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किठाना पैक्स मामले में पुलिस कार्रवाई की सिफारिश
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कैथल। गांव किठाना की पैक्स में लाखों रुपये की वित्तीय अनियमितताओं के मामले में जांच में दोषी करार दिए गए कर्मचारियों के खिलाफ पुलिस कार्रवाई सहित विभागीय कार्रवाई के लिए डीसी प्रदीप दहिया ने सहकारी समितियां विभाग के रजिस्ट्रार को पत्र लिखा है।
गांव किठाना में संचालित पैक्स को लेकर गांव के लोगों ने शिकायत दी थी। इसमें कई तरह की अनियमितताओं का आरोप लगाया गया था। इसी बीच विभागीय जांच में 52 लाख रुपये की गड़बड़ी सामने आई। कोऑपरेटिव बैंक की ओर से विभागीय स्तर पर भी कई कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई की गई थी लेकिन एसडीएम कैप्टन मनीष कुमार लोहान, तहसीलदार सुदेश मेहरा व बैंक के एएसआर की संयुक्त कमेटी ने जांच जारी रखी। अब यह जांच रिपोर्ट डीसी प्रदीप दहिया को सौंपी थी।
इस जांच रिपोर्ट के बाद डीसी ने दोषी करार दिए गए कर्मचारियों के खिलाफ विभागीय कार्रवाई सहित पुलिस कार्रवाई के लिए पत्र लिखा है। डीसी द्वारा जारी पत्र में कहा गया है कि जांच से सामने आए तथ्यों से प्रतीत होता है कि किठाना पैक्स में गंभीर अनियिमतताएं बरती जा रही हैं। इससे पैक्स की पूरी कार्यप्रणाली ही सवालों के घेरे में है। इसीलिए इस संबंध में दोषी पाए गए कर्मचारियों व अधिकारियों शाखा प्रबंधक, किठाना पैक्स से कर्मचारी कृष्ण कुमार, बलवान सचिव, लिपिक राजपाल, सेवादार कमलेश, सेल्जमेन दलबीर, राजकुमार, लिपिक इंद्र, लिपिक व अन्य कर्मचारी जो इस मामले में दोषी हों, के खिलाफ पुलिस में केस दर्ज करवाया जाए। साथ ही भविष्य में ऐसी अनियिमतताएं न हो, इसके लिए इस समिति का फिर से गठन किया जाए।
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डीसी प्रदीप दहिया ने कहा कि जांच में जो भी दोषी पाया गया है, उसके खिलाफ कार्रवाई के लिए सहकारी समितियों के रजिस्ट्रार को पत्र लिखा गया है।
जांच अधिकारी एसडीएम कैप्टन मनीष कुमार लोहान ने बताया कि जांच में पता चला है कि यहां कामकाज में अनियमितताएं हैं। पैक्स मैनेजर अपने पास कई तरह के खातों की चेकबुक रखे थे। सात से आठ कर्मचारी गंभीर वित्तीय अनियमितताओं सहित पैक्स के कार्य संचालन में लापरवाही के दोषी पाए गए हैं। पैक्स कर्मचारी अपने परिवार के सदस्यों के एक से ज्यादा खाते नहीं खोल सकते लेकिन यहां परिजनों के ही खाते खोले गए। किसानों की पासबुक खुद ही रखकर उसका संचालन करते मिले। खाद और बीज के आवंटन व रिकॉर्ड में भी काफी गड़बड़ी मिली है। उनकी जांच से पहले हुई विभागीय जांच में ही ऑडिटर ने 52 लाख रुपये की गड़बड़ी पकड़ी थी। जांच समिति ने अपनी रिपोर्ट डीसी को सौंप दी है।
डीसी ने कहा कि इस मामले में जो भी दोषी पाए गए हैं, उनके खिलाफ पुलिस कार्रवाई के लिए लिखा जाएगा। साथ ही विभागीय स्तर पर जो भी कार्रवाई होगी, वह करवाई जाएगी।
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गांव किठाना में संचालित पैक्स को लेकर गांव के लोगों ने शिकायत दी थी। इसमें कई तरह की अनियमितताओं का आरोप लगाया गया था। इसी बीच विभागीय जांच में 52 लाख रुपये की गड़बड़ी सामने आई। कोऑपरेटिव बैंक की ओर से विभागीय स्तर पर भी कई कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई की गई थी लेकिन एसडीएम कैप्टन मनीष कुमार लोहान, तहसीलदार सुदेश मेहरा व बैंक के एएसआर की संयुक्त कमेटी ने जांच जारी रखी। अब यह जांच रिपोर्ट डीसी प्रदीप दहिया को सौंपी थी।
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इस जांच रिपोर्ट के बाद डीसी ने दोषी करार दिए गए कर्मचारियों के खिलाफ विभागीय कार्रवाई सहित पुलिस कार्रवाई के लिए पत्र लिखा है। डीसी द्वारा जारी पत्र में कहा गया है कि जांच से सामने आए तथ्यों से प्रतीत होता है कि किठाना पैक्स में गंभीर अनियिमतताएं बरती जा रही हैं। इससे पैक्स की पूरी कार्यप्रणाली ही सवालों के घेरे में है। इसीलिए इस संबंध में दोषी पाए गए कर्मचारियों व अधिकारियों शाखा प्रबंधक, किठाना पैक्स से कर्मचारी कृष्ण कुमार, बलवान सचिव, लिपिक राजपाल, सेवादार कमलेश, सेल्जमेन दलबीर, राजकुमार, लिपिक इंद्र, लिपिक व अन्य कर्मचारी जो इस मामले में दोषी हों, के खिलाफ पुलिस में केस दर्ज करवाया जाए। साथ ही भविष्य में ऐसी अनियिमतताएं न हो, इसके लिए इस समिति का फिर से गठन किया जाए।
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डीसी प्रदीप दहिया ने कहा कि जांच में जो भी दोषी पाया गया है, उसके खिलाफ कार्रवाई के लिए सहकारी समितियों के रजिस्ट्रार को पत्र लिखा गया है।
जांच अधिकारी एसडीएम कैप्टन मनीष कुमार लोहान ने बताया कि जांच में पता चला है कि यहां कामकाज में अनियमितताएं हैं। पैक्स मैनेजर अपने पास कई तरह के खातों की चेकबुक रखे थे। सात से आठ कर्मचारी गंभीर वित्तीय अनियमितताओं सहित पैक्स के कार्य संचालन में लापरवाही के दोषी पाए गए हैं। पैक्स कर्मचारी अपने परिवार के सदस्यों के एक से ज्यादा खाते नहीं खोल सकते लेकिन यहां परिजनों के ही खाते खोले गए। किसानों की पासबुक खुद ही रखकर उसका संचालन करते मिले। खाद और बीज के आवंटन व रिकॉर्ड में भी काफी गड़बड़ी मिली है। उनकी जांच से पहले हुई विभागीय जांच में ही ऑडिटर ने 52 लाख रुपये की गड़बड़ी पकड़ी थी। जांच समिति ने अपनी रिपोर्ट डीसी को सौंप दी है।
डीसी ने कहा कि इस मामले में जो भी दोषी पाए गए हैं, उनके खिलाफ पुलिस कार्रवाई के लिए लिखा जाएगा। साथ ही विभागीय स्तर पर जो भी कार्रवाई होगी, वह करवाई जाएगी।