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Kaithal News: मिड-डे मील कर्मियों ने मांगों के समर्थन में की नारेबाजी
Mon, 30 Oct 2023 01:43 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
Updated Mon, 30 Oct 2023 01:43 AM IST
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संवाद न्यूज एजेंसी
कैथल। मिड-डे मील कर्मियों ने वेतन बढ़ोतरी सहित अन्य मांगों के लिए लघु सचिवालय में धरना देकर प्रदर्शन किया। साथ ही मांगों के समर्थन में सरकार के खिलाफ नारेबाजी की। इसमें बाद विधायक लीला राम के निवास पर उनके प्रतिनिधि रामकुमार नैन को ज्ञापन सौंपा।
मिड-डे मील कर्मी सुदेश कमला ने बताया कि उन्हें केवल सात हजार मासिक दिहाड़ी दी जाती है, वह भी साल में केवल दस महीने टुकड़ों मे दी जाती है, वे इतनी महंगाई के चलते कैसे परिवारों का गुजारा करें, उनमें से ज्यादातर कुक विधवाएं हैं। कविता मुंदड़ी ने बताया कि हर रोज सरकारी स्कूल के बच्चों को ताजा खाना पकाकर परोसने वाली मिड-डे कर्मी कई कई महीनों तक दिहाड़ी से वंचित रहती है।
वे हर रोज बच्चों के लिए चार पांच घंटे आग के सामने आगे तपकर खाना तैयार करती है व फिर उन्हें परोसती है। अंत में बर्तन साफ कर पूरा रखरखाव करती है, इसके बावजूद भी उन्हें अपने मेहनताने व दिहाड़ी के लिए हर बार पापड़ बेलने पड़ते हैं। उन्होंने कहा कि उनका तीन चार महीनों का मानदेय बकाया पड़ा है। ऐसे में वह अपना घर परिवार कैसे चलाए। उन्होंने बकाया मानदेय का भुगतान करने के साथ बढ़ाने की मांग उठाई।
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कैथल। मिड-डे मील कर्मियों ने वेतन बढ़ोतरी सहित अन्य मांगों के लिए लघु सचिवालय में धरना देकर प्रदर्शन किया। साथ ही मांगों के समर्थन में सरकार के खिलाफ नारेबाजी की। इसमें बाद विधायक लीला राम के निवास पर उनके प्रतिनिधि रामकुमार नैन को ज्ञापन सौंपा।
मिड-डे मील कर्मी सुदेश कमला ने बताया कि उन्हें केवल सात हजार मासिक दिहाड़ी दी जाती है, वह भी साल में केवल दस महीने टुकड़ों मे दी जाती है, वे इतनी महंगाई के चलते कैसे परिवारों का गुजारा करें, उनमें से ज्यादातर कुक विधवाएं हैं। कविता मुंदड़ी ने बताया कि हर रोज सरकारी स्कूल के बच्चों को ताजा खाना पकाकर परोसने वाली मिड-डे कर्मी कई कई महीनों तक दिहाड़ी से वंचित रहती है।
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वे हर रोज बच्चों के लिए चार पांच घंटे आग के सामने आगे तपकर खाना तैयार करती है व फिर उन्हें परोसती है। अंत में बर्तन साफ कर पूरा रखरखाव करती है, इसके बावजूद भी उन्हें अपने मेहनताने व दिहाड़ी के लिए हर बार पापड़ बेलने पड़ते हैं। उन्होंने कहा कि उनका तीन चार महीनों का मानदेय बकाया पड़ा है। ऐसे में वह अपना घर परिवार कैसे चलाए। उन्होंने बकाया मानदेय का भुगतान करने के साथ बढ़ाने की मांग उठाई।
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