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Kaithal News: स्कूलों में नामांकन के लिए जनप्रतिनिधियों संग बैठक

Wed, 09 Apr 2025 12:31 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल Updated Wed, 09 Apr 2025 12:31 AM IST
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Meeting with public representatives for enrollment in schools
संवाद न्यूज एजेंसी
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कलायत। शून्य ड्राॅप आउट के लक्ष्य और सरकारी स्कूलों में शत प्रतिशत नामांकन के लिए मंगलवार को राजकीय माॅडल संस्कृति वरिष्ठ माध्यमिक स्कूल प्रधानाचार्य सुखदेव सिंह की अगुवाई शिक्षकोंं ने नगर पालिका जन प्रतिनिधियों से विशेष बैठक की।

इस दौरान सरकारी स्कूलों में दाखिला संख्या बढ़ाने के लिए नगरपालिका प्रधान अंकित जैलदार और पार्षदोंं की मौजूदगी में व्यापक विमर्श किया गया। अंकित जैलदार, नंबरदार संजय सिंगला और राजेश राणा ने कहा कि जन प्रतिनिधि शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए प्रयासरत हैं।
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उन्होंने कहा कि इस कवायद का मकसद विद्यार्थियों को सरकारी स्कूलों के प्रति आकर्षित करना है, ताकि हर बच्चा सरकारी स्कूलों के माध्यम से अपने सपनों को पूरा कर सके। प्रधानाचार्य ने कहा कि सरकारी स्कूल में सुशिक्षित मेहतनी-कर्मठ शिक्षक, पढ़ाई में कमजोर विद्यार्थियों के लिए निशुल्क अतिरिक्त कक्षा, 24 घंटे बिजली-पानी, पुस्तकालय, लैब, पहले से आठवीं कक्षा तक के बच्चों के लिए दोपहर भोजन, 12वीं पास करने के बाद छात्र-छात्राओं को प्लेसमेंट में सहायता की जाती हे।
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इसके अलावा सरकारी स्कूल में एससी, बीसी व बीपीएल विद्यार्थियोंं के लिए प्रोत्साहन राशि, ई-अधिगम योजना के तहत कक्षा 10वीं से 12वीं तक के विद्यार्थियों को निशुल्क टैबलेट फोन व इंटनेट, व्यवसायिक विषयों की स्वच्छ बैकिंग एवं टूरिज्म प्रयोगशाला और अन्य सुविधाएं उपलब्ध हैं। इसके साथ ही जल्द स्कूल को आकर्षक एवं भव्य भवन का तोहफा मिलने जा रहा है। शिक्षा को बढ़ावा देने के लक्ष्य को लेकर जिला में डीसी प्रीति की अगुवाई में प्रवेश उत्सव बड़ी धूमधाम से मनाया जा रहा है।

मुख्य ध्येय ऐसी व्यवस्था बनाना है जिससे ज्यादा से ज्यादा बच्चों का सरकारी स्कूलों में प्रवेश हो। वे पढ़ लिखकर आगे बढ़ सकें। कोई भी बच्चा शिक्षा से वंचित न रहे। इसके लिए पूरा रूट प्लान तैयार किया गया है। नगर पालिका मेंं प्रवेश उत्सव को लेकर जन प्रतिनिधियों से बैठक करने पहुंचे शिक्षकों के साथ सिंणद गांव के 65 वर्षीय बुजुर्ग रणधीर नंबरदार ने अतीत की शिक्षा पर चर्चा की।


उन्होंने कहा कि देश की आजादी के बाद शिक्षा व्यवस्था को मजबूती देना बड़ी चुनौती रही। उस समय कच्ची जमीन पर बैठक बच्चे चौपालों के आंगन में पढ़ाई करते थे। उन्होंने कहा कि पहले अभिभावक भी शिक्षा के प्रति जागरूक नहीं थे, लेकिन अब शिक्षा के महत्व को हर कोई समझने लगा है।
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