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Kaithal News: धान की तरह तय हो आलू का एमएसपी, तभी बचेगा किसान
Sat, 07 Mar 2026 01:33 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
Updated Sat, 07 Mar 2026 01:33 AM IST
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संवाद न्यूज एजेंसी
कैथल। मंडियों में इन दिनों आलू के दाम काफी गिर गए हैं। गोदामों में पहले से ही भारी मात्रा में आलू का स्टॉक भरा होने के कारण किसानों को अपनी फसल औने-पौने दामों पर बेचनी पड़ रही है। इससे आलू उत्पादक किसानों को भारी आर्थिक नुकसान का सामना करना पड़ रहा है। आढ़तियों का कहना है कि धान की तरह आलू का न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) तय की जाए तभी किसानों को राहत मिलेगी।
किसानों के अनुसार इस समय मंडियों में आलू का भाव करीब एक रुपये से डेढ़ रुपये प्रति किलो तक रह गया है, जबकि व्यापारी इसे छांटकर करीब चार रुपये प्रति किलो तक बेच रहे हैं। किसानों का कहना है कि लागत के मुकाबले इतनी कम कीमत मिलने से उन्हें घाटा उठाना पड़ रहा है।
खेड़ी गुलाम अली के किसान जगतार सिंह का कहना है कि सरकार को आलू के लिए कोल्ड स्टोरेज की क्षमता बढ़ाने और बाजार व्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में कदम उठाने चाहिए। इससे किसानों को अपनी फसल सुरक्षित रखने का विकल्प मिलेगा और बेहतर दाम मिलने की संभावना भी बढ़ेगी। फिलहाल मंडी में आलू के दाम कम होने से किसान परेशान हैं और उन्हें उम्मीद है कि आने वाले समय में मांग बढ़ने पर कीमतों में सुधार होगा।
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व्यापारियों का कहना है कि मौजूदा समय में आलू का बाजार पूरी तरह मांग और आपूर्ति पर निर्भर है। जब मंडियों और गोदामों में पहले से ही स्टॉक अधिक होता है तो कीमतों में गिरावट आना स्वाभाविक है। बारदाना भी महंगा पड़ता है।
आलू की खेती में बीज, खाद, मजदूरी और सिंचाई पर खर्च आता है, लेकिन फसल तैयार होने के बाद लागत पूरी नहीं मिलती। जीरी की तरह आलू पर भी एमएसपी लागू की जानी चाहिए। यदि यही स्थिति रही तो भविष्य में किसान आलू की खेती से दूरी बनाने लगेंगे। -आढ़ती देव
मंडियों में स्थानीय आलू के साथ-साथ पंजाब और शाहबाद क्षेत्र से भी बड़ी मात्रा में आलू आ रहा है। बाहरी क्षेत्रों से लगातार बढ़ रही सप्लाई के कारण मंडियों में आवक बढ़ गई है, जिससे दाम और नीचे चले गए हैं। इसका सीधा असर जिले और आसपास के किसानों पर पड़ रहा है। -आढ़ती गौरव
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कैथल। मंडियों में इन दिनों आलू के दाम काफी गिर गए हैं। गोदामों में पहले से ही भारी मात्रा में आलू का स्टॉक भरा होने के कारण किसानों को अपनी फसल औने-पौने दामों पर बेचनी पड़ रही है। इससे आलू उत्पादक किसानों को भारी आर्थिक नुकसान का सामना करना पड़ रहा है। आढ़तियों का कहना है कि धान की तरह आलू का न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) तय की जाए तभी किसानों को राहत मिलेगी।
किसानों के अनुसार इस समय मंडियों में आलू का भाव करीब एक रुपये से डेढ़ रुपये प्रति किलो तक रह गया है, जबकि व्यापारी इसे छांटकर करीब चार रुपये प्रति किलो तक बेच रहे हैं। किसानों का कहना है कि लागत के मुकाबले इतनी कम कीमत मिलने से उन्हें घाटा उठाना पड़ रहा है।
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खेड़ी गुलाम अली के किसान जगतार सिंह का कहना है कि सरकार को आलू के लिए कोल्ड स्टोरेज की क्षमता बढ़ाने और बाजार व्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में कदम उठाने चाहिए। इससे किसानों को अपनी फसल सुरक्षित रखने का विकल्प मिलेगा और बेहतर दाम मिलने की संभावना भी बढ़ेगी। फिलहाल मंडी में आलू के दाम कम होने से किसान परेशान हैं और उन्हें उम्मीद है कि आने वाले समय में मांग बढ़ने पर कीमतों में सुधार होगा।
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व्यापारियों का कहना है कि मौजूदा समय में आलू का बाजार पूरी तरह मांग और आपूर्ति पर निर्भर है। जब मंडियों और गोदामों में पहले से ही स्टॉक अधिक होता है तो कीमतों में गिरावट आना स्वाभाविक है। बारदाना भी महंगा पड़ता है।
आलू की खेती में बीज, खाद, मजदूरी और सिंचाई पर खर्च आता है, लेकिन फसल तैयार होने के बाद लागत पूरी नहीं मिलती। जीरी की तरह आलू पर भी एमएसपी लागू की जानी चाहिए। यदि यही स्थिति रही तो भविष्य में किसान आलू की खेती से दूरी बनाने लगेंगे। -आढ़ती देव
मंडियों में स्थानीय आलू के साथ-साथ पंजाब और शाहबाद क्षेत्र से भी बड़ी मात्रा में आलू आ रहा है। बाहरी क्षेत्रों से लगातार बढ़ रही सप्लाई के कारण मंडियों में आवक बढ़ गई है, जिससे दाम और नीचे चले गए हैं। इसका सीधा असर जिले और आसपास के किसानों पर पड़ रहा है। -आढ़ती गौरव