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फर्जी प्रमाणपत्र पर लड़ा सरपंच का चुनाव
ब्यूरो/अमर उजाला/कैथ्ाल
Updated Thu, 04 Feb 2016 11:25 PM IST
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जाखौली गांव की कमान पट्टी के सरपंच पर फर्जी प्रमाणपत्र के आधार पर चुनाव लड़ने का आरोप लगा है। यह आरोप सरपंच पद के चुनाव में दूसरे नंबर पर रहे प्रत्याशी मनीराम कादियान ने लगाया है। इस संबंध में डीसी को शिकायत दी गई है। 17 जनवरी को गांव में पंचायत चुनाव के लिए वोटिंग हुई थी।
सरपंच पद के लिए पांच प्रत्याशी मैदान में थे जिसमें रतन सिंह कादियान ने जीत हासिल की है। दूसरे नंबर पर रहे प्रत्याशी मनीराम कादियान का आरोप है कि रतन सिंह ने जो दसवीं का सर्टिफिकेट जमा करवाया था वह फर्जी है। इस सर्टिफिकेट को छत्तीसगढ़ से लाया गया है।
मनीराम का कहना है कि डीसी ने इस मामले में जांच संबंधित कागजात डीडीपीओ राजेश दुग्गल को भेज दिए हैं। मामले में आगे की जांच का जिम्मा जिला शिक्षा अधिकारी को सौंपा गया है।
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शिकायतकर्ता का कहना है कि उन्हें आरटीआई के माध्यम से पता चला कि रतन सिंह ने 1982 में जाखौली के हाईस्कूल से कक्षा आठवीं की परीक्षा दी थी और उसमें वह दो विषय में फेल हो गया था। उसके बाद उसने कोई पढ़ाई नहीं की।
उन्होंने बताया कि नामांकन के समय जो शिक्षा के प्रमाणपत्र दिए गए गए उनमें कक्षा दसवीं 31 साल के बाद 2013 में छत्तीसगढ़ से पास की हुई दिखाई गई जिसका सर्टिफिकेट जमा करवाया गया। उन्होंने बताया कि इस प्रमाणपत्र पर यह भी नहीं है कि छत्तीसगढ़ का बोर्ड कहां पर है। उन्होंने इस चुनाव को फर्जी प्रमाण पत्र के कारण रद्द करने की मांग की है और कहां कि यदि जिला प्रशासन इस ओर ध्यान नहीं देता तो वे कोर्ट का सहारा लेंगे।
प्रमाणपत्र फर्जी नहीं है। शिक्षा विभाग के अधिकारियों को यह प्रमाणपत्र दिखाया जा चुका है। मैं किसी भी जांच के लिए तैयार हूं।
रतन सिंह, सरपंच
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सरपंच पद के लिए पांच प्रत्याशी मैदान में थे जिसमें रतन सिंह कादियान ने जीत हासिल की है। दूसरे नंबर पर रहे प्रत्याशी मनीराम कादियान का आरोप है कि रतन सिंह ने जो दसवीं का सर्टिफिकेट जमा करवाया था वह फर्जी है। इस सर्टिफिकेट को छत्तीसगढ़ से लाया गया है।
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मनीराम का कहना है कि डीसी ने इस मामले में जांच संबंधित कागजात डीडीपीओ राजेश दुग्गल को भेज दिए हैं। मामले में आगे की जांच का जिम्मा जिला शिक्षा अधिकारी को सौंपा गया है।
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शिकायतकर्ता का कहना है कि उन्हें आरटीआई के माध्यम से पता चला कि रतन सिंह ने 1982 में जाखौली के हाईस्कूल से कक्षा आठवीं की परीक्षा दी थी और उसमें वह दो विषय में फेल हो गया था। उसके बाद उसने कोई पढ़ाई नहीं की।
उन्होंने बताया कि नामांकन के समय जो शिक्षा के प्रमाणपत्र दिए गए गए उनमें कक्षा दसवीं 31 साल के बाद 2013 में छत्तीसगढ़ से पास की हुई दिखाई गई जिसका सर्टिफिकेट जमा करवाया गया। उन्होंने बताया कि इस प्रमाणपत्र पर यह भी नहीं है कि छत्तीसगढ़ का बोर्ड कहां पर है। उन्होंने इस चुनाव को फर्जी प्रमाण पत्र के कारण रद्द करने की मांग की है और कहां कि यदि जिला प्रशासन इस ओर ध्यान नहीं देता तो वे कोर्ट का सहारा लेंगे।
प्रमाणपत्र फर्जी नहीं है। शिक्षा विभाग के अधिकारियों को यह प्रमाणपत्र दिखाया जा चुका है। मैं किसी भी जांच के लिए तैयार हूं।
रतन सिंह, सरपंच