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Kaithal News: मिलों की पीवी न दस्तावेज सत्यापन, मीलिंग कमेटी की मोहर की बाट
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कैथल की नई अनाजमंडी में धान की सफाई करते श्रमिक। संवाद
कैथल। धान सीजन की शुरुआत में ही जिले की अनाज मंडियों से राइस मिलर पूरी तरह नदारद हैं। मिलरों के नदारद रहने की वजह जिला मीलिंग कमेटी की बैठक में मंजूरी और फिजिकल वेरिफिकेशन प्रक्रिया में हो रही देरी है। जब तक कमेटी बैठक कर पंजीकृत मिलों को हरी झंडी नहीं देती, नियमानुसार तब तक मिलर मंडियों से धान खरीद नहीं कर सकते। इस प्रशासनिक लेटलतीफी का सीधा खामियाजा किसानों को भुगतना पड़ रहा है।
सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, जिले में गत सीजन में कुल 181 राइस मिल पंजीकृत थी लेकिन अब तक केवल 95 राइस मिलरों ने ही ऑनलाइन पंजीकरण कराया है। लगभग आधे मिलरों ने अभी तक पोर्टल पर आवेदन भी नहीं किया है। जिन 95 मिलरों ने पंजीकरण कराया है, उनके दस्तावेजों का सत्यापन होना अभी बाकी है।
ये है प्रक्रिया, देरी से खरीद प्रभावित
एजेंसी के अधिकारी के अनुसार दस्तावेजों की जांच के बाद एक कमेटी की तरफ से सभी पंजीकृत मिलों की फिजिकल वेरिफिकेशन (पीवी) की जाएगी। इसके बाद ही जिला खाद्य एवं पूर्ति नियंत्रक इन मिलों को मीलिंग (धान कुटाई) के लिए स्वीकृत करेंगे। उपायुक्त जिला मीलिंग कमेटी की चेयरमैन हैं। डीएफएससी, हैफेड और वेयरहाउस के डीएम भी इसमें शामिल होते हैं। यह कमेटी ही अंतिम रूप से तय करती है कि किस राइस मिल को धान कुटाई के लिए कितना कोटा (अलॉटमेंट) मिलेगा। साथ ही यह भी यही कमेटी तय करती है कि किस सरकारी खरीद एजेंसी को धान की मीलिंग के लिए कौन सा मिल आवंटित किया जाएगा। चूंकि इस पूरी प्रक्रिया में कई स्तरों पर जांच और मंजूरी शामिल है, इसलिए इसमें अभी काफी समय लगने की संभावना है।
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एजेंसियां अपने स्तर पर कर रहीं खरीद
मिलरों की अनुपस्थिति के कारण फिलहाल सरकारी एजेंसियां अपने स्तर पर ही धान की खरीद कर रही हैं। मिलों का आवंटन न होने से एजेंसियां उठान के लिए आश्वस्त नहीं हैं जिसके कारण वे बड़े पैमाने पर खरीद करने से कतरा रही हैं। यही वजह है कि खरीद रफ्तार नहीं पकड़ पा रही है। जिले की 13 प्रमुख अनाज मंडियों में से केवल तीन मंडियों में ही अब तक खरीद का खाता खुल पाया है जबकि शेष 10 मंडियां अभी भी मिलरों और सुचारू खरीद का इंतजार कर रही हैं। मंडियों में अब तक कुल 20,737 मीट्रिक टन पीआर धान की आवक हो चुकी है लेकिन प्रशासनिक अड़चनों के कारण इसमें से केवल 463 मीट्रिक टन धान की ही खरीद हो पाई है।
औपचारिकताएं जल्द पूरी करें : भाकियू
भाकियू चढूनी के युवा प्रदेशाध्यक्ष विक्रम कसाना ने कहा कि मंडियों में धान की आवक लगातार बढ़ रही है जिससे वहां पैर रखने तक की जगह नहीं बची है। उठान न होने से मंडियां पूरी तरह से जाम होने की कगार पर हैं। वहीं दूसरी ओर मौसम के बदलते मिजाज ने किसानों की धड़कनें बढ़ा दी हैं। प्रशासन और सरकार से मांग की है कि मीलिंग कमेटी की औपचारिकताएं जल्द पूरी की जाएं ताकि राइस मिलर मंडियों में आएं और खरीद व उठान में तेजी आ सके।
