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Kaithal News: पर्यावरण बचाने के लिए गांव-गांव में किसानों को जागरूक कर रही पुलिस
Fri, 14 Nov 2025 12:43 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
Updated Fri, 14 Nov 2025 12:43 AM IST
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कैथल। जिला पुलिस पराली जलाने से होने वाले पर्यावरण प्रदूषण को रोकने और किसानों को इसके दुष्परिणामों से अवगत कराने के लिए गांव-गांव जाकर जागरूकता अभियान चला रहा है। इस दौरान जिले के सभी डीएसपी, थाना प्रबंधक और चौकी प्रभारियों द्वारा अपने-अपने क्षेत्रों के गांवों और खेतों में जाकर किसानों को व्यक्तिगत रूप से समझाया जा रहा है कि वे फसल के अवशेषों को आग न लगाएं।
एसपी उपासना ने कहा कि धान की कटाई के बाद खेतों में बची पराली को जलाने से वायु प्रदूषण बढ़ता है, जिससे मानव स्वास्थ्य, पशुओं और पर्यावरण पर गंभीर प्रभाव पड़ता है। साथ ही भूमि की उर्वरकता भी घट जाती है। उन्होंने किसानों से अपील की कि वे पराली प्रबंधन के लिए सरकार द्वारा उपलब्ध कराए गए कस्टम हायरिंग सेंटरों और फसल अवशेष प्रबंधन यंत्रों का उपयोग करें। इन यंत्रों की मदद से फसल अवशेषों को मिट्टी में मिलाकर भूमि की उपजाऊ क्षमता बढ़ाई जा सकती है।
एसपी ने यह भी कहा कि पराली जलाना न केवल पर्यावरण के लिए हानिकारक है, बल्कि यह कानूनी अपराध भी है। जिला प्रशासन और पुलिस ऐसे किसानों पर सख्त निगरानी रखे हुए हैं जो पराली जलाने की घटनाओं में शामिल हैं। उन्होंने किसानों से आह्वान किया कि वे फसल अवशेषों का वैज्ञानिक निस्तारण करें और स्वच्छ, प्रदूषण-मुक्त वातावरण बनाने में सहयोग करें।
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पुलिस प्रवक्ता ने बताया कि पुलिस टीमें गांवों में जाकर किसानों से संवाद कर रही हैं और उन्हें समझा रही हैं कि पराली जलाने से न केवल वातावरण दूषित होता है, बल्कि यह आसपास के लोगों के स्वास्थ्य के लिए भी हानिकारक है। संवाद
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एसपी उपासना ने कहा कि धान की कटाई के बाद खेतों में बची पराली को जलाने से वायु प्रदूषण बढ़ता है, जिससे मानव स्वास्थ्य, पशुओं और पर्यावरण पर गंभीर प्रभाव पड़ता है। साथ ही भूमि की उर्वरकता भी घट जाती है। उन्होंने किसानों से अपील की कि वे पराली प्रबंधन के लिए सरकार द्वारा उपलब्ध कराए गए कस्टम हायरिंग सेंटरों और फसल अवशेष प्रबंधन यंत्रों का उपयोग करें। इन यंत्रों की मदद से फसल अवशेषों को मिट्टी में मिलाकर भूमि की उपजाऊ क्षमता बढ़ाई जा सकती है।
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एसपी ने यह भी कहा कि पराली जलाना न केवल पर्यावरण के लिए हानिकारक है, बल्कि यह कानूनी अपराध भी है। जिला प्रशासन और पुलिस ऐसे किसानों पर सख्त निगरानी रखे हुए हैं जो पराली जलाने की घटनाओं में शामिल हैं। उन्होंने किसानों से आह्वान किया कि वे फसल अवशेषों का वैज्ञानिक निस्तारण करें और स्वच्छ, प्रदूषण-मुक्त वातावरण बनाने में सहयोग करें।
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पुलिस प्रवक्ता ने बताया कि पुलिस टीमें गांवों में जाकर किसानों से संवाद कर रही हैं और उन्हें समझा रही हैं कि पराली जलाने से न केवल वातावरण दूषित होता है, बल्कि यह आसपास के लोगों के स्वास्थ्य के लिए भी हानिकारक है। संवाद