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51 दिनों बाद भी नहीं हुआ धान का भुगतान, किसान परेशान
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33-ढांड। चंदलाना रोष प्रकट करते हुए पीड़ित किसान।
- फोटो : Kaithal
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ढांड। सरकारी खरीद एजेंसियों द्वारा पीआर धान की खरीद करने के 59 दिन बाद भी भुगतान नहीं किए जाने से किसान परेशान हैं। किसानों की यह परेशानी सरकार के 72 घंटे में किसानों को धान का भुगतान किए जाने संबंधी दावों की पोल खोल रही है।
चंदलाना निवासी श्याम सुंदर ने बताया कि उसने अपनी पत्नी निशा रानी के नाम से ढांड अनाज मंडी में 19 अक्तूबर को 137445 रुपये का 70 क्विंटल धान हैफेड खरीद एजेंसी को तथा 182280 रुपये का 93 क्विंटल धान खाद्य एवं आपूर्ति विभाग के माध्यम से बेचा था। जिसका पंजीकरण उसकी पत्नी निशा रानी के नाम से था। काफी दिन बीत जाने के बाद जब उसकी पत्नी के बैंक खाते में धान के भुगतान की राशि नहीं आई तो उसने दोनों खरीद एजेंसियों से संपर्क किया। खरीद एजेंसियों ने उसे कोई संतोषजनक जवाब नहीं दिया। इसके बाद ढांड मार्केट कमेटी कार्यालय से संपर्क किया। उक्त कार्यालय से जिला सचिवालय के कमरा नंबर 305 में जाने के लिए कहा। जहां उन्होंने अपनी पत्नी के नाम बैंक खाता की फोटो कॉपी समेत सभी आवश्यक दस्तावेजों जमा करवा दिए। उसके बाद भी काफी दिनों तक जब बैंक खाते में धान की राशि नहीं आई तो फिर उन्होंने जिला सचिवालय में संपर्क किया। वहां से भी कोई कार्रवाई नहीं हो पाई।
उन्होंने बताया कि वह सात बार जिला सचिवालय और कई बार दोनों खरीद एजेंसियों के चक्कर काट चुके हैं। दो बार चंडीगढ़ मेरी फसल मेरा ब्योरा पोर्टल पर ई मेल से भी कागजात भेजे चुके हैं। आज तक समस्या को काई समाधान नहीं हो पाया है। पीड़ित ने जिला प्रशासन से सरकारी खरीद एजेंसियों को बेचे गए धान का शीघ्र ही भुगतान करवाया जाए।
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धान का भुगतान ई-खरीद पोर्टल के माध्यम से होता है। इसमें हम कुछ भी नहीं कर सकते। किन कारणों से धान की पेमेंट रुकी हुई है इस संबंध में किसान स्वयं पोर्टल खोलकर जांच कर सकता है।
सुखदीप ढांड हैफेड खरीद एजेंसी के अधिकारी
विभाग की ओर से 24 किसानों की सूची बनाकर डीएफएससी को सौंप दी है। जल्द ही पैसे का भुगतान होने की संभावनाएं हैं। यदि फिर भी भुगतान नहीं होता तो प्रशासन की समन्वय समिति की बैठक में यह बात रखी जाएगी।
डा. कर्मचंद डीडीए
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चंदलाना निवासी श्याम सुंदर ने बताया कि उसने अपनी पत्नी निशा रानी के नाम से ढांड अनाज मंडी में 19 अक्तूबर को 137445 रुपये का 70 क्विंटल धान हैफेड खरीद एजेंसी को तथा 182280 रुपये का 93 क्विंटल धान खाद्य एवं आपूर्ति विभाग के माध्यम से बेचा था। जिसका पंजीकरण उसकी पत्नी निशा रानी के नाम से था। काफी दिन बीत जाने के बाद जब उसकी पत्नी के बैंक खाते में धान के भुगतान की राशि नहीं आई तो उसने दोनों खरीद एजेंसियों से संपर्क किया। खरीद एजेंसियों ने उसे कोई संतोषजनक जवाब नहीं दिया। इसके बाद ढांड मार्केट कमेटी कार्यालय से संपर्क किया। उक्त कार्यालय से जिला सचिवालय के कमरा नंबर 305 में जाने के लिए कहा। जहां उन्होंने अपनी पत्नी के नाम बैंक खाता की फोटो कॉपी समेत सभी आवश्यक दस्तावेजों जमा करवा दिए। उसके बाद भी काफी दिनों तक जब बैंक खाते में धान की राशि नहीं आई तो फिर उन्होंने जिला सचिवालय में संपर्क किया। वहां से भी कोई कार्रवाई नहीं हो पाई।
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उन्होंने बताया कि वह सात बार जिला सचिवालय और कई बार दोनों खरीद एजेंसियों के चक्कर काट चुके हैं। दो बार चंडीगढ़ मेरी फसल मेरा ब्योरा पोर्टल पर ई मेल से भी कागजात भेजे चुके हैं। आज तक समस्या को काई समाधान नहीं हो पाया है। पीड़ित ने जिला प्रशासन से सरकारी खरीद एजेंसियों को बेचे गए धान का शीघ्र ही भुगतान करवाया जाए।
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धान का भुगतान ई-खरीद पोर्टल के माध्यम से होता है। इसमें हम कुछ भी नहीं कर सकते। किन कारणों से धान की पेमेंट रुकी हुई है इस संबंध में किसान स्वयं पोर्टल खोलकर जांच कर सकता है।
सुखदीप ढांड हैफेड खरीद एजेंसी के अधिकारी
विभाग की ओर से 24 किसानों की सूची बनाकर डीएफएससी को सौंप दी है। जल्द ही पैसे का भुगतान होने की संभावनाएं हैं। यदि फिर भी भुगतान नहीं होता तो प्रशासन की समन्वय समिति की बैठक में यह बात रखी जाएगी।
डा. कर्मचंद डीडीए