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खानापूर्ति में निपट गया जिला परिषद के सत्र का पहला दिन
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विधानसभा व लोकसभा की तर्ज पर जिला परिषद के सत्र बुलाए जाने की वीरवार को शुरुआत हुई। जिला परिषद के दो दिवसीय सत्र का पहला दिन खानापूर्ति कर महज दो मुद्दों पर चर्चा के बाद घंटे भर में निपटा दिया गया। परिषद की सीईओ सदस्यों द्वारा काम न होने के सवाल उठाए जाने के बाद महज पंद्रह मिनट बाद मोबाइल पर बात करते हुए सत्र से निकल गईं। डिप्टी सीईओ जसबीर सिंह ने ही सदस्यों को कुछ आश्वासन दिया। आज फिर दूसरे दिन सदस्यों को चर्चा के लिए बुलाया गया है।
वीरवार को जिला परिषद के सत्र की शुरुआत सुबह 11 बजकर 24 मिनट पर हुई। 21 में से 11 वार्डों के सदस्य भाग लेने पहुंचे। ब्लॉक समितियों के चेयरमैनों सहित पांच गांवों के सरपंचों को भी बुलाया गया था। सत्र की शुरुआत सीईओ कमलप्रीत कौर ने की और कहा कि सरकार का निर्णय है कि सामान्य बैठकों में अच्छे से चर्चा नहीं हो पाती। इसलिए यह दो दिवसीय सत्र बुलाया गया है। सदस्य आपसी मुद्दों पर चर्चा करें। इसके बाद सदस्य रवि तारांवाली ने सवाल उठाया कि जब हाउस द्वारा पारित प्रस्तावों पर काम नहीं होता तो बैठक का क्या औचित्य है। 90 लाख रुपये की ग्रांट पिछली बैठक में वितरित करने का अधिकार चेयरमैन को दिया गया था। बीडीपीओ कार्यालयों से खर्च प्रमाण पत्र ही नहीं आते तो इस सदन को दी गई शक्तियों का क्या औचित्य है। इस पर सीईओ ने कहा कि सत्र में आप सवाल करने के लिए एकत्रित नहीं हुए हैं। आप चर्चा करें। इसके बाद भी रवि तारांवाली, चेयरपर्सन ने सवाल किए तो सीईओ ने कहा कि प्रधान की ओर से सूची ही पूरी नहीं उपलब्ध हुई है।
कर्मचारियों ने दी जानकारी, सदस्य बोले-कुछ समझ नहीं आया-वित्त आयोग के लिए जिला विकास योजना व स्वच्छ भारत मिशन की राशि खर्च करने के मुद्दे पर चर्चा के लिए दोनों योजनाओं के कर्मचारी जानकारी देकर बैठ गए। वहां उपस्थित सदस्य बोले कि उन्हें कुछ समझ नहीं आया। ऐसी योजनाओं का क्या लाभ? बाद में कर्मचारियों ने फिर से अपनी बात रखी। इस पर सीईओ बोलीं कि कुछ गाइडलाइन अंग्रेजी में आती हैं। उन्हें लागू करना पड़ता है।
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शराब टैक्स से आने वाली ग्रांट क्यों खर्च नहीं की जा रही?