डीएफएससी वरिंद्र कुमार ने बताया कि राइस मिलर लगातार पंजीकरण करवा रहे हैं। दस्तावेज सत्यापन की प्रक्रिया भी साथ-साथ चल रही है। राइस मिलर जल्द ही मंडियों में खरीद को पहुंचेंगे।
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सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, जिले में गत सीजन में कुल 181 राइस मिल पंजीकृत थी लेकिन अब तक केवल 95 राइस मिलरों ने ही ऑनलाइन पंजीकरण कराया है। लगभग आधे मिलरों ने अभी तक पोर्टल पर आवेदन भी नहीं किया है। जिन 95 मिलरों ने पंजीकरण कराया है, उनके दस्तावेजों का सत्यापन होना अभी बाकी है।
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ये है प्रक्रिया, देरी से खरीद प्रभावित
एजेंसी के अधिकारी के अनुसार दस्तावेजों की जांच के बाद एक कमेटी की तरफ से सभी पंजीकृत मिलों की फिजिकल वेरिफिकेशन (पीवी) की जाएगी। इसके बाद ही जिला खाद्य एवं पूर्ति नियंत्रक इन मिलों को मीलिंग (धान कुटाई) के लिए स्वीकृत करेंगे। उपायुक्त जिला मीलिंग कमेटी की चेयरमैन हैं। डीएफएससी, हैफेड और वेयरहाउस के डीएम भी इसमें शामिल होते हैं। यह कमेटी ही अंतिम रूप से तय करती है कि किस राइस मिल को धान कुटाई के लिए कितना कोटा (अलॉटमेंट) मिलेगा। साथ ही यह भी यही कमेटी तय करती है कि किस सरकारी खरीद एजेंसी को धान की मीलिंग के लिए कौन सा मिल आवंटित किया जाएगा। चूंकि इस पूरी प्रक्रिया में कई स्तरों पर जांच और मंजूरी शामिल है, इसलिए इसमें अभी काफी समय लगने की संभावना है।
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एजेंसियां अपने स्तर पर कर रहीं खरीद
मिलरों की अनुपस्थिति के कारण फिलहाल सरकारी एजेंसियां अपने स्तर पर ही धान की खरीद कर रही हैं। मिलों का आवंटन न होने से एजेंसियां उठान के लिए आश्वस्त नहीं हैं जिसके कारण वे बड़े पैमाने पर खरीद करने से कतरा रही हैं। यही वजह है कि खरीद रफ्तार नहीं पकड़ पा रही है। जिले की 13 प्रमुख अनाज मंडियों में से केवल तीन मंडियों में ही अब तक खरीद का खाता खुल पाया है जबकि शेष 10 मंडियां अभी भी मिलरों और सुचारू खरीद का इंतजार कर रही हैं। मंडियों में अब तक कुल 20,737 मीट्रिक टन पीआर धान की आवक हो चुकी है लेकिन प्रशासनिक अड़चनों के कारण इसमें से केवल 463 मीट्रिक टन धान की ही खरीद हो पाई है।
औपचारिकताएं जल्द पूरी करें : भाकियू
भाकियू चढूनी के युवा प्रदेशाध्यक्ष विक्रम कसाना ने कहा कि मंडियों में धान की आवक लगातार बढ़ रही है जिससे वहां पैर रखने तक की जगह नहीं बची है। उठान न होने से मंडियां पूरी तरह से जाम होने की कगार पर हैं। वहीं दूसरी ओर मौसम के बदलते मिजाज ने किसानों की धड़कनें बढ़ा दी हैं। प्रशासन और सरकार से मांग की है कि मीलिंग कमेटी की औपचारिकताएं जल्द पूरी की जाएं ताकि राइस मिलर मंडियों में आएं और खरीद व उठान में तेजी आ सके।
डीएफएससी वरिंद्र कुमार ने बताया कि राइस मिलर लगातार पंजीकरण करवा रहे हैं। दस्तावेज सत्यापन की प्रक्रिया भी साथ-साथ चल रही है। राइस मिलर जल्द ही मंडियों में खरीद को पहुंचेंगे।

कैथल की नई अनाजमंडी में धान की सफाई करते श्रमिक। संवाद