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टारगेट 83 हजार, बनाए एक लाख, पर कहां, रिकॉर्ड नहीं

Sat, 28 Jun 2014 11:54 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, कैथ्ाल
ब्यूरो/अमर उजाला, कैथ्ाल Updated Sat, 28 Jun 2014 11:54 PM IST
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No record of Urinal made in Kaithal
कैथल। कैथल जिले में प्रशासन ने अपने टारगेट से ज्यादा शौैचालय तो बनाए, लेकिन कहां बनाए, इस बारे में खुद एडीसी कार्यालय के पास जानकारी नहीं है।
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 दरअसल, एडीसी कार्यालय ने जिले में 83 हजार 438 शौचालय बनाने के टारगेट रखा था, जबकि अधिकारियों का कहना है कि एक लाख तीन हजरा 259 टॉयलेट्स का निर्माण किया गया है। लेकिन इस बारे में  कोई रिकॉर्ड नहीं है कि कहां-कहा ये शौचालय बनाए गए हैं।

महिला सशक्तीकरण के दावे हवा में

महिला शक्ति को सशक्त करने एवं बीमारियों से मुक्ति के लिए चलाई जा रही योजनाओं के क्रियान्वयन पर अधिकारी आंखें बंद किए हैं। जिले में शौचालय बनाने के लिए शुरू की गई योजनाएं किस तरह कागजों में ही पूरी हो रही हैं, इसका अंदाजा कैथल में क्रियान्वित संपूर्ण स्वच्छता अभियान एवं अब निर्मल भारत अभियान से लगाया जा सकता है।
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एक साल में 46 हजार बनाने का दावा

पहले संपूर्ण स्वच्छता अभियान एवं अब निर्मल भारत अभियान के नाम से क्रियान्वित हो रही इस योजना की हर मीटिंग में यह आंकड़ा रखा जाता है। लेकिन शायद इस ओर किसी ने ध्यान नहीं दिया। इस पर भी सबसे बड़ी हैरानी की बात यह है कि केवल साल 2006-07 में 46 हजार 335 शौचालय बनाए गए हैं। स्वयं कर्मचारी भी मानते हैं कि यह किसी भी सूरत में संभव नहीं है कि एक साल में इतने सारे शौचालय कैसे बन सकते हैं। इस पूरे मामले में इतना झोल है कि किसी बड़ी जांच एजेंसी से जांच के बिना सच्चाई सामने आना नामुमकिन है।
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लोगों को दी जाती है टॉयलेट बनाने के लिए सहायता
जानकारी के अनुसार हरियाणा में खुले में शौच से मुक्ति के लिए पहले संपूर्ण स्वच्छता अभियान चलाया गया था। प्रदेश में यह करीब 2001-02 में शुरू हुआ था। लेकिन जिले में इसके तहत वर्ष 2004-05 में काम शुरू हो पाया था। लोगों के घरों में शौचालय बनाने के लिए सबसे पहले 600 रुपये की सहायता राशि दी जाती थी। जो अब बढ़कर निर्मल भारत अभियान के माध्यम से 4600 रुपये हो गई है। योजना के तहत रिकॉर्ड में अब तक जिले में वर्ष 2005-06 में पांच हजार 368, 2006-07 में 46 हजार 335, वर्ष 2007-08 में 14 हजार 635, 2008-09 में 21 हजार 170, 2009-10 में 11 हजार 464, वर्ष 2010-11 में 1139, 2011-12 में शून्य, 2012-13 में शून्य तथा वर्ष 2013-14 में 2844 एवं इस वर्ष अब तक 304 शौचालय बनाए गए हैं।

एक साल में कैसे बना दिए 46 हजार शौचालय?
अब सवाल उठता है कि वर्ष 2006-07 में 46 हजार 335 शौचालय कैसे बना दिए गए? विभाग द्वारा एक ही वर्ष में इतना बजट कैसे उपलब्ध करवाया गया और इसकी सहायता से जिले के कौन-कौन से गांवों में शौचालय बनाए गए? इस तरह का रिकार्ड योजना को क्रियान्वित कर रहे एडीसी कार्यालय के पास नहीं है। स्वयं विभाग के जिलास्तरीय अधिकारी वर्ष 2006-07 में बने 46 हजार शौचालयों पर सवाल उठा चुके हैं तथा इस बारे में विभागीय अधिकारियों का मार्गदर्शन मांग चुका है।


विभाग द्वारा इस समय प्रयास किया जा रहा है कि दिए गए टारगेट के अनुसार ही शौचालय बनाए जा सकें। पहले कितने शौचालय बने और कैसे बने, कहां बनें, इस बारे में एडीसी कार्यालय में रिकॉर्ड नहीं है। पहले से चल रहे एक केस के मामले में उपलब्ध रिकार्ड पुलिस के पास है। इसके अलावा बीडीपीओ कार्यालयों में भी इस संबंध में रिकार्ड मिल सकता है। इस बारे में विभाग को भी अवगत करवाया गया है।

अरविंद मल्हान, एडीसी, कैथल।

पहले भी इस तरह का मामला उठा है। यहां भारी गड़बड़ी हो सकती है। इस पूरे मामले की बड़ी एजेंसी से निष्पक्ष जांच करवाई जाए। तभी जाकर सच्चाई का पता चल सकता है।
-रामपाल माजरा, विधायक कलायत।
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