समय बीतने के बाद भी अभी तक ये कार्य अधूरे पड़े हैं।
इन स्थानों पर चिह्नित किए हैं ब्लैक स्पॉट
जिले में 11 स्थानों पर ब्लैक स्पॉट चिह्नित किए गए हैं। हालांकि पहले ये 16 थे, लेकिन बाद में बाकी को दुरुस्त कर दिया गया था। शहर में तितरम मोड़, पाडला रोड बाईपास, करनाल कैथल चौक, हुडा सेक्टर 19 व 20 को ढांड रोड पर जोड़ने वाला मार्ग, विश्वकर्मा चौक, तेजीमान चौक, ढांड रोड चौक व अंबाला रोड बाईपास ब्लैक स्पॉट हैं। वहीं ग्रामीण क्षेत्र में अनाज मंडी चीका चौक, ढांड में पंचमुखी चौक, गांव पाडला का मुख्य चौक, कांगथली से सीवन की ओर आने वाले रास्ते पर अंधे मोड़ सहित अन्य ऐसे स्थान है, जहां दुघर्टनाओं का अंदेशा बना रहता है। इन जगहों पर हर वर्ष दर्जनों की संख्या में दुर्घटनाएं होती हैं।
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झाड़ियों से घिरे संकेतक बोर्ड
ज्यादातर मार्गों पर सड़क सुरक्षा के लिए लगाए गए संकेतक बोर्ड या तो झाड़ियों में छुपे हैं, या फिर गिरे पड़े हैं। न ही इन स्थानों पर लाइटों की व्यवस्था को दुरुस्त किया गया है। सड़कों के दोनों तरफ उगी झाड़ियां तीन-चार फुट तक सड़कों पर फैली हुई हैं, उन्हें भी साफ नहीं करवाया जा रहा।
किसान ईश्वर सिंह ने बताया कि खनौरी-जींद बाईपास पर बने तीव्र मोड़ पर धुंध के मौसम में कई वाहन चालक दुर्घटनाओं को शिकार होते हैं। पहली बात तो ये है कि यह बना ही जानलेवा तरीके से है। रही सही कसर यहां उगी झाड़ियां निकाल रही हैं। वे रोज अपने खेतों में यहां से आते जाते हैं, रात को अंधेरे में दुर्घटना होने का डर और भी ज्यादा रहता है।
किसान राजपाल ने बताया कि तेजीमान चौक के पास स्पीड ब्रेकर नहीं हैं। इस खतरनाक चौराहे पर लाइट तक की व्यवस्था नहीं है। पिछले महीने भी यहां एक बाइक सवार की अज्ञात वाहन की चपेट में आने से मौत हो गई थी। उन्हें भी यहां से आते जाते समय काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है।
इस संबंध में जिला फॉरेस्ट ऑफिसर राजीव तेजयन ने कहा कि सड़कों के किनारे जिन स्थानों पर पेड़ों लगे हैं, उनकी छंटाई का कार्य किया जा रहा है, ताकि संकेतक चिन्ह साफ दिखाई दे सकें। जल्द ही यह कार्य पूरा कर लिया जाएगा।
मुख्यमंत्री सुशासन सहयोगी पंखुड़ी गुप्ता ने कहा कि इस संबंध में लोक निर्माण विभाग और अन्य संबंधित विभागों से बातचीत की जाएगी। प्रयास किया जाएगा कि ये सभी कार्य अधिकारियों से मिलकर जल्द से जल्द पूरे करवाए जाएं। बैठक में अधिकारियों को डीसी द्वारा निर्देश जारी किए गए हैं।
