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ड्यूटी पर तैनात कर्मचारियों को पड़े खाने के लाले
ब्यूरो/अमर उजाला/कैथ्ाल
Updated Mon, 18 Jan 2016 12:57 AM IST
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पंचायत चुनाव के दौरान बूथों पर तैनात लगभग एक लाख कर्मचारियों की रहने और खाने की व्यवस्था ठीक ढंग से नहीं होने के कारण इन कर्मचारियों को दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। एक तरह से इन कर्मचारियों को उम्मीदवारों के रहमों कर्म पर गांवों में भेज दिया गया है।
करीब 40 घंटे स्कूलों के कमरों में बिताने वाले कर्मचारियों को खाने-पीने, बिस्तर और सामान्य जरूरतें पूरा करने में परेशानी हो रही है। कई गांवों में तो पोलिंग पार्टियों में शामिल कर्मचारियों को बारी-बारी से बूथ से बाहर जाकर खाना खाना पड़ा। बेशक सरकार की ओर से कर्मचारियों को ड्यूटी के लिए भुगतान किया जाता है लेकिन गांवों में ढाबों आदि की व्यवस्था न होने के कारण कर्मचारियों के लिए भोजन खरीद कर खाने में भी परेशानी होती है।
शनिवार दोपहर तक ही पूंडरी और राजौंद ब्लॉक में कर्मचारियों को वोटिंग सामग्री के साथ गांवों में भेज दिया गया।
बाद दोपहर सभी बूथों पर कर्मचारी पहुंच गए। जहां गांव के लोगों ने कई जगह तो खूब आवभगत भी की। अधिकतर उम्मीदवारों और उनके समर्थकों ने कई जगह तो लाल परी से भी इन कर्मचारियों की आवभगत की लेकिन कई गांवों में कर्मचारी भोजन के इंतजार में ही बैठे रहे। कर्मचारियों ने बताया कि भोजन के लिए बूथ छोड़कर बारी-बारी से बाहर जाकर खाना खाना पड़ा। कोई पूछने तक नहीं आया।
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रही बात बिस्तर की तो मच्छरों के बीच रात गुजारनी पड़ी। बेशक सरकार हमें पैसा देती है, लेकिन गांवों में भोजन खरीदने की भी व्यवस्था नहीं रहती। कई जगह तो यह भी पता चला है कि स्कूलों में सोने तक की सही व्यवस्था नहीं पाई गई।
ड्यूटी कटवाने की जुगत
बूथों पर रात को न सोना पड़े, इसके लिए कर्मचारी नेताओं के यहां चुनावी ड्यूटी कटवाने की जुगत भिड़ा रहे हैं। कुछ तो अपने मेडिकल तक बनवाकर चुनावी ड्यूटी से बचने का प्रयास कर रहे हैं ताकि उन्हें स्कूलों में जाकर न सोना पड़े।
हालांकि गांवों में लोग खाने और बिस्तर के लिए परेशानी नहीं आने देते लेकिन अधिकतर उम्मीदवारों द्वारा ही कर्मचारियों के भोजन व बिस्तर की व्यवस्था की जाती है। हो सकता है कि कई जगह कर्मचारियों को दिक्कत हुई हो।
सतबीर गोयत, नेता, सर्वकर्मचारी संघ, कैथल।
जो कर्मचारी ड्यूटी करते हैं उनके लिए सरकार द्वारा उचित भुगतान किया जाता है। प्रयास किया जाता है कि कर्मचारियों को परेशानी न आए। ग्राम सचिव को इस संबंध में निर्देश दिए जाते हैं।
डीसी, निखिल गजराज
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करीब 40 घंटे स्कूलों के कमरों में बिताने वाले कर्मचारियों को खाने-पीने, बिस्तर और सामान्य जरूरतें पूरा करने में परेशानी हो रही है। कई गांवों में तो पोलिंग पार्टियों में शामिल कर्मचारियों को बारी-बारी से बूथ से बाहर जाकर खाना खाना पड़ा। बेशक सरकार की ओर से कर्मचारियों को ड्यूटी के लिए भुगतान किया जाता है लेकिन गांवों में ढाबों आदि की व्यवस्था न होने के कारण कर्मचारियों के लिए भोजन खरीद कर खाने में भी परेशानी होती है।
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शनिवार दोपहर तक ही पूंडरी और राजौंद ब्लॉक में कर्मचारियों को वोटिंग सामग्री के साथ गांवों में भेज दिया गया।
बाद दोपहर सभी बूथों पर कर्मचारी पहुंच गए। जहां गांव के लोगों ने कई जगह तो खूब आवभगत भी की। अधिकतर उम्मीदवारों और उनके समर्थकों ने कई जगह तो लाल परी से भी इन कर्मचारियों की आवभगत की लेकिन कई गांवों में कर्मचारी भोजन के इंतजार में ही बैठे रहे। कर्मचारियों ने बताया कि भोजन के लिए बूथ छोड़कर बारी-बारी से बाहर जाकर खाना खाना पड़ा। कोई पूछने तक नहीं आया।
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रही बात बिस्तर की तो मच्छरों के बीच रात गुजारनी पड़ी। बेशक सरकार हमें पैसा देती है, लेकिन गांवों में भोजन खरीदने की भी व्यवस्था नहीं रहती। कई जगह तो यह भी पता चला है कि स्कूलों में सोने तक की सही व्यवस्था नहीं पाई गई।
ड्यूटी कटवाने की जुगत
बूथों पर रात को न सोना पड़े, इसके लिए कर्मचारी नेताओं के यहां चुनावी ड्यूटी कटवाने की जुगत भिड़ा रहे हैं। कुछ तो अपने मेडिकल तक बनवाकर चुनावी ड्यूटी से बचने का प्रयास कर रहे हैं ताकि उन्हें स्कूलों में जाकर न सोना पड़े।
हालांकि गांवों में लोग खाने और बिस्तर के लिए परेशानी नहीं आने देते लेकिन अधिकतर उम्मीदवारों द्वारा ही कर्मचारियों के भोजन व बिस्तर की व्यवस्था की जाती है। हो सकता है कि कई जगह कर्मचारियों को दिक्कत हुई हो।
सतबीर गोयत, नेता, सर्वकर्मचारी संघ, कैथल।
जो कर्मचारी ड्यूटी करते हैं उनके लिए सरकार द्वारा उचित भुगतान किया जाता है। प्रयास किया जाता है कि कर्मचारियों को परेशानी न आए। ग्राम सचिव को इस संबंध में निर्देश दिए जाते हैं।
डीसी, निखिल गजराज