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सरस्वती नदी से जुड़ा राजस्व रिकॉर्ड होगा दुरुस्त

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Thu, 22 Sep 2022 01:51 AM IST
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Revenue record related to Saraswati river will be correct
02-कैथल। सरस्वती नदी के राजस्व रिकॉर्ड के संदर्भ में अधिकारियों की बैठक लेते सरस्वती हेरिटेज डेवल - फोटो : Kaithal
कैथल। हजारों साल पहले हिमाचल की तलहटी में आदिबद्री से शुरू होकर सरस्वती नदी का प्रवाह गुजरात के कच्छ तक था। जहां से यह समुद्र में मिल जाती थी लेकिन समय के साथ यह विलुप्त हो गई। इसे फिर से पुनर्जीवित करने के लिए सरकार कवायद कर रही है। इसी के मद्देनजर नदी से संबंधित कैथल का राजस्व रिकॉर्ड दुरुस्त करने की तैयारी शुरू कर दी गई है। इस संबंध में गठित सरस्वती हेरिटेज डेवलपमेंट बोर्ड के डिप्टी चेयरमैन धुम्मन सिंह किरमच ने बुधवार को लोक निर्माण विभाग के विश्राम गृह में इस संदर्भ में अधिकारियों की बैठक ली।
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इस दौरान उन्होंने कहा कि प्राचीन समय में जिला कैथल में सरस्वती नदी बहकर निकलती थी। जिला के लिए यह बहुत गर्व की बात है। मुख्यमंत्री मनोहर लाल के प्रयासों से क्षेत्र में सरस्वती का प्रवाह कुरुक्षेत्र के बाद पिहोवा, गुहला व कैथल के साथ लगते क्षेत्र से सरस्वती होकर जींद के कुछ क्षेत्र के साथ लगती फतेहाबाद, सिरसा ओ टू हेड तक हरियाणा में सरस्वती बोर्ड ने पानी को चलाया है। सरस्वती नदी से संबंधित कैथल में जो भी राजस्व रिकॉर्ड है, उसे दुरुस्त किया जाए।
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बैठक में जिला राजस्व अधिकारी चांदी राम व सरस्वती डिवीजन के एक्सईन प्रशांत भी मौजूद रहे। उन्होंने कहा कि कैथल में भी सरस्वती बोर्ड के प्रयासों से सरस्वती के पुन:प्रवाह के लिए बहुत से प्रयास किए जा रहे हैं। पोलड़ गांव में सरस्वती के तट पर बहुत प्राचीन सरस्वती मंदिर स्थापित है और इस जगह पर श्रद्धालुओं का हर साल मेला भी लगता है। इस स्थान पर घाट का निर्माण कार्य चल रहा है। धुम्मन सिंह ने बताया कि सरस्वती के पुन: बहने के साथ साथ सरस्वती की जितनी भी साथ लगती शाखाएं हैं उनका रिकॉर्ड चैक करके दुरुस्त किया जा रहा है।
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हरियाणा के राजस्व विभाग में है सरस्वती के नाम से जमीन
वेद, पुराणों समेत धार्मिक और ऐतिहासिक महत्व के ग्रंथों में सरस्वती का जिक्र मिलता है। समय के साथ-साथ इसकी धारा सूखने पर इसका ऐतिहासिक एवं सांस्कृतिक महत्व भले कम हुआ हो लेकिन इसका जिक्र आज भी किया जाता है। सरस्वती नदी का वजूद होने का सुबूत ही है कि हरियाणा के राजस्व विभाग में सरस्वती के नाम से जमीन है। सरकार द्वारा गठित सरस्वती विकास बोर्ड के प्रयासों से तीन जिलों यमुनानगर, कुरुक्षेत्र एवं कैथल में नदी के नाम से करीब 260 किलोमीटर लंबी नदी का रिकॉर्ड मिला है। नासा और इसरो जैसी संस्थाओं ने उपग्रह से लिए गए चित्रों के आधार पर विश्लेषण में भी यह दावा किया है कि सरस्वती के मार्ग के अनुसार भूमिगत पानी का अथाह चैनल है। यहां भूमि के नीचे जल धारा प्रवाहित हो रही है। कैथल के कलायत में अलौकिक जल भी मिल चुका है। वहीं देश के प्राचीन नक्शे में भी इस नदी का जिक्र मिलता है तो अब राजस्व रिकॉर्ड पता करवाया गया तो रिकॉर्ड में भी इस नदी के नाम से भूमि मिली है।
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