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नो कैश टुडे, कृपया बार बार ना पूछें
ब्यूरो कैथल
Updated Tue, 06 Dec 2016 11:58 PM IST
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राहत के बाद लोगों के लिए नकदी बनी आफत
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
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सोमवार को छुट्टी के बाद लोगों को नकदी मिलने से थोड़ी राहत मिली थी। लेकिन मंगलवार को फिर से बैंकों में नकदी ना होने से लोगों को काफी दिक्कतें उठानी पड़ी। जहां शहर के अधिकतर बैंकों के बाहर लंबी कतारों में खड़े रहे। वहीं एटीएम में भी कैश नहीं डाले जाने से लोगों के हाथ केवल निराशा ही लगी। बैंकों में भी नकदी न होने के कारण वहां नो कैश टुडे और कैश नहीं है, कृपया बार-बार ना पूछें के पोस्टर चस्पा कर दिए गए। मंगलवार को जिले के बैंकों में करीब 35 करोड़ रुपये जमा हुए और 11 करोड़ रुपये की निकासी हुई।
शहर के पार्क रोड स्थित बैंक ऑफ बड़ौदा और कॉरपोरेशन बैंक और विजया बैंक के बाहर नो कैश टुडे और कैश नहीं है...कृप्या बार बार ना पूछें...लिखा हुआ पोस्टर चस्पा कर दिया गया। बैंक से रुपये निकालने आए अमित ने बताया कि उसे रिश्तेदार की शादी में जाना था। लेकिन बैंकों में नकदी नही है। अब उसे काफी कठिनाई होगी।
वहीं एटीएम से रुपये निकलवाने आये असंध निवासी नसीब ने बताया कि वह यहां अपने दोस्त की शादी में आया हुआ है। जो रुपये थे वह खत्म हो गये। रुपये के लिए करीब दो घंटों से बैठा हूं। लेकिन अभी तक रुपये नहीं मिले। इससे पहले भी शहर के अन्य स्थानों पर एटीएम तलाशें लेकिन वह भी खाली मिले।
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रुपयों की किल्लत से लोगों की नहीं हो रही परेशानी कम
राजौंद। बैंकों में लाइनों हटने का नाम ही नही ले रही। नगर के ओबीसी बैंक में चार दिन बाद आए कैश के बाद लोगों की लंबी लाइन शाम तक नही टूट पाई। नकदी लेने के लिए सुबह 6 बजे से ही लाइनें लगाकर खड़े हो गए थे। दिन प्रतिदिन बैंकों के आगे सुबह से ही लंबी लंबी लाइनें लगनी अब तो लोगों के लिए आम बात हो गई है। लेकिन लोगों का गुस्सा तब विस्फोटक होता है। जब लाइनों में घटा खड़े रहने के बावजूद भी उन्हें कैश नही मिल पाता।
बैंकों में रुपये नहीं मिलने से सबसे अधिक बुजुर्ग परेशान
सीवन। नोटबंदी की घोषणा के ठीक 28वें दिन स्थिति में कोई सुधार नही हुआ है। परेशानी से जुझ रहे बुजुर्ग रुपये न मिलने से तंग आ चुके हैं। सरकार के निर्देशों के बावजूद भी बुजुर्गों के लिए किसी भी बैंक ने अलग लाइन का अभी तक प्रावधान नहीं किया है। गांव कांगथली से आई एक 70 वर्षीय बुजुर्ग महिला ने कहा कि उनको 2 दिन हो गए हैं लेकिन इसके बावजूद भी रुपये उन्हें नहीं मिले। उसने बताया कि उनके घुटनों में भी काफी दर्द रहता है और वे बिना किसी के सहारे के लम्बे समय लाइन में नहीं खड़ी रह सकती हैं। सोमवार को तो लाइन मेें लगे उनको चक्कर भी आ गया था। आज मंगलवार को भी वे लगभग 6 घंटे लाइन में लगी रही व जब तक उनकी बारी आई तब तक बैंक में कैश समाप्त हो गया था।
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शहर के पार्क रोड स्थित बैंक ऑफ बड़ौदा और कॉरपोरेशन बैंक और विजया बैंक के बाहर नो कैश टुडे और कैश नहीं है...कृप्या बार बार ना पूछें...लिखा हुआ पोस्टर चस्पा कर दिया गया। बैंक से रुपये निकालने आए अमित ने बताया कि उसे रिश्तेदार की शादी में जाना था। लेकिन बैंकों में नकदी नही है। अब उसे काफी कठिनाई होगी।
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वहीं एटीएम से रुपये निकलवाने आये असंध निवासी नसीब ने बताया कि वह यहां अपने दोस्त की शादी में आया हुआ है। जो रुपये थे वह खत्म हो गये। रुपये के लिए करीब दो घंटों से बैठा हूं। लेकिन अभी तक रुपये नहीं मिले। इससे पहले भी शहर के अन्य स्थानों पर एटीएम तलाशें लेकिन वह भी खाली मिले।
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रुपयों की किल्लत से लोगों की नहीं हो रही परेशानी कम
राजौंद। बैंकों में लाइनों हटने का नाम ही नही ले रही। नगर के ओबीसी बैंक में चार दिन बाद आए कैश के बाद लोगों की लंबी लाइन शाम तक नही टूट पाई। नकदी लेने के लिए सुबह 6 बजे से ही लाइनें लगाकर खड़े हो गए थे। दिन प्रतिदिन बैंकों के आगे सुबह से ही लंबी लंबी लाइनें लगनी अब तो लोगों के लिए आम बात हो गई है। लेकिन लोगों का गुस्सा तब विस्फोटक होता है। जब लाइनों में घटा खड़े रहने के बावजूद भी उन्हें कैश नही मिल पाता।
बैंकों में रुपये नहीं मिलने से सबसे अधिक बुजुर्ग परेशान
सीवन। नोटबंदी की घोषणा के ठीक 28वें दिन स्थिति में कोई सुधार नही हुआ है। परेशानी से जुझ रहे बुजुर्ग रुपये न मिलने से तंग आ चुके हैं। सरकार के निर्देशों के बावजूद भी बुजुर्गों के लिए किसी भी बैंक ने अलग लाइन का अभी तक प्रावधान नहीं किया है। गांव कांगथली से आई एक 70 वर्षीय बुजुर्ग महिला ने कहा कि उनको 2 दिन हो गए हैं लेकिन इसके बावजूद भी रुपये उन्हें नहीं मिले। उसने बताया कि उनके घुटनों में भी काफी दर्द रहता है और वे बिना किसी के सहारे के लम्बे समय लाइन में नहीं खड़ी रह सकती हैं। सोमवार को तो लाइन मेें लगे उनको चक्कर भी आ गया था। आज मंगलवार को भी वे लगभग 6 घंटे लाइन में लगी रही व जब तक उनकी बारी आई तब तक बैंक में कैश समाप्त हो गया था।