{"_id":"614b9c9f8ebc3e09e4119263","slug":"paddy-crop-lying-in-rain-soaked-mandis-and-fields-kaithal-news-knl84111275","type":"story","status":"publish","title_hn":"बारिश से भीगी मंडियों और खेतों में पड़ी धान की फसल","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
बारिश से भीगी मंडियों और खेतों में पड़ी धान की फसल
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
श्राद्ध की झड़ी 16 दिन चाल्लै करे... कहावत ने बढ़ाई किसानों की चिंता बढ़ा दिया है। बारिश से मंडी व खेतों में पड़ी धान की फसल भीग गई है। जो फसल पक चुकी है और जो निसरने की प्रक्रिया में है, दोनों ही तरह की फसलों में इस बारिश से नुकसान की संभावनाएं हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि बारिश के कारण निसरने की प्रक्रिया में जो धान है, उसके दाने का रंग प्रभावित होगा। रंग यदि प्रभावित हुआ तो उसकी कीमतों पर असर निश्चित है। दूसरी ओर किसानों को प्रदेश की प्राचीन समय से चली आ रही उस कहावत ने भी चिंता बढ़ा दी है, जिसमें कहा जाता है कि श्राद्ध की शुरूआत में यदि झड़ी लगती है तो वह 16 दिन तक चलती है।
जानकारी के अनुसार धान के कटोरे के रूप में करनाल व कुरुक्षेत्र के साथ कैथल जिले को भी जाना जाता है। इस बार जिले में लगभग 1 लाख 60 हजार हेक्टेयर क्षेत्र में धान की रोपाई की गई है। इसमें से बारीक किस्म की 1509 व पीआर ग्रुप की धान इस समय लगभग पक चुकी हैं और 1509 की इस समय आवक जोरों पर है और पीआर धान की आवक तो शुरू हो गई है। इसकी सरकारी खरीद 1 अक्तूबर से शुरू होगी। करीब 60 प्रतिशत इलाके में पीआर ग्रुप की धान की रोपाई की गई है। शेष 40 प्रतिशत में बारीक धान है। बारीक धान में सबसे पहले पकने वाली 1509 की आवक मंडियों में जोरों पर हैं। इसके बाद अब पीआर ग्रुप की धान की आवक शुरू हो गई है। 1121 व बासमती ग्रुप की दूसरी धान की फसल अभी निसरने की प्रक्रिया में हैं।
कृषि विज्ञान केंद्र के मुख्य वैज्ञानिक डा. रमेश वर्मा ने कहा कि इस समय हुई बारिश धान की फसल के लिए नुकसानदायक है। मंडी में जो फसल पहुंची है, वह भीग गई है। वहीं खेतों में जो धान पक चुकी है, यदि वहां तेज हवा चल गई तो यह जमीन पर बिछ जाएगी। दूसरी ओर जहां फसल निसरने की प्रक्रिया में हैं, वहां दाने के रंग पर असर होगा। जो बिकने के समय कीमतों पर असर डालता है। इसके अलावा कटाई प्रभावित होगी, जो फसल पूरी तरह से पक चुकी है, उसमें कंबाइन चलाने में अभी समय लगेगा। एक अनुमान के अनुसार बुधवार को करीब 25 से 30 एमएम बारिश हुई है।
विज्ञापन
प्रगतिशील किसान महेंद्र रसीना ने कहा कि यदि ज्यादा दिन तक मौसम इसी प्रकार रहा तो धान की फसल में भारी नुकसान होगा। किसान एक ही प्रार्थना कर रहे हैं कि किसी तरह बारिश रुक जाए।
बाक्स
मंडी में शेड के नीचे हुई धान की खरीद, आवक में 50 प्रतिशत गिरावट
अनाज मंडी में खुले में धान जो धान पड़ा है, वह भीग गया है। वहीं शेड के नीचे ही धान की खरीद हुई। मंगलवार के मुकाबले खरीद में बुधवार को 50 प्रतिशत गिरावट दर्ज की गई। यह करीब 3000 क्विंटल के आस-पास रही। सचिव सतबीर राविश ने बताया कि अनाज मंडी में शेड के नीचे धान बिका। बारिश के कारण कटाई पर असर हुआ है। जिस कारण आवक बुधवार को न के बराबर हुई है। जो मंगलवार दोपहर बाद धान कटा था, किसान उसे लेकर ही मंडी में पहुंचे हैं।
विज्ञापन
जानकारी के अनुसार धान के कटोरे के रूप में करनाल व कुरुक्षेत्र के साथ कैथल जिले को भी जाना जाता है। इस बार जिले में लगभग 1 लाख 60 हजार हेक्टेयर क्षेत्र में धान की रोपाई की गई है। इसमें से बारीक किस्म की 1509 व पीआर ग्रुप की धान इस समय लगभग पक चुकी हैं और 1509 की इस समय आवक जोरों पर है और पीआर धान की आवक तो शुरू हो गई है। इसकी सरकारी खरीद 1 अक्तूबर से शुरू होगी। करीब 60 प्रतिशत इलाके में पीआर ग्रुप की धान की रोपाई की गई है। शेष 40 प्रतिशत में बारीक धान है। बारीक धान में सबसे पहले पकने वाली 1509 की आवक मंडियों में जोरों पर हैं। इसके बाद अब पीआर ग्रुप की धान की आवक शुरू हो गई है। 1121 व बासमती ग्रुप की दूसरी धान की फसल अभी निसरने की प्रक्रिया में हैं।
विज्ञापन
कृषि विज्ञान केंद्र के मुख्य वैज्ञानिक डा. रमेश वर्मा ने कहा कि इस समय हुई बारिश धान की फसल के लिए नुकसानदायक है। मंडी में जो फसल पहुंची है, वह भीग गई है। वहीं खेतों में जो धान पक चुकी है, यदि वहां तेज हवा चल गई तो यह जमीन पर बिछ जाएगी। दूसरी ओर जहां फसल निसरने की प्रक्रिया में हैं, वहां दाने के रंग पर असर होगा। जो बिकने के समय कीमतों पर असर डालता है। इसके अलावा कटाई प्रभावित होगी, जो फसल पूरी तरह से पक चुकी है, उसमें कंबाइन चलाने में अभी समय लगेगा। एक अनुमान के अनुसार बुधवार को करीब 25 से 30 एमएम बारिश हुई है।
विज्ञापन
प्रगतिशील किसान महेंद्र रसीना ने कहा कि यदि ज्यादा दिन तक मौसम इसी प्रकार रहा तो धान की फसल में भारी नुकसान होगा। किसान एक ही प्रार्थना कर रहे हैं कि किसी तरह बारिश रुक जाए।
बाक्स
मंडी में शेड के नीचे हुई धान की खरीद, आवक में 50 प्रतिशत गिरावट
अनाज मंडी में खुले में धान जो धान पड़ा है, वह भीग गया है। वहीं शेड के नीचे ही धान की खरीद हुई। मंगलवार के मुकाबले खरीद में बुधवार को 50 प्रतिशत गिरावट दर्ज की गई। यह करीब 3000 क्विंटल के आस-पास रही। सचिव सतबीर राविश ने बताया कि अनाज मंडी में शेड के नीचे धान बिका। बारिश के कारण कटाई पर असर हुआ है। जिस कारण आवक बुधवार को न के बराबर हुई है। जो मंगलवार दोपहर बाद धान कटा था, किसान उसे लेकर ही मंडी में पहुंचे हैं।