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Kaithal News: कैकेयी के वरदानों ने पलट दी अयोध्या की खुशियां, राम वनगमन पर नम हुई आंखें

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Thu, 01 Oct 2026 11:40 PM IST
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Kaikeyi's boons turned Ayodhya's joy into sorrow; eyes welled up with tears at Rama's departure for the forest.
कार्यक्रम में प्रस्तुति देते हुए गायक। संवाद
कैथल। जय मां बाहरवाली रंगमंच क्लब की ओर से आयोजित रामलीला में बुधवार रात अयोध्या की खुशियां अचानक मातम में बदल गईं। मंच पर श्रीराम के राज्याभिषेक की तैयारियां चल रही थीं लेकिन रानी कैकेयी के दो वरदानों ने पूरी कहानी बदल दी। कैकेयी ने भरत के लिए राजगद्दी और श्रीराम के लिए 14 वर्ष का वनवास मांग लिया। श्रीराम ने पिता की आज्ञा को बिना किसी विरोध के स्वीकार किया तो राम वनगमन का दृश्य देखकर पंडाल में मौजूद श्रद्धालुओं की आंखें नम हो गईं।
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रामलीला का उद्घाटन समाजसेवी सुरेश सैनी, दुर्गा मिल्क डेयरी संचालक टिंकू सैनी और मुकेश सैनी की बेटी स्नेहा रानी ने रिबन काटकर किया। अतिथियों ने कहा कि रामलीला केवल धार्मिक कथा का मंचन नहीं है बल्कि इसके माध्यम से समाज को मर्यादा, कर्तव्य, त्याग और संस्कारों का संदेश भी मिलता है। मंचन में दिखाया गया कि राजा दशरथ श्रीराम को अयोध्या का युवराज बनाने का निर्णय लेते हैं। इसके बाद राजमहल से लेकर पूरी अयोध्या में खुशी का माहौल बन जाता है। राज्याभिषेक की तैयारियां शुरू हो जाती हैं और प्रजा में उत्साह दिखाई देता है।
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मंथरा के समझाने पर कैकेयी ने मांगे दो वरदान
इसी बीच मंथरा कैकेयी को भरत के भविष्य और राजगद्दी के लिए भड़काती है। उसके समझाने पर कैकेयी कोपभवन में चली जाती हैं। राजा दशरथ के पहुंचने पर वह उन्हें पूर्व में दिए गए दो वरदानों की याद दिलाती हैं। कैकेयी पहले वरदान में भरत के लिए राजगद्दी और दूसरे में श्रीराम के लिए 14 वर्ष का वनवास मांगती हैं। कैकेयी की मांग सुनकर राजा दशरथ के सामने बड़ा धर्मसंकट खड़ा हो जाता है। एक ओर उन्हें अपने पुत्र राम से बेहद प्रेम है तो दूसरी ओर वे कैकेयी को दिए वचन से बंधे हैं। कलाकारों ने दशरथ की व्यथा और भावनाओं को प्रभावी ढंग से मंच पर प्रस्तुत किया।
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पिता की आज्ञा मिलते ही वन जाने के लिए तैयार हुए राम
श्रीराम को वनवास की जानकारी मिलती है तो वे बिना किसी विरोध के पिता की आज्ञा स्वीकार कर लेते हैं। उनके चेहरे पर न नाराजगी दिखती है और न ही राजगद्दी छिनने का दुख। श्रीराम के धैर्य और त्याग के इस प्रसंग ने दर्शकों को भावुक कर दिया। वनगमन के दृश्य के दौरान पंडाल जय श्रीराम के जयघोष से गूंज उठा।

कलाकारों ने जीवंत किए पात्र
राजा दशरथ की भूमिका शिवलाल सैनी, श्रीराम की बिट्टू सैनी, लक्ष्मण की सुनील सैनी, कैकेयी की सन्नी सैनी, भरत की साहिल सैनी और मंथरा की भूमिका सुरेश सैनी ने निभाई। कलाकारों के संवाद और भावपूर्ण अभिनय पर दर्शकों ने तालियां बजाकर उत्साह बढ़ाया। इस दौरान जगदीश सैनी, सुरेश सैनी, राजीव सैनी, रामप्रकाश सैनी, पाला राम, भान सैनी, रवि सैनी, सुनील सैनी, बंटी बहल, संजू सैनी सहित क्लब के सदस्य और बड़ी संख्या में श्रद्धालु मौजूद रहे। आयोजकों ने कहा कि रामलीला के माध्यम से श्रीराम के आदर्शों और जीवन मूल्यों का संदेश समाज तक पहुंचाने का प्रयास जारी रहेगा।

कार्यक्रम में प्रस्तुति देते हुए गायक। संवाद

कार्यक्रम में प्रस्तुति देते हुए गायक। संवाद

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