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Kaithal News: मिलर्स की चुनौतियां पहुंचीं मंत्री तक, समाधान का मिला भरोसा

Sat, 26 Jul 2025 12:58 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल Updated Sat, 26 Jul 2025 12:58 AM IST
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Millers' challenges reached the minister, assurance of solution was received
संवाद न्यूज एजेंसी
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कैथल। हरियाणा राइस मिलर्स एंड डीलर्स एसोसिएशन ने आगामी धान सीजन और मिलर्स से जुड़ी विभिन्न मांगों को लेकर कृषि मंत्री श्याम सिंह राणा से मुलाकात की। मुलाकात के बाद एसोसिएशन के प्रदेशाध्यक्ष अमरजीत छाबड़ा ने कैथल में प्रेसवार्ता की और विस्तृत जानकारी दी।

छाबड़ा ने बताया कि मौजूदा धान फसल बीमा योजना (पैडी पॉलिसी) 25 साल पुरानी है, जो अब के हालातों में प्रासंगिक नहीं रही। पहले जहां हाथ से कटाई होती थी और परंपरागत बीज प्रयोग में लाए जाते थे, अब मंडियों में हाईब्रिड फसल आ रही है, जिससे ब्रोकन और डैमेज अधिक निकलता है। पॉलिसी के अनुसार जहां 67% चावल जमा करना अनिवार्य है, वहीं प्रैक्टिकली मात्र 64% ही निकल रहा है। वहीं चावल में 25% ब्रोकन पास किया जाता है जबकि 45-50% तक ब्रोकन निकल रहा है, जिससे मिलर्स को बड़ा घाटा उठाना पड़ रहा है।
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उन्होंने कहा कि 2024 में आईआईटी खड़गपुर द्वारा जो ट्रायल रिपोर्ट ली गई थी, वह अब तक सार्वजनिक नहीं की गई। साथ ही एफसीआई में स्पेस की कमी के चलते कई जिलों में सीएमआर कार्य देरी से शुरू हुआ, जिससे चावल समय पर जमा नहीं हो सका। इसी के चलते चावल जमा कराने की अंतिम तिथि 30 जून तक बढ़वाने की मांग की गई थी, जिसे केंद्र सरकार ने मान भी लिया।
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बोनस और कोटा निर्धारण की मांग

छाबड़ा ने कहा कि चावल डिलीवरी की चरणबद्ध व्यवस्था हो 60% डिलीवरी 31 मार्च तक, 70% अप्रैल अंत तक, 80% मई अंत तक, 100% डिलीवरी 30 जून तक हो।

उन्होंने यह भी कहा कि हरियाणा में समय पर चावल डिलीवरी पर सिर्फ 15 रुपये प्रति क्विंटल बोनस मिलता है, वह भी 15 मार्च तक चावल देने पर। जबकि छत्तीसगढ़ और मध्यप्रदेश में 80 से 150 रुपये तक का बोनस मिलता है और डिलीवरी की समय सीमा भी 30 जून तक रहती है। हरियाणा में देरी पर होल्डिंग चार्ज और ब्याज भी लगाया जाता है, जबकि पंजाब में 31 अगस्त तक समय मिलता है। इस मौके पर जिला राइस मिल एसोसिएशन के प्रधान तरसेम गोयल, प्रदेश कोषाध्यक्ष महाबीर सिंगला, नमन छाबड़ा मौजूद रहे।


आढ़तियों के लाइसेंस होंगे रिन्यू ः छाबड़ा

प्रदेशाध्यक्ष छाबड़ा ने बताया कि सरकार ने बूथों पर काम करने वाले करीब 3500 आढ़तियों के लाइसेंस रिन्यू करने का रास्ता साफ कर दिया है। जिन बूथों पर फसल रखने की जगह (फड़) मौजूद है, उनके लाइसेंस एक साथ रिन्यू किए जाएंगे। साथ ही, वर्ष 2012-13 में जिन 700 बूथों को लाइसेंस दिए गए थे लेकिन रिन्यू नहीं हो पाए, उन्हें भी अब एक बार में रिन्यू किया जाएगा।
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