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विद्यार्थियों का परीक्षा परिणाम रोकने के विरोध में अभिभावकों ने किया हंगामा
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Parents created a ruckus in protest against stopping the results of the students
- फोटो : Kaithal
कैथल। सिल्वर ऑक पब्लिक स्कूल में प्राथमिक कक्षाओं के विद्यार्थियों का परीक्षा परिणाम रोकने के विरोध में अभिभावकों ने स्कूल में जमकर हंगामा किया। अभिभावकों ने स्कूल प्रबंधन पर फार्म-6 को दरकिनार कर ज्यादा फीस लेने, विद्यार्थियों से वसूली गई अतिरिक्त फीस उन्हें वापस नहीं करने और जानबूझकर बच्चों का परीक्षा परिणाम रोकने जैसे गंभीर आरोप लगाए। स्थिति को ज्यादा खराब होते देख प्रबंधन ने सिविल लाइन थाना पुलिस को स्कूल में बुला लिया। सूचना मिलते ही इंस्पेक्टर रोहताश कुमार पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचे और स्थिति को नियंत्रित किया। इसी दौरान खंड शिक्षा अधिकारी रामचंद्र भी मौके पर पहुंच गए और अभिभावकों को समझाने का प्रयास किया।
अभिभावकों ने पुलिस के सामने ही स्कूूल प्रबंधन पर आरोप लगाते हुए कहा कि स्कूल प्रबंधन ने फार्म-6 में निर्धारित फीस से अतिरिक्त फीस की मांग करते हुए 15-20 विद्यार्थियों का परीक्षा परिणाम रोक लिया है। जब अभिभावकों ने स्कूल में आकर इसका विरोध किया और प्रबंधन से मिलना चाहा तो उन्हें रोक दिया गया। प्रबंधन ने उनकी समस्या का बातचीत से समाधान करने की बजाय स्कूल में पुलिस बुला ली।
स्टूडेंट्स-पैरेंट्स वेलफेयर एसोसिएशन के प्रधान मोनू बतरा, सचिव गुरमीत गुलाटी, अनिल खुराना, नृप जैन, ज्योति बतरा, मंजीत सिंह व हरविंद्र कौर ने आरोप लगाया कि कक्षा पहली और दूसरी के विद्यार्थियों से स्कूल ने एक-एक बच्चे से करीब 15-15 हजार रुपये अतिरिक्त फीस ली है। जिन अभिभावकों ने अतिरिक्त फीस नहीं दी, उनका परिणाम रोक लिया गया है। अब स्कूल प्रबंधन कह रहा है कि इन बच्चों की पूरी फीस नहीं आई है। अगर कोई अभिभावक फीस नहीं देता है तो वह स्कूल से अपने बच्चे को हटवा सकता है, वे एसएलसी दे देंगे। स्कूल उन्हें कोई फंड वापस नहीं करेगा और न ही इन बच्चों का परिणाम जारी होगा। अभिभावकों ने मांग की कि बच्चों का परीक्षा परिणाम जारी किया जाए व जिन बच्चों की फार्म-6 से में निर्धारित से ज्यादा फीस ली गई है, वह फीस एंड फंड रेगुलेटरी कमेटी के निर्देश अनुसार वापस की जाए।
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इस संबंध में स्कूल की डायरेक्टर सोनाली चौधरी ने कहा कि स्कूल प्रबंधन ने उन विद्यार्थियों का परिणाम रोका है, जिन्होंने अभी तक मासिक फीस पूरी नहीं दी है। जो फीस जमा करवाएगा, उसी का परिणाम जारी होगा। उन्होंने यह भी कहा कि अतिरिक्त फीस पास करने के आदेश वर्ष 2020-21 के लिए थे, जिसकी फीस उन्होंने अभिभावकों को वापस कर दी। अब 2021-22 के लिए उनके पास ऐसे कोई आदेश नहीं आए हैं।
मौके पर पहुंचे इंस्पेक्टर रोहताश ने कहा कि सूचना मिलने पर पुलिस स्कूल में पहुंच गई थी। दोनों पक्षों से बातचीत कर अभिभावकों को शांत करवाया गया। वहीं बीईओ रामचंद्र मौण ने कहा कि स्कूल में जाकर दोनों पक्षों से बातचीत की गई। इस बारे में एफएफआरसी के अधिकारियों को अवगत करवाया जाएगा। जो भी नियमानुसार कार्रवाई होगी, वह की जाएगी।
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अभिभावकों ने पुलिस के सामने ही स्कूूल प्रबंधन पर आरोप लगाते हुए कहा कि स्कूल प्रबंधन ने फार्म-6 में निर्धारित फीस से अतिरिक्त फीस की मांग करते हुए 15-20 विद्यार्थियों का परीक्षा परिणाम रोक लिया है। जब अभिभावकों ने स्कूल में आकर इसका विरोध किया और प्रबंधन से मिलना चाहा तो उन्हें रोक दिया गया। प्रबंधन ने उनकी समस्या का बातचीत से समाधान करने की बजाय स्कूल में पुलिस बुला ली।
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स्टूडेंट्स-पैरेंट्स वेलफेयर एसोसिएशन के प्रधान मोनू बतरा, सचिव गुरमीत गुलाटी, अनिल खुराना, नृप जैन, ज्योति बतरा, मंजीत सिंह व हरविंद्र कौर ने आरोप लगाया कि कक्षा पहली और दूसरी के विद्यार्थियों से स्कूल ने एक-एक बच्चे से करीब 15-15 हजार रुपये अतिरिक्त फीस ली है। जिन अभिभावकों ने अतिरिक्त फीस नहीं दी, उनका परिणाम रोक लिया गया है। अब स्कूल प्रबंधन कह रहा है कि इन बच्चों की पूरी फीस नहीं आई है। अगर कोई अभिभावक फीस नहीं देता है तो वह स्कूल से अपने बच्चे को हटवा सकता है, वे एसएलसी दे देंगे। स्कूल उन्हें कोई फंड वापस नहीं करेगा और न ही इन बच्चों का परिणाम जारी होगा। अभिभावकों ने मांग की कि बच्चों का परीक्षा परिणाम जारी किया जाए व जिन बच्चों की फार्म-6 से में निर्धारित से ज्यादा फीस ली गई है, वह फीस एंड फंड रेगुलेटरी कमेटी के निर्देश अनुसार वापस की जाए।
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इस संबंध में स्कूल की डायरेक्टर सोनाली चौधरी ने कहा कि स्कूल प्रबंधन ने उन विद्यार्थियों का परिणाम रोका है, जिन्होंने अभी तक मासिक फीस पूरी नहीं दी है। जो फीस जमा करवाएगा, उसी का परिणाम जारी होगा। उन्होंने यह भी कहा कि अतिरिक्त फीस पास करने के आदेश वर्ष 2020-21 के लिए थे, जिसकी फीस उन्होंने अभिभावकों को वापस कर दी। अब 2021-22 के लिए उनके पास ऐसे कोई आदेश नहीं आए हैं।
मौके पर पहुंचे इंस्पेक्टर रोहताश ने कहा कि सूचना मिलने पर पुलिस स्कूल में पहुंच गई थी। दोनों पक्षों से बातचीत कर अभिभावकों को शांत करवाया गया। वहीं बीईओ रामचंद्र मौण ने कहा कि स्कूल में जाकर दोनों पक्षों से बातचीत की गई। इस बारे में एफएफआरसी के अधिकारियों को अवगत करवाया जाएगा। जो भी नियमानुसार कार्रवाई होगी, वह की जाएगी।