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Kaithal News: बसों की संख्या कम, देरी से स्कूल पहुंच रहीं छात्राएं
Mon, 19 Jan 2026 01:30 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
Updated Mon, 19 Jan 2026 01:30 AM IST
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बस अड्डा पर बसों के इंतजार में खड़े यात्री।
- फोटो : जेतवन परिसर की परिक्रमा करते श्रीलंका के अनुयायी।
कैथल। रोडवेज डिपो में मिनी बसों की संख्या कम होने से ग्रामीण क्षेत्रों से आने वाली छात्राओं को स्कूल कॉलेज व विश्वविद्यालय में पहुंचने में देरी हो रही है। इससे समय की बर्बादी के साथ उनकी पढ़ाई भी प्रभावित हो रही है। छात्राओं ने नई बसों को बढ़ाने की मांग की है।
वर्कशॉप मैनेजर अनिल कुमार ने बताया कि बसों के कम होने के संबंध में जानकारी उच्च अधिकारियों को जानकारी भेजी गई है। उम्मीद जताई जा रही है कि कुछ मिनी पिंक बसें अगले एक महीने में आ जाए। जानकारी के अनुसार करीब छह वर्ष पहले डिपो को मात्र पांच पिंक बसें ही मिली थी।
वे बसें अब काफी पुरानी हो चुकी है। बीच रास्ते में कई बार खराब हो जाती है। जिससे छात्राओं को काफी परेशानी होती है। दूसरी बसों में लटक कर अपने गंतव्य तक पहुंचना पड़ता है। विभाग जरूर समय- समय पर पिंक बसों की वर्कशॉप में मरम्मत करवाता है, ताकि छात्राओं को शैक्षणिक संस्थान में पहुंचने के लिए परेशानी न हो।
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कैथल शहर में आईटीआई, जाट कॉलेज, आईजी कॉलेज, आरकेएसडी कॉलेज, अम्बेड़कर कॉलेज, महर्षि वाल्मीकि संस्कृत विश्वविद्यालय सहित सैकड़ों स्कूल, कोचिंग सेंटरों व लाइब्रेरी में करीब आठ हजार छात्राएं पढ़ाई के लिए आती है। विशेषकर बस अड्डा से लेकर शैक्षणिक संस्थानों तक ऑटो व अन्य निजी वाहनों में किराया देकर छात्राओं को पहुंचना पड़ रहा है। छात्राओं ने मांग की कि रोडवेज डिपो में बसों की संख्या बढ़ाई जाए जिससे वे समय पर कॉलेज पहुंच सकें। संवाद
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वर्कशॉप मैनेजर अनिल कुमार ने बताया कि बसों के कम होने के संबंध में जानकारी उच्च अधिकारियों को जानकारी भेजी गई है। उम्मीद जताई जा रही है कि कुछ मिनी पिंक बसें अगले एक महीने में आ जाए। जानकारी के अनुसार करीब छह वर्ष पहले डिपो को मात्र पांच पिंक बसें ही मिली थी।
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वे बसें अब काफी पुरानी हो चुकी है। बीच रास्ते में कई बार खराब हो जाती है। जिससे छात्राओं को काफी परेशानी होती है। दूसरी बसों में लटक कर अपने गंतव्य तक पहुंचना पड़ता है। विभाग जरूर समय- समय पर पिंक बसों की वर्कशॉप में मरम्मत करवाता है, ताकि छात्राओं को शैक्षणिक संस्थान में पहुंचने के लिए परेशानी न हो।
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कैथल शहर में आईटीआई, जाट कॉलेज, आईजी कॉलेज, आरकेएसडी कॉलेज, अम्बेड़कर कॉलेज, महर्षि वाल्मीकि संस्कृत विश्वविद्यालय सहित सैकड़ों स्कूल, कोचिंग सेंटरों व लाइब्रेरी में करीब आठ हजार छात्राएं पढ़ाई के लिए आती है। विशेषकर बस अड्डा से लेकर शैक्षणिक संस्थानों तक ऑटो व अन्य निजी वाहनों में किराया देकर छात्राओं को पहुंचना पड़ रहा है। छात्राओं ने मांग की कि रोडवेज डिपो में बसों की संख्या बढ़ाई जाए जिससे वे समय पर कॉलेज पहुंच सकें। संवाद

बस अड्डा पर बसों के इंतजार में खड़े यात्री।- फोटो : जेतवन परिसर की परिक्रमा करते श्रीलंका के अनुयायी।

बस अड्डा पर बसों के इंतजार में खड़े यात्री।- फोटो : जेतवन परिसर की परिक्रमा करते श्रीलंका के अनुयायी।