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Kaithal News: 18 माह में 109 बसें हुईं जर्जर, रूटों से हटने के बाद रोडवेज का बेड़ा घटा

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Thu, 10 Sep 2026 11:41 PM IST
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109 buses fell into disrepair in 18 months, reducing the roadways fleet after being removed from routes
वर्कशॉप में खड़ी मरम्मत के लिए बसें। संवाद
कैथल। कैथल रोडवेज डिपो में बसों की कमी लगातार गंभीर होती जा रही है। वीरवार को डिपो से तीन बसें जर्जर घोषित कर रूट से हटाई गई हैं। वहीं मार्च 2025 से अब तक करीब 109 बसें जर्जर होने के कारण रूटों से हटाई जा चुकी हैं। इससे डिपो के संचालन पर दबाव बढ़ गया है। करीब 250 बसों के बेड़े वाले डिपो में फिलहाल रोडवेज की करीब 145 बसें ही उपलब्ध हैं। इनमें करीब 50 बसें नई हैं जबकि शेष पुरानी बसों के सहारे रूटों का संचालन किया जा रहा है।
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पुरानी बसों में तकनीकी खराबी आने के कारण कई बार यात्रियों को बीच रास्ते में परेशानी उठानी पड़ती है। विभागीय आंकड़ों के अनुसार मार्च 2025 से अब तक 109 बसें जर्जर हो चुकी हैं। मार्च 2025 में 15, जुलाई में 12, सितंबर में 30, अक्तूबर में 12 और दिसंबर में नौ बसें जर्जर हुईं। इसके बाद जनवरी 2026 में चार, फरवरी में तीन, अप्रैल में तीन, मई में पांच, जुलाई में 13 और सितंबर में तीन बसें जर्जर होकर रूट से बाहर हो गईं। वहीं इन बसों की मरम्मत करने वाले कर्मचारियों की भारी कमी है। स्वीकृत 204 पदों में से 159 पद खाली पड़े हैं और केवल 45 कर्मचारी ही बसों की मरम्मत का काम संभाल रहे हैं। ऐसे में पुरानी बसों के बार-बार खराब होने से यात्रियों के साथ-साथ रोडवेज प्रबंधन की परेशानी भी बढ़ रही है।
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दिल्ली समेत प्रमुख रूटों पर असर
यात्री रामभज, राजेश, मनप्रीत सिंह का कहना है कि बसों की कमी का असर दिल्ली, जींद, कुरुक्षेत्र, असंध और करनाल जैसे प्रमुख रूटों पर भी दिखाई दे रहा है। इन मार्गों पर रोजाना बड़ी संख्या में यात्री सफर करते हैं। बसों की संख्या कम होने से यात्रियों को कई बार लंबे समय तक इंतजार करना पड़ता है। बस आने के बाद भीड़ अधिक होने के कारण कई यात्रियों को खड़े होकर सफर करना पड़ता है। बसों की संख्या कम होने से समय पर गंतव्य तक पहुंचना मुश्किल हो जाता है। किसी बस के बीच रास्ते में खराब होने पर परेशानी और बढ़ जाती है।
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यात्री बोले- दोपहर बाद दिल्ली रूट पर बढ़ता है इंतजार
यात्री रामेश्वर ने बताया कि दिल्ली रूट पर दोपहर बाद बस के लिए काफी समय इंतजार करना पड़ता है। कई बार बस आने के बाद भीड़ इतनी अधिक होती है कि बैठने की जगह नहीं मिलती। उन्होंने कहा कि यात्रियों की सुविधा के लिए इस रूट पर बसों की संख्या बढ़ाई जानी चाहिए।
रोडवेज यूनियन कर्मचारी नेता कृष्ण कुमार ने बताया कि डिपो में बसों की संख्या कम हो रही है। नई बसें डिपो में आ नहीं रही हैं। जो बसें डिपो से चल रही हैं, वे भी काफी पुरानी हो चुकी हैं। बीच रास्ते बसों के खराब होने से यात्रियों, चालक और परिचालक को परेशानी उठानी पड़ती है।

रूटों पर नहीं आने दी जा रही दिक्कत : अनिल
वर्कशॉप मैनेजर अनिल कुमार ने बताया कि रूटों पर यात्रियों को दिक्कत नहीं आने दी जा रही है। उपलब्ध बसों का बेहतर तरीके से संचालन किया जा रहा है। नई बसों की मांग मुख्यालय को भेजी हुई है। जल्द नई बसें मिलने की उम्मीद है।

वर्कशॉप में खड़ी मरम्मत के लिए बसें। संवाद

वर्कशॉप में खड़ी मरम्मत के लिए बसें। संवाद

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