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Kaithal News: राजौंद के बंदर बने सिकंदर, लोगों में डर का आलम
Fri, 24 Oct 2025 01:21 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
Updated Fri, 24 Oct 2025 01:21 AM IST
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23kht_21_23102025_24-मार्केट में बैठे बंदर।
संवाद न्यूज एजेंसी
राजौंद। राजौंद में बंदरों का आतंक बढ़ता जा रहा है। स्थानीय लोगों का कहना है कि बंदर यहां के ‘सिकंदर’ बन गए हैं। जब चाहते हैं कुछ भी उठाकर चल देते हैं। यदि कोई इन्हें रोकने की कोशिश करता है तो ये उन्हें काटने के दौड़ पड़ते हैं। उन्हें देखकर लोगों में डर का आलम रहता है।
कई लोग इनकी चपेट में आकर घायल भो हो चुके हैं। जब ये गुट में होते हैं तो इनकी हिम्मत ज्यादा बढ़ जाती है। यदि इन्हें रोकने की कोशिश करने पर ये हमला तक कर देते हैं।
नगर पालिका द्वारा हाल ही में बंदरों को पकड़कर जंगल में छोड़ने की कार्रवाई की गई थी, लेकिन यह पूरी तरह नाकाम साबित हुई है। नागरिकों का कहना है कि बंदर घरों और छतों पर घुसकर कपड़े फाड़ते हैं या उठा ले जाते हैं, रसोई में घुसकर खाने-पीने की चीजें चोरी करते हैं और रोकने पर काटने के लिए दौड़ते हैं।
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कुलबीर, राजेश शर्मा, रामफल, कुलदीप, अशोक, रमन, अमन, जतिन और जय देव जैसे नागरिकों ने बताया कि कई बार वे और उनके परिवार चोटिल भी हो चुके हैं। नागरिक यह भी बता रहे हैं कि नगर पालिका और जिला प्रशासन को कई बार समस्या से अवगत कराया गया, लेकिन अभी तक कोई ठोस समाधान नहीं निकला। नागरिकों ने प्रशासन से अपील की है कि जल्द से जल्द बंदरों की समस्या का स्थायी समाधान निकाला जाए, ताकि उनका रोजमर्रा का जीवन सुरक्षित और सहज बन सके।
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राजौंद। राजौंद में बंदरों का आतंक बढ़ता जा रहा है। स्थानीय लोगों का कहना है कि बंदर यहां के ‘सिकंदर’ बन गए हैं। जब चाहते हैं कुछ भी उठाकर चल देते हैं। यदि कोई इन्हें रोकने की कोशिश करता है तो ये उन्हें काटने के दौड़ पड़ते हैं। उन्हें देखकर लोगों में डर का आलम रहता है।
कई लोग इनकी चपेट में आकर घायल भो हो चुके हैं। जब ये गुट में होते हैं तो इनकी हिम्मत ज्यादा बढ़ जाती है। यदि इन्हें रोकने की कोशिश करने पर ये हमला तक कर देते हैं।
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नगर पालिका द्वारा हाल ही में बंदरों को पकड़कर जंगल में छोड़ने की कार्रवाई की गई थी, लेकिन यह पूरी तरह नाकाम साबित हुई है। नागरिकों का कहना है कि बंदर घरों और छतों पर घुसकर कपड़े फाड़ते हैं या उठा ले जाते हैं, रसोई में घुसकर खाने-पीने की चीजें चोरी करते हैं और रोकने पर काटने के लिए दौड़ते हैं।
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कुलबीर, राजेश शर्मा, रामफल, कुलदीप, अशोक, रमन, अमन, जतिन और जय देव जैसे नागरिकों ने बताया कि कई बार वे और उनके परिवार चोटिल भी हो चुके हैं। नागरिक यह भी बता रहे हैं कि नगर पालिका और जिला प्रशासन को कई बार समस्या से अवगत कराया गया, लेकिन अभी तक कोई ठोस समाधान नहीं निकला। नागरिकों ने प्रशासन से अपील की है कि जल्द से जल्द बंदरों की समस्या का स्थायी समाधान निकाला जाए, ताकि उनका रोजमर्रा का जीवन सुरक्षित और सहज बन सके।