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आर्थिक तंगी में गुजारा कर रहा है शहीद का परिवार
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गांव खेड़ी शेरखां में शहीद सैनिक आश्रित परिवार को सरकारी सुविधाओं का आज भी इंतजार है। 16 साल बाद परिवार आर्थिक तंगी में गुजर बसर कर रहा है।
गांव से मिली जानकारी के अनसुार भारतीय सेना में तैनात जांबाज सैनिक कृष्ण कुमार मलोदिए 8 अक्टूबर 2005 को जम्मू कश्मीर के तंगदार इलाके में बंकर ढह जाने से शहीद हो गए थे। राजकीय सम्मान के साथ उन्हें गांव में अंतिम विदाई दी गई थी। इस दौरान सेना अधिकारी, कलायत की तत्कालीन विधायक गीता भुक्कल, जिला और कलायत प्रशासन के साथ-साथ 36 बिरादरी के लोगों ने शहीद को भावभीनी श्रद्धांजली थी। गांव के मुख्य मार्ग पर शहीद कृष्ण कुमार मलोदिए की स्मृति में शहीद स्मारक बनाया गया है। प्रतिमा का अनावरण तत्कालीन विधायक गीता भुक्कल ने आजादी दिवस उपलक्ष्य में 15 अगस्त 2008 को शहीद की प्रतिमा का अनावरण किया था। कृष्ण मलोदिए द्वारा वतन पर जान न्यौछावर करने के उनकी पत्नी बिमला देवी के कंधों पर 2 मासूम लडक़ों और 2 लड़कियों के लालन-पालन परवरिश की जिम्मेवारी आ गई। शहीद के रूप में जो सुविधाएं सैनिक परिवार को मिलनी थीं, वे मिल नहीं पाई। परिवार के अनुसार बिमला देवी ने मेहनत-मजदूरी से परिवार का लाल पालन चुनौतियों के भरे दौर में किया। आज भी शहीद का परिवार संसाधनों के अभाव में पुराने भवन में रह रहा है। दो लड़कियों के हाथ पीले करने के साथ-साथ बेटे का विवाह भी सैनिक की पत्नी ने पाई-पाई जोडक़र किया। उन्हें रंज है कि यदि उम्मीद के अनुरूप शहीद परिवार को आर्थिक सहायता मिलती तो परिवार को ज्यादा संकटों का सामना न करना पड़ता। उन्होंने भाजपा द्वारा आजादी माह में शुरू की गई तिरंगा यात्रा के मद्देनजर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री मनोहर लाल से पुन: परिवार को शहीद के रूप में मिलने वाली सुविधाएं उपलब्ध करवाने का आग्रह किया है।
खेड़ी शेरखां गांव में शहीद कृष्ण मलोदिए के स्मारक को गांव से जोडऩे वाले मार्ग पर कई-कई फुट बरसाती पानी जमा है। साफ-सफाई के भी उम्मीद के अनुरूप प्रबंध नहीं हैं।
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गांव से मिली जानकारी के अनसुार भारतीय सेना में तैनात जांबाज सैनिक कृष्ण कुमार मलोदिए 8 अक्टूबर 2005 को जम्मू कश्मीर के तंगदार इलाके में बंकर ढह जाने से शहीद हो गए थे। राजकीय सम्मान के साथ उन्हें गांव में अंतिम विदाई दी गई थी। इस दौरान सेना अधिकारी, कलायत की तत्कालीन विधायक गीता भुक्कल, जिला और कलायत प्रशासन के साथ-साथ 36 बिरादरी के लोगों ने शहीद को भावभीनी श्रद्धांजली थी। गांव के मुख्य मार्ग पर शहीद कृष्ण कुमार मलोदिए की स्मृति में शहीद स्मारक बनाया गया है। प्रतिमा का अनावरण तत्कालीन विधायक गीता भुक्कल ने आजादी दिवस उपलक्ष्य में 15 अगस्त 2008 को शहीद की प्रतिमा का अनावरण किया था। कृष्ण मलोदिए द्वारा वतन पर जान न्यौछावर करने के उनकी पत्नी बिमला देवी के कंधों पर 2 मासूम लडक़ों और 2 लड़कियों के लालन-पालन परवरिश की जिम्मेवारी आ गई। शहीद के रूप में जो सुविधाएं सैनिक परिवार को मिलनी थीं, वे मिल नहीं पाई। परिवार के अनुसार बिमला देवी ने मेहनत-मजदूरी से परिवार का लाल पालन चुनौतियों के भरे दौर में किया। आज भी शहीद का परिवार संसाधनों के अभाव में पुराने भवन में रह रहा है। दो लड़कियों के हाथ पीले करने के साथ-साथ बेटे का विवाह भी सैनिक की पत्नी ने पाई-पाई जोडक़र किया। उन्हें रंज है कि यदि उम्मीद के अनुरूप शहीद परिवार को आर्थिक सहायता मिलती तो परिवार को ज्यादा संकटों का सामना न करना पड़ता। उन्होंने भाजपा द्वारा आजादी माह में शुरू की गई तिरंगा यात्रा के मद्देनजर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री मनोहर लाल से पुन: परिवार को शहीद के रूप में मिलने वाली सुविधाएं उपलब्ध करवाने का आग्रह किया है।
खेड़ी शेरखां गांव में शहीद कृष्ण मलोदिए के स्मारक को गांव से जोडऩे वाले मार्ग पर कई-कई फुट बरसाती पानी जमा है। साफ-सफाई के भी उम्मीद के अनुरूप प्रबंध नहीं हैं।
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