सदस्य रति राम ने शराब टेक्स की 3 करोड़ रुपये की राशि खर्च न करने पर सवाल उठाए और कहा कि जब सदन पारित कर देता है तो अधिकारी क्यों नहीं उस राशि को खर्च कर रहे? इसी बीच सीईओ मोबाइल पर बात करते हुए बैठक से निकल गईं। बाद में सदस्योें कहा कि साढ़े चार साल में बीडीपीओ से आज तक यूसी नहीं मिले हैं। इस पर डिप्टी सीईओ ने यूसी के लिए मंगलवार तक का समय निर्धारित करने पर सहमति दी। वहीं बैठक में चेयरमैन बंसी लाल, नेत्रपाल, सरपंच पाई ने भी सार्वजनिक शौचालयों की मरम्मत, ग्रांट को जनहित में खर्च करने, सोख्ता गड्ढे बनाए जाने जैसे महत्वपूर्ण सुझाव दिए।
ना सैनिटाइजर, ना सोशल डिस्टेंस- सत्र में अधिकारियों की कुर्सी तो आवश्यक दूरी पर थीं, लेकिन जिन सदस्यों को जिले के महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा करनी थीं, उनमें सोशल डिस्टेंसिंग का ध्यान नहीं रखा गया? ना ही सत्र में सैनिटाइजर की व्यवस्था नजर आई।
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वीरवार को जिला परिषद के सत्र की शुरुआत सुबह 11 बजकर 24 मिनट पर हुई। 21 में से 11 वार्डों के सदस्य भाग लेने पहुंचे। ब्लॉक समितियों के चेयरमैनों सहित पांच गांवों के सरपंचों को भी बुलाया गया था। सत्र की शुरुआत सीईओ कमलप्रीत कौर ने की और कहा कि सरकार का निर्णय है कि सामान्य बैठकों में अच्छे से चर्चा नहीं हो पाती। इसलिए यह दो दिवसीय सत्र बुलाया गया है। सदस्य आपसी मुद्दों पर चर्चा करें। इसके बाद सदस्य रवि तारांवाली ने सवाल उठाया कि जब हाउस द्वारा पारित प्रस्तावों पर काम नहीं होता तो बैठक का क्या औचित्य है। 90 लाख रुपये की ग्रांट पिछली बैठक में वितरित करने का अधिकार चेयरमैन को दिया गया था। बीडीपीओ कार्यालयों से खर्च प्रमाण पत्र ही नहीं आते तो इस सदन को दी गई शक्तियों का क्या औचित्य है। इस पर सीईओ ने कहा कि सत्र में आप सवाल करने के लिए एकत्रित नहीं हुए हैं। आप चर्चा करें। इसके बाद भी रवि तारांवाली, चेयरपर्सन ने सवाल किए तो सीईओ ने कहा कि प्रधान की ओर से सूची ही पूरी नहीं उपलब्ध हुई है।
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कर्मचारियों ने दी जानकारी, सदस्य बोले-कुछ समझ नहीं आया-वित्त आयोग के लिए जिला विकास योजना व स्वच्छ भारत मिशन की राशि खर्च करने के मुद्दे पर चर्चा के लिए दोनों योजनाओं के कर्मचारी जानकारी देकर बैठ गए। वहां उपस्थित सदस्य बोले कि उन्हें कुछ समझ नहीं आया। ऐसी योजनाओं का क्या लाभ? बाद में कर्मचारियों ने फिर से अपनी बात रखी। इस पर सीईओ बोलीं कि कुछ गाइडलाइन अंग्रेजी में आती हैं। उन्हें लागू करना पड़ता है।
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शराब टैक्स से आने वाली ग्रांट क्यों खर्च नहीं की जा रही?
सदस्य रति राम ने शराब टेक्स की 3 करोड़ रुपये की राशि खर्च न करने पर सवाल उठाए और कहा कि जब सदन पारित कर देता है तो अधिकारी क्यों नहीं उस राशि को खर्च कर रहे? इसी बीच सीईओ मोबाइल पर बात करते हुए बैठक से निकल गईं। बाद में सदस्योें कहा कि साढ़े चार साल में बीडीपीओ से आज तक यूसी नहीं मिले हैं। इस पर डिप्टी सीईओ ने यूसी के लिए मंगलवार तक का समय निर्धारित करने पर सहमति दी। वहीं बैठक में चेयरमैन बंसी लाल, नेत्रपाल, सरपंच पाई ने भी सार्वजनिक शौचालयों की मरम्मत, ग्रांट को जनहित में खर्च करने, सोख्ता गड्ढे बनाए जाने जैसे महत्वपूर्ण सुझाव दिए।
ना सैनिटाइजर, ना सोशल डिस्टेंस- सत्र में अधिकारियों की कुर्सी तो आवश्यक दूरी पर थीं, लेकिन जिन सदस्यों को जिले के महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा करनी थीं, उनमें सोशल डिस्टेंसिंग का ध्यान नहीं रखा गया? ना ही सत्र में सैनिटाइजर की व्यवस्था नजर आई।