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Kaithal News: स्कूलों, रिहायशी इलाकों में बंदरों के उत्पात से परेशानी
Sat, 27 Dec 2025 11:50 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
Updated Sat, 27 Dec 2025 11:50 PM IST
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संवाद न्यूज एजेंसी
कैथल/कलायत। शहर के सरकारी स्कूलों और रिहायशी इलाकों में बंदरों का आतंक चरम पर पहुंच गया है। कलायत े में राजकीय कन्या वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय सहित कई प्राइमरी स्कूलों में बंदरों के झुंडों ने डेरा डाल रखा है। उधर, कैथल में जिला बस अड्डा इन दिनों बंदरों के आतंक से जूझ रहा है। बंदर कभी यात्रियों के हाथ से सामान छीनकर भाग जाते हैं, तो कभी लोगों पर हमला कर उन्हें घायल कर देते हैं।
कलायत में स्कूल के प्रधानाचार्य राम गोपाल शर्मा और अन्य स्टाफ ने बताया कि बंदरों को भगाने की कोशिश करने पर वे हिंसक हो जाते हैं, जिससे छात्र और शिक्षक भयभीत हैं। बंदर न केवल बिजली की तारें और पानी की पाइपें तोड़ रहे हैं, बल्कि क्लासरूम और कंप्यूटर रूम तक में घुसकर हमला कर रहे हैं। सुरक्षा के लिए लगाई गई मंकी वायर भी बंदरों को रोकने में नाकाम साबित हो रही है। बंदर ऊंची इमारतों के सहारे सीधे स्कूल परिसर में कूद रहे हैं।
बंदरों से सिर्फ स्कूल ही नहीं बल्कि अनाज मंडी, महिला कॉलेज और इंदिरा कॉलोनी के लोग भी परेशान हैं। बंदर घरों की रसोइयों और फ्रिज तक पहुंच रहे हैं। स्थानीय निवासियों के अनुसार, पिछले कुछ सप्ताह में दर्जनों लोग बंदरों के हमलों में घायल हो चुके हैं और कुछ महीने पहले वार्ड 4 निवासी दीनानाथ की मौत भी हो चुकी है।
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कलायत नगर पालिका सचिव पवन शर्मा ने बताया कि नपा प्रशासन शहर में बेसहारा पशुओं की समस्या के समाधान में जुटा है। वर्तमान में गोवंश को गौशालाओं में स्थानांतरित किया जा रहा है। इसके बाद कुत्तों की बढ़ती संख्या पर नियंत्रण पाने के लिए विशेष मुहिम शुरू होगी। इसके साथ ही बंदरों को पकड़ने हेतु शीघ्र ही टेंडर प्रक्रिया पूरी कर अभियान चलाया जाएगा।
कई लोग हो चुके घायल ः रोडवेज बस अड्डे पर बंदरों का आतंक इतना बढ़ गया है कि वे कई यात्रियों को काट भी चुके हैं। दो दिन पहले एक महिला बच्चे के साथ जा रही थी, तभी बंदर ने बच्चे पर हमला कर दिया। यात्रियों की कुर्सियों पर भी बंदरों का कब्जा रहता है, जिसके कारण लोग डर के चलते खड़े होकर ही बसों का इंतजार करते हैं।
जिला बस अड्डा में बंदर दुकानों और यात्रियों से खाने-पीने का सामान छीनकर भाग जाते हैं। कई बार प्रशासन को शिकायतें देने के बावजूद समस्या जस की तस बनी हुई है।
करीब 18 हजार यात्री प्रतिदिन यहां से सफर करते हैं। यात्रियों की मांग है कि बंदरों को बस अड्डे से हटाया जाए ताकि सुरक्षित माहौल लौट सके।
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कैथल/कलायत। शहर के सरकारी स्कूलों और रिहायशी इलाकों में बंदरों का आतंक चरम पर पहुंच गया है। कलायत े में राजकीय कन्या वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय सहित कई प्राइमरी स्कूलों में बंदरों के झुंडों ने डेरा डाल रखा है। उधर, कैथल में जिला बस अड्डा इन दिनों बंदरों के आतंक से जूझ रहा है। बंदर कभी यात्रियों के हाथ से सामान छीनकर भाग जाते हैं, तो कभी लोगों पर हमला कर उन्हें घायल कर देते हैं।
कलायत में स्कूल के प्रधानाचार्य राम गोपाल शर्मा और अन्य स्टाफ ने बताया कि बंदरों को भगाने की कोशिश करने पर वे हिंसक हो जाते हैं, जिससे छात्र और शिक्षक भयभीत हैं। बंदर न केवल बिजली की तारें और पानी की पाइपें तोड़ रहे हैं, बल्कि क्लासरूम और कंप्यूटर रूम तक में घुसकर हमला कर रहे हैं। सुरक्षा के लिए लगाई गई मंकी वायर भी बंदरों को रोकने में नाकाम साबित हो रही है। बंदर ऊंची इमारतों के सहारे सीधे स्कूल परिसर में कूद रहे हैं।
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बंदरों से सिर्फ स्कूल ही नहीं बल्कि अनाज मंडी, महिला कॉलेज और इंदिरा कॉलोनी के लोग भी परेशान हैं। बंदर घरों की रसोइयों और फ्रिज तक पहुंच रहे हैं। स्थानीय निवासियों के अनुसार, पिछले कुछ सप्ताह में दर्जनों लोग बंदरों के हमलों में घायल हो चुके हैं और कुछ महीने पहले वार्ड 4 निवासी दीनानाथ की मौत भी हो चुकी है।
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कलायत नगर पालिका सचिव पवन शर्मा ने बताया कि नपा प्रशासन शहर में बेसहारा पशुओं की समस्या के समाधान में जुटा है। वर्तमान में गोवंश को गौशालाओं में स्थानांतरित किया जा रहा है। इसके बाद कुत्तों की बढ़ती संख्या पर नियंत्रण पाने के लिए विशेष मुहिम शुरू होगी। इसके साथ ही बंदरों को पकड़ने हेतु शीघ्र ही टेंडर प्रक्रिया पूरी कर अभियान चलाया जाएगा।
कई लोग हो चुके घायल ः रोडवेज बस अड्डे पर बंदरों का आतंक इतना बढ़ गया है कि वे कई यात्रियों को काट भी चुके हैं। दो दिन पहले एक महिला बच्चे के साथ जा रही थी, तभी बंदर ने बच्चे पर हमला कर दिया। यात्रियों की कुर्सियों पर भी बंदरों का कब्जा रहता है, जिसके कारण लोग डर के चलते खड़े होकर ही बसों का इंतजार करते हैं।
जिला बस अड्डा में बंदर दुकानों और यात्रियों से खाने-पीने का सामान छीनकर भाग जाते हैं। कई बार प्रशासन को शिकायतें देने के बावजूद समस्या जस की तस बनी हुई है।
करीब 18 हजार यात्री प्रतिदिन यहां से सफर करते हैं। यात्रियों की मांग है कि बंदरों को बस अड्डे से हटाया जाए ताकि सुरक्षित माहौल लौट सके।