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Kaithal News: सेवानिवृत्त कर्मचारी बोले- अनदेखी नहीं होगी स्वीकार
Thu, 27 Nov 2025 12:55 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
Updated Thu, 27 Nov 2025 12:55 AM IST
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हनुमान वाटिका में प्रर्दशन करते रिटायर्ड कर्मचारी
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संवाद न्यूज एजेंसी
कैथल। रिटायर्ड कर्मचारी संघ के प्रधान रमेश हरित की अगुवाई में तहसीलदार के माध्यम से प्रधानमंत्री को ज्ञापन भेजा गया है। इसमें मांग की गई है कि आठवें वेतन आयोग की अधिसूचना के अनुसार कार्यरत कर्मचारियों की तरह रिटायर्ड कर्मचारियों के लिए भी पेंशन पुनरीक्षण और अन्य लाभों की सिफारिश की जाए। किसी भी प्रकार की अनदेखी या उन्हें नजरअंदाज करने की कार्रवाई स्वीकार्य नहीं होगी।
हनुमान वाटिका में आयोजित सभा को राज्य उपप्रधान मास्टर गुलाब सिंह चीका और जिला वरिष्ठ उपप्रधान जसबीर सिंह ने संबोधित किया। उन्होंने बताया कि अब तक सभी वेतन आयोगों की परंपरा रही है कि सेवा में कार्यरत कर्मचारियों के साथ रिटायर्ड कर्मचारियों के पेंशन संशोधन और अन्य लाभ समान रूप से लागू होते रहे। लेकिन आठवें वेतन आयोग की अधिसूचना में उन्हें छोड़ दिया गया है। जसबीर सिंह ने कहा कि सरकार पुरानी पेंशन योजना को गैर अंशदायी बता रही है, जबकि 1982 में सर्वोच्च न्यायालय ने पेंशन को संवैधानिक अधिकार माना था। पेंशन सेवा का फल है और इसे निरंतर जारी रहना चाहिए। संगठन के उपप्रधान सिंगारा सिंह, ईश्वर सिरोही और दिलबाग ने बताया कि पेंशन रोंकी आल इंडिया फेडरेशन का सम्मेलन फरवरी 2026 में कुरुक्षेत्र में आयोजित होगा।
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कैथल। रिटायर्ड कर्मचारी संघ के प्रधान रमेश हरित की अगुवाई में तहसीलदार के माध्यम से प्रधानमंत्री को ज्ञापन भेजा गया है। इसमें मांग की गई है कि आठवें वेतन आयोग की अधिसूचना के अनुसार कार्यरत कर्मचारियों की तरह रिटायर्ड कर्मचारियों के लिए भी पेंशन पुनरीक्षण और अन्य लाभों की सिफारिश की जाए। किसी भी प्रकार की अनदेखी या उन्हें नजरअंदाज करने की कार्रवाई स्वीकार्य नहीं होगी।
हनुमान वाटिका में आयोजित सभा को राज्य उपप्रधान मास्टर गुलाब सिंह चीका और जिला वरिष्ठ उपप्रधान जसबीर सिंह ने संबोधित किया। उन्होंने बताया कि अब तक सभी वेतन आयोगों की परंपरा रही है कि सेवा में कार्यरत कर्मचारियों के साथ रिटायर्ड कर्मचारियों के पेंशन संशोधन और अन्य लाभ समान रूप से लागू होते रहे। लेकिन आठवें वेतन आयोग की अधिसूचना में उन्हें छोड़ दिया गया है। जसबीर सिंह ने कहा कि सरकार पुरानी पेंशन योजना को गैर अंशदायी बता रही है, जबकि 1982 में सर्वोच्च न्यायालय ने पेंशन को संवैधानिक अधिकार माना था। पेंशन सेवा का फल है और इसे निरंतर जारी रहना चाहिए। संगठन के उपप्रधान सिंगारा सिंह, ईश्वर सिरोही और दिलबाग ने बताया कि पेंशन रोंकी आल इंडिया फेडरेशन का सम्मेलन फरवरी 2026 में कुरुक्षेत्र में आयोजित होगा।
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