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खुले में शौच मुक्त गांव के नाम पर खानापूर्ति
ब्यूरो कैथल
Updated Fri, 19 Aug 2016 12:06 AM IST
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शौचालयों में गोबर के उपले भरे हुए हैं
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
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खुले में शौचमुक्त अभियान के तहत जिन गांवों को प्रशासन ने स्वतंत्रता दिवस पर एक-एक लाख रुपये का पुरस्कार दिया है, उनमें से कई गांवों में स्थिति विपरीत है। ये गांव निर्धारित औपचारिकताएं पूरी नहीं कर पा रहे हैं। लेकिन न जाने किस आधार पर प्रशासन ने इन गांवों को यह आवार्ड थमा दिया। जिसमें एक लाख रुपये नकद इनाम भी पंचायतों को दिया गया है। स्वयं डीसी ने इस तरह से गांवों के चयन पर सवाल उठाए थे।
प्रशासन द्वारा पुरस्कृत किए गए गांवों में शुमार देवीगढ़ में सुबह जब जाकर देखा गया तो गांव का नजारा ही कुछ और था। लोग सुबह के समय हाथों में पानी का लोटा उठाए खेतों व खुले एरिया की ओर जा रहे थे। यह संख्या कोई कम नहीं थी। जब गांव में लोगों से बात की गई कि आप का गांव तो खुले में शौच मुक्त है। इस पर लोगों ने कहा कि यह सच्चाई नहीं है। गांव में अभी भी अनेकों घर ऐसे हैं। जहां शौचालय नहीं हैं। यह स्थिति देखकर काफी हैरानी हुई। गांव में बने कई घरों के शौचालयों में तो गोबर के उपले भरे हुए हैं। वहीं गांव वासी रामकुमार, शमशेर, शीशपाल , रमेश के यहां शौचालय नहीं मिले।
सरपंच गुलाब सिंह का कहना है कि कई घरों में शौचालय निर्माण चल रहा है। अगली किश्त न मिलने के कारण ये पूरे नहीं हो पाए। प्रयास किया जा रहा है कि लोग खुले में शौच न जाएं।
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डीसी ने बुधवार को हुई स्वच्छ भारत मिशन की बैठक में इस पुरस्कार को लेकर सवाल उठाए। साथ ही अधिकारियों को आवश्यक कदम उठाने की बात भी कही थी।
सीएम को लिखेंगे पत्र, जांच की करेंगे मांग
क्लीन कैथल ग्रीन कैथल अभियान के संयोजक एडवोकेट पुनीत चौधरी के अनुसार आवश्यक औपचारिकताओं के लिए निर्धारित 50 अंक हासिल करने वाले गांव को ही यह पुरस्कार दिया जाता है। जिसमें सभी घरों में शौचालय के 10 अंक, 10 अंक आंगनबाड़ी, स्कूल (प्राइवेट-सरकारी) में शौचालय, 8 अंक सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट प्लाट, 8 अंक लिक्विड वेस्ट मैनेजमेंट प्लांट, 10 अंक गांव में स्वच्छ पेयजल निजी व सार्वजनिक व्यवस्था के और 4 अंक गांव में सार्वजनिक जगह पर पौधा रोपण के हैं। उपरोक्त अंक पाने वाली पंचायत को ही यह पुरस्कार मिल सकता है। लेकिन गांव देवीगढ़ में ना तो सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट प्लांट, न ही लिक्विड वेस्ट मैनेजमेंट प्लांट और न ही सभी घरों में शौचालय है। वहीं गांव उमेदपुर में भी आंगनबाड़ी में शौचालय के अलावा लिक्विड व सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट प्लांट नहीं हैं। वे इस संबंध में मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर जांच की मांग करेंगे।
गांव उमेदपुर के सरपंच बलविंद्र सिंह का कहना है कि गांव में सभी घरों में शौचालय है। रही बात सडक़ों पर गंदगी तो यहां फसल के चलते लोग घरों के निकट ही गोबर डालते हैं। फसल आने पर इसे उठा दिया जाता है।
