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आशियाने गिराने के विरोध में सड़क पर उतरे लोग
ब्यूरो कैथल
Updated Tue, 17 Jan 2017 12:26 AM IST
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सड़क पर उतरे लोग
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
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उच्च न्यायालय द्वारा दिए गए स्टे के बावजूद भी प्रशासन द्वारा मकान गिराये जाने को लेकर सोमवार को पीड़ित लोगों ने शहर में रोष मार्च निकाला। प्रदर्शन करने के बाद लोग एसडीएम कार्यालय पहुंचे और धरना दिया। प्रदर्शन करने वाले लोगों की मांग थी कि स्टेटस के बावजूद भी 8 आशियाने गिराने वाले दोषी अधिकारियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई हो और पीड़ित लोगों के पुनर्वास का प्रबंध किया जाए।
एसडीएम की अनुपस्थिति में तहसीलदार चंद्रमोहन बिश्नोई ने ज्ञापन लिया और इसे मुख्यमंत्री तक पहुंचाने की बात कही। रवींद्र सूर्यवंशी ने कहा कि पीड़ित लोगों की अपील कमिश्नर कोर्ट अंबाला में विचाराधीन है। इस आधार पर उच्च न्यायालय में जस्टिस शेखर धवन की कोर्ट ने स्टेटस को का आदेश 6 जनवरी को दिया था। 6 जनवरी को प्रशासन खसरा नंबर 483 में कार्रवाई कर रहा था। अचानक वहां निर्माण कार्यों को ढहाने का काम बीच में ही बंद कर लाव लश्कर सहित खसरा नंबर 482 में पहुंच गया। सजूमा रोड को पूरी तरह से सील कर लोगों के मकान गिराने शुरू कर दिए। गोपाल नंबरदार, कृष्ण कुमार आदि ने प्रशासन से गुहार लगाई कि उन्हें स्टेटस को मिल गया है वे उन्हें केवल एक घंटा दें। पीड़ितों ने 1 बजे इंटरनेट से स्टे की कापी निकाल कर दे दी पर प्रशासन ने उसे देखने से भी मना कर दिया।
मनी राम निर्मल ने कहा कि कलायत में जिस रकबे को जोहड़ की भूमि दिखाया है वह वास्तव में लोगों की अपनी भूमि है। तत्कालीन राजस्व अधिकारियों की गलती की वजह से लोगों को अपने ही घरों से बेघर कर दिया गया। सुभाष सिंहमार ने कहा कि इस मामले में असली दोषी पहले भी प्रशासनिक अधिकारी थे जिन्होंने लोगों की मलकीयत की जमीन को सरकारी जमीन बना दिया। आज भी प्रशासनिक अधिकारियों ने न्यायालय के आदेशों की धज्जियां उड़ाते हुए लोगों के मकान गिरा कर दोषी होने के मामले पर मोहर लगा दी। नगरपालिका के सचिव को उन्होंने स्वयं कोर्ट द्वारा दिये गए स्टेटस को की कापी दी थी जिसे उन्होंने देखने तक से इंकार कर दिया। प्रदर्शन को भारतीय कम्यूनिस्ट पार्टी मार्क्सवादी ने अपना समर्थन दिया। प्रदर्शन करने वालों में राजबीर बिट्टू, बिरमी राणा, गोपाल नंबरदार, कृष्ण, राजपाल, रामपाल, हिस्म सिंह, विक्रम, मोहन राणा, राजेश राणा, बीरभान निर्मल आदि मौजूद रहे।
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एसडीएम की अनुपस्थिति में तहसीलदार चंद्रमोहन बिश्नोई ने ज्ञापन लिया और इसे मुख्यमंत्री तक पहुंचाने की बात कही। रवींद्र सूर्यवंशी ने कहा कि पीड़ित लोगों की अपील कमिश्नर कोर्ट अंबाला में विचाराधीन है। इस आधार पर उच्च न्यायालय में जस्टिस शेखर धवन की कोर्ट ने स्टेटस को का आदेश 6 जनवरी को दिया था। 6 जनवरी को प्रशासन खसरा नंबर 483 में कार्रवाई कर रहा था। अचानक वहां निर्माण कार्यों को ढहाने का काम बीच में ही बंद कर लाव लश्कर सहित खसरा नंबर 482 में पहुंच गया। सजूमा रोड को पूरी तरह से सील कर लोगों के मकान गिराने शुरू कर दिए। गोपाल नंबरदार, कृष्ण कुमार आदि ने प्रशासन से गुहार लगाई कि उन्हें स्टेटस को मिल गया है वे उन्हें केवल एक घंटा दें। पीड़ितों ने 1 बजे इंटरनेट से स्टे की कापी निकाल कर दे दी पर प्रशासन ने उसे देखने से भी मना कर दिया।
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मनी राम निर्मल ने कहा कि कलायत में जिस रकबे को जोहड़ की भूमि दिखाया है वह वास्तव में लोगों की अपनी भूमि है। तत्कालीन राजस्व अधिकारियों की गलती की वजह से लोगों को अपने ही घरों से बेघर कर दिया गया। सुभाष सिंहमार ने कहा कि इस मामले में असली दोषी पहले भी प्रशासनिक अधिकारी थे जिन्होंने लोगों की मलकीयत की जमीन को सरकारी जमीन बना दिया। आज भी प्रशासनिक अधिकारियों ने न्यायालय के आदेशों की धज्जियां उड़ाते हुए लोगों के मकान गिरा कर दोषी होने के मामले पर मोहर लगा दी। नगरपालिका के सचिव को उन्होंने स्वयं कोर्ट द्वारा दिये गए स्टेटस को की कापी दी थी जिसे उन्होंने देखने तक से इंकार कर दिया। प्रदर्शन को भारतीय कम्यूनिस्ट पार्टी मार्क्सवादी ने अपना समर्थन दिया। प्रदर्शन करने वालों में राजबीर बिट्टू, बिरमी राणा, गोपाल नंबरदार, कृष्ण, राजपाल, रामपाल, हिस्म सिंह, विक्रम, मोहन राणा, राजेश राणा, बीरभान निर्मल आदि मौजूद रहे।
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