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Kaithal News: धान की फसल को कीट-रोगों से बचाएं
Sat, 04 Oct 2025 12:52 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
Updated Sat, 04 Oct 2025 12:52 AM IST
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संवाद न्यूज एजेंसी
कलायत। अक्तूबर का यह महीना धान की फसल के लिए सबसे महत्वपूर्ण समय माना जाता है। इस दौरान फसल पूरी तरह पकने की तैयारी में होती है और इसे कीटों और रोगों से विशेष रूप से सुरक्षित रखना आवश्यक होता है।
चौधरी चरण सिंह हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय के धान अनुसंधान केंद्र, कौल ने इस संबंध में एडवाइजरी जारी की है। डॉ. सतीश कुमार नारा ने बताया कि धान की बालियों में दाना बनने के समय पानी की कमी नहीं होने दी जानी चाहिए, इसलिए सिंचाई आवश्यकता अनुसार करें। उन्होंने बताया कि इस समय खेतों में सफेद पीठ वाला कीड़ा, भूरा तेला, पत्ता लपेट सूंडी और तना छेदक के प्रकोप भी देखने को मिलते हैं। इसके निवारण के लिए उन्होंने कई सलाह दीं।
ये करें उपाय
n डाइनोटिफ्यूरान 20% – 80 ग्राम प्रति एकड़ के हिसाब से छिड़काव करें।
n
पत्ता लपेट सूंडी के लिए फ्लूबंडामाइड 20% डब्ल्यूजी – 120 ग्राम प्रति एकड़, 200 लीटर पानी में मिलाकर छिड़काव करें।
n
तना छेदक की रोकथाम के लिए कार्टाप हाइड्रोक्लोराइड 4जी – 10 किलो प्रति एकड़, सूखी रेत में मिलाकर बुरकाव करें।
इस समय धान में फफूंदजनित रोग जैसे ब्लास्ट, शीथ ब्लाइट और ब्राउन स्पॉट के लक्षण भी दिखाई देते हैं। इसके लिए निम्नलिखित दवाओं के उपयोग की सलाह दी गई है:
विज्ञापन
n कार्बंडाज़िम – 200 ग्राम प्रति एकड़
n हेक्साकोलाजोल 75 डब्ल्यूजी
n बीएलबी व स्टेम रोट के संक्रमण के लिए मैंकोजेब – 600 ग्राम प्रति एकड़
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कलायत। अक्तूबर का यह महीना धान की फसल के लिए सबसे महत्वपूर्ण समय माना जाता है। इस दौरान फसल पूरी तरह पकने की तैयारी में होती है और इसे कीटों और रोगों से विशेष रूप से सुरक्षित रखना आवश्यक होता है।
चौधरी चरण सिंह हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय के धान अनुसंधान केंद्र, कौल ने इस संबंध में एडवाइजरी जारी की है। डॉ. सतीश कुमार नारा ने बताया कि धान की बालियों में दाना बनने के समय पानी की कमी नहीं होने दी जानी चाहिए, इसलिए सिंचाई आवश्यकता अनुसार करें। उन्होंने बताया कि इस समय खेतों में सफेद पीठ वाला कीड़ा, भूरा तेला, पत्ता लपेट सूंडी और तना छेदक के प्रकोप भी देखने को मिलते हैं। इसके निवारण के लिए उन्होंने कई सलाह दीं।
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ये करें उपाय
n डाइनोटिफ्यूरान 20% – 80 ग्राम प्रति एकड़ के हिसाब से छिड़काव करें।
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पत्ता लपेट सूंडी के लिए फ्लूबंडामाइड 20% डब्ल्यूजी – 120 ग्राम प्रति एकड़, 200 लीटर पानी में मिलाकर छिड़काव करें।
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तना छेदक की रोकथाम के लिए कार्टाप हाइड्रोक्लोराइड 4जी – 10 किलो प्रति एकड़, सूखी रेत में मिलाकर बुरकाव करें।
इस समय धान में फफूंदजनित रोग जैसे ब्लास्ट, शीथ ब्लाइट और ब्राउन स्पॉट के लक्षण भी दिखाई देते हैं। इसके लिए निम्नलिखित दवाओं के उपयोग की सलाह दी गई है:
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n कार्बंडाज़िम – 200 ग्राम प्रति एकड़
n हेक्साकोलाजोल 75 डब्ल्यूजी
n बीएलबी व स्टेम रोट के संक्रमण के लिए मैंकोजेब – 600 ग्राम प्रति एकड़