एडीसी कैप्टन शाक्ति सिंह का कहना है कि इस पुरस्कार का उद्देश्य लोगों में प्रतिस्पर्धा की भावना पैदा करना है। अगर गांव के कुछेक घरों में शौचालय नहीं है तो उन्हें समझाएंगे। लोगों को प्रेरित कर सभी घरों में शौचालय बनवा दिए जाएंगे।
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प्रशासन द्वारा पुरस्कृत किए गए गांवों में शुमार देवीगढ़ में सुबह जब जाकर देखा गया तो गांव का नजारा ही कुछ और था। लोग सुबह के समय हाथों में पानी का लोटा उठाए खेतों व खुले एरिया की ओर जा रहे थे। यह संख्या कोई कम नहीं थी। जब गांव में लोगों से बात की गई कि आप का गांव तो खुले में शौच मुक्त है। इस पर लोगों ने कहा कि यह सच्चाई नहीं है। गांव में अभी भी अनेकों घर ऐसे हैं। जहां शौचालय नहीं हैं। यह स्थिति देखकर काफी हैरानी हुई। गांव में बने कई घरों के शौचालयों में तो गोबर के उपले भरे हुए हैं। वहीं गांव वासी रामकुमार, शमशेर, शीशपाल , रमेश के यहां शौचालय नहीं मिले।
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सरपंच गुलाब सिंह का कहना है कि कई घरों में शौचालय निर्माण चल रहा है। अगली किश्त न मिलने के कारण ये पूरे नहीं हो पाए। प्रयास किया जा रहा है कि लोग खुले में शौच न जाएं।
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डीसी ने बुधवार को हुई स्वच्छ भारत मिशन की बैठक में इस पुरस्कार को लेकर सवाल उठाए। साथ ही अधिकारियों को आवश्यक कदम उठाने की बात भी कही थी।
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क्लीन कैथल ग्रीन कैथल अभियान के संयोजक एडवोकेट पुनीत चौधरी के अनुसार आवश्यक औपचारिकताओं के लिए निर्धारित 50 अंक हासिल करने वाले गांव को ही यह पुरस्कार दिया जाता है। जिसमें सभी घरों में शौचालय के 10 अंक, 10 अंक आंगनबाड़ी, स्कूल (प्राइवेट-सरकारी) में शौचालय, 8 अंक सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट प्लाट, 8 अंक लिक्विड वेस्ट मैनेजमेंट प्लांट, 10 अंक गांव में स्वच्छ पेयजल निजी व सार्वजनिक व्यवस्था के और 4 अंक गांव में सार्वजनिक जगह पर पौधा रोपण के हैं। उपरोक्त अंक पाने वाली पंचायत को ही यह पुरस्कार मिल सकता है। लेकिन गांव देवीगढ़ में ना तो सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट प्लांट, न ही लिक्विड वेस्ट मैनेजमेंट प्लांट और न ही सभी घरों में शौचालय है। वहीं गांव उमेदपुर में भी आंगनबाड़ी में शौचालय के अलावा लिक्विड व सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट प्लांट नहीं हैं। वे इस संबंध में मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर जांच की मांग करेंगे।
गांव उमेदपुर के सरपंच बलविंद्र सिंह का कहना है कि गांव में सभी घरों में शौचालय है। रही बात सडक़ों पर गंदगी तो यहां फसल के चलते लोग घरों के निकट ही गोबर डालते हैं। फसल आने पर इसे उठा दिया जाता है।
एडीसी कैप्टन शाक्ति सिंह का कहना है कि इस पुरस्कार का उद्देश्य लोगों में प्रतिस्पर्धा की भावना पैदा करना है। अगर गांव के कुछेक घरों में शौचालय नहीं है तो उन्हें समझाएंगे। लोगों को प्रेरित कर सभी घरों में शौचालय बनवा दिए जाएंगे।