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Kaithal News: युवाओं को नशे से बाहर निकाल रहा ओएसटी केंद्र

Tue, 25 Nov 2025 01:30 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल Updated Tue, 25 Nov 2025 01:30 AM IST
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OST center is taking youth out of addiction
संवाद न्यूज एजेंसी
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कैथल। जिला नागरिक अस्पताल में संचालित ओएसटी (ओपिऑयड सब्स्टीट्यूशन ट्रीटमेंट) केंद्र नशे की लत छुड़ाने में तेजी से प्रभावी साबित हो रहा है। शहर के ओएसटी सेंटर में वर्तमान में 412 युवक नियमित रूप से दवा ले रहे हैं। प्रतिदिन 45 से 50 युवक अपने उपचार के लिए यहां पहुंचते हैं। 25 वर्ष से लेकर 40 वर्ष आयु वर्ग तक के लोग इस सेंटर से मदद ले रहे हैं।

नशे की गिरफ्त में आए युवाओं को संभालने के लिए स्वास्थ्य विभाग ने 17 जुलाई 2023 को यह केंद्र शुरू किया था। यहां प्रतिदिन मरीजों को दवा दी जाती है। रविवार हो या कोई अवकाश, उपचार एक दिन भी नहीं रुकता। दवा स्वास्थ्यकर्मियों की देखरेख में दी जाती है और सेवन के कुछ देर बाद मरीजों को वापस भेज दिया जाता है। सेंटर में हीरोइन, स्मैक और इंजेक्शन आधारित नशे के आदी व्यक्तियों का उपचार किया जाता है।
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उपचार से बदल रही जिंदगी, युवाओं में लौट रहा आत्मविश्वास : ओएसटी सेंटर से उपचार ले रहे युवाओं में अब स्पष्ट सकारात्मक बदलाव दिख रहा है। शुरुआत में जहां निराशा, अपराधबोध और शारीरिक कमजोरी नजर आती थी, वहीं नियमित दवा और काउंसलिंग ने कई युवाओं की स्थिति में उल्लेखनीय सुधार किया है। अस्पताल प्रशासन के अनुसार, अब कई युवक पहले की तुलना में ज्यादा स्वस्थ, जागरूक और समाज में दोबारा जुड़ने के लिए तैयार दिखते हैं। उपचार से युवाओं की मानसिक स्थिरता भी मजबूत हुई है। स्वास्थ्यकर्मियों का कहना है कि ओएसटी केवल दवा देने तक सीमित नहीं। यह एक समग्र पुनर्वास प्रक्रिया है जिसमें काउंसलिंग, पारिवारिक सहयोग, मानसिक समर्थन और सामाजिक पुनर्स्थापन की कोशिशें शामिल रहती हैं।
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यहां उपचार ले रहे युवाओं की नियमित काउंसलिंग की जाती है। उन्हें नशे के दुष्प्रभावों, नशामुक्त जीवन के लाभों और अपने भविष्य को बेहतर बनाने के तरीकों के बारे में जागरूक किया जाता है। अस्पताल टीम का प्रयास रहता है कि कोई भी व्यक्ति उपचार बीच में न छोड़े।

बॉर्डर में तेजी से युवा फंस रहे नशे की दलदल में

ओएसटी सेंटर में उपचार के लिए आने वाले अधिकतर युवक बॉर्डर एरिया के गांवों- खरकां, भूना, पोलड़, मटौर, उरलाना- से हैं। इसके अलावा कैथल, पूंडरी, फतेहपुर, खुराना रोड और जखौली अड्डा से भी युवा उपचार के लिए आ रहे हैं। इनमें से अधिकांश युवक चिट्टा (हेरोइन) के आदी पाए गए हैं। चिकित्सा विशेषज्ञ बताते हैं कि इन क्षेत्रों में नशे का नेटवर्क तेजी से पैर पसार रहा है। चिट्टा आसानी से उपलब्ध होने के कारण कम उम्र में ही कई युवक इसकी लत में फंस जाते हैं। इसके दुष्परिणाम केवल शारीरिक और मानसिक कमजोरी तक सीमित नहीं, बल्कि चोरी, अपराध, घरेलू तनाव, और सामाजिक दूरी जैसी समस्याएं भी बढ़ रही हैं।


समाज में नशे की लत को दूर करना हमारा मकसद है। करीब 412 लोग सेंटर पर दवा ले रहे हैं और उनकी लत छूट रही है। दवा शत-प्रतिशत कारगर है, लेकिन नियमित रूप से सेवन करना आवश्यक है। --सीमा रानी, काउंसलर, ओएसटी केंद्र
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