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शहर के अंदर व शहर को गांवों से जोड़ने वाले ज्यादातर मार्ग ऐसे हैं, जिन पर बने तीव्र मोड़ों पर पेड़-पौधों की टहनियों और झाड़ियों के कारण सामने से आ रहे वाहन दिखाई नहीं देते हैं। इस कारण लोग दुर्घटनाओं का शिकार हो रहे हैं। अंधे चौराहों, खतरनाक मोड़ व ब्लैक स्पॉटों पर सुरक्षा का कोई पुख्ता प्रबंध नहीं किया गया है। हालांकि सड़क सुरक्षा को लेकर पहले हुई अधिकारियों की बैठकों में भी मुद्दे उठते रहे हैं, लेकिन महीनों का समय बीतने के बाद भी अभी तक ये कार्य अधूरे पड़े हैं।
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इन स्थानों पर चिह्नित किए हैं ब्लैक स्पॉट
जिले में 11 स्थानों पर ब्लैक स्पॉट चिह्नित किए गए हैं। हालांकि पहले ये 16 थे, लेकिन बाद में बाकी को दुरुस्त कर दिया गया था। शहर में तितरम मोड़, पाडला रोड बाईपास, करनाल कैथल चौक, हुडा सेक्टर 19 व 20 को ढांड रोड पर जोड़ने वाला मार्ग, विश्वकर्मा चौक, तेजीमान चौक, ढांड रोड चौक व अंबाला रोड बाईपास ब्लैक स्पॉट हैं। वहीं ग्रामीण क्षेत्र में अनाज मंडी चीका चौक, ढांड में पंचमुखी चौक, गांव पाडला का मुख्य चौक, कांगथली से सीवन की ओर आने वाले रास्ते पर अंधे मोड़ सहित अन्य ऐसे स्थान है, जहां दुघर्टनाओं का अंदेशा बना रहता है। इन जगहों पर हर वर्ष दर्जनों की संख्या में दुर्घटनाएं होती हैं।
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झाड़ियों से घिरे संकेतक बोर्ड
ज्यादातर मार्गों पर सड़क सुरक्षा के लिए लगाए गए संकेतक बोर्ड या तो झाड़ियों में छुपे हैं, या फिर गिरे पड़े हैं। न ही इन स्थानों पर लाइटों की व्यवस्था को दुरुस्त किया गया है। सड़कों के दोनों तरफ उगी झाड़ियां तीन-चार फुट तक सड़कों पर फैली हुई हैं, उन्हें भी साफ नहीं करवाया जा रहा।
किसान ईश्वर सिंह ने बताया कि खनौरी-जींद बाईपास पर बने तीव्र मोड़ पर धुंध के मौसम में कई वाहन चालक दुर्घटनाओं को शिकार होते हैं। पहली बात तो ये है कि यह बना ही जानलेवा तरीके से है। रही सही कसर यहां उगी झाड़ियां निकाल रही हैं। वे रोज अपने खेतों में यहां से आते जाते हैं, रात को अंधेरे में दुर्घटना होने का डर और भी ज्यादा रहता है।
किसान राजपाल ने बताया कि तेजीमान चौक के पास स्पीड ब्रेकर नहीं हैं। इस खतरनाक चौराहे पर लाइट तक की व्यवस्था नहीं है। पिछले महीने भी यहां एक बाइक सवार की अज्ञात वाहन की चपेट में आने से मौत हो गई थी। उन्हें भी यहां से आते जाते समय काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है।
इस संबंध में जिला फॉरेस्ट ऑफिसर राजीव तेजयन ने कहा कि सड़कों के किनारे जिन स्थानों पर पेड़ों लगे हैं, उनकी छंटाई का कार्य किया जा रहा है, ताकि संकेतक चिन्ह साफ दिखाई दे सकें। जल्द ही यह कार्य पूरा कर लिया जाएगा।
मुख्यमंत्री सुशासन सहयोगी पंखुड़ी गुप्ता ने कहा कि इस संबंध में लोक निर्माण विभाग और अन्य संबंधित विभागों से बातचीत की जाएगी। प्रयास किया जाएगा कि ये सभी कार्य अधिकारियों से मिलकर जल्द से जल्द पूरे करवाए जाएं। बैठक में अधिकारियों को डीसी द्वारा निर्देश जारी किए गए हैं।