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Kaithal News: आमदनी का साधन बनाएं पराली प्रबंधन को ः डीसी
Sun, 12 Oct 2025 12:02 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
Updated Sun, 12 Oct 2025 12:02 AM IST
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संवाद न्यूज एजेंसी
कैथल। उपायुक्त प्रीति ने किसानों का आह्वान करते हुए कहा कि फसल अवशेषों को आग न लगाए। इसके बजाय इसका उचित प्रबंधन कर अपनी आमदनी बढ़ाएं। साथ ही अन्य किसानों को जागरूक भी करें।
डीसी ने कहा कि धान कटाई का सीजन चल रहा है। इस समय फसल अवशेषों को जलाने की घटनाएं होती हैं। जिला प्रशासन इस विषय पर गंभीरता से कार्य कर रहा है। कृषि विभाग के साथ-साथ अन्य विभाग भी निगरानी रख रहे हैं।
जिला प्रशासन के अधिकारी गांव-गांव जाकर किसानों को जागरूक कर रहे हैं और सरकार द्वारा उपलब्ध करवाई जा रही प्रोत्साहन राशि व अन्य योजनाओं के बारे में जानकारी दे रहे हैं। डीसी प्रीति ने चेतावनी दी कि जो किसान पराली जलाएंगे, उनके खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने बताया कि पराली जलाने से प्रकृति, जमीन और मानव जीवन पर गंभीर व प्रतिकूल प्रभाव पड़ते हैं। इससे उर्वरा शक्ति घटती है और प्राकृतिक प्रदूषण के कारण मनुष्य अनेक जानलेवा बीमारियों का शिकार हो सकता है। किसान किसी भी स्थिति में पराली न जलाएं, बल्कि अवशेष प्रबंधन के माध्यम से जमीन की उर्वरा शक्ति बचाएं।
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कृषि एवं किसान कल्याण विभाग के उपनिदेशक डॉ. सुरेंद्र सिंह ने कहा कि किसानों को जागरूक किया जा रहा है और अधिकारी शिविरों से जानकारी दे रहे हैं। एसडीओ सतीश नारा ने मंगलवार को गांव बाबालदाना, मानस, सिरटा, खानपुर आदि गांवों में जाकर ग्रामीणों को पराली प्रबंधन के बारे में जागरूक किया।
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कैथल। उपायुक्त प्रीति ने किसानों का आह्वान करते हुए कहा कि फसल अवशेषों को आग न लगाए। इसके बजाय इसका उचित प्रबंधन कर अपनी आमदनी बढ़ाएं। साथ ही अन्य किसानों को जागरूक भी करें।
डीसी ने कहा कि धान कटाई का सीजन चल रहा है। इस समय फसल अवशेषों को जलाने की घटनाएं होती हैं। जिला प्रशासन इस विषय पर गंभीरता से कार्य कर रहा है। कृषि विभाग के साथ-साथ अन्य विभाग भी निगरानी रख रहे हैं।
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जिला प्रशासन के अधिकारी गांव-गांव जाकर किसानों को जागरूक कर रहे हैं और सरकार द्वारा उपलब्ध करवाई जा रही प्रोत्साहन राशि व अन्य योजनाओं के बारे में जानकारी दे रहे हैं। डीसी प्रीति ने चेतावनी दी कि जो किसान पराली जलाएंगे, उनके खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने बताया कि पराली जलाने से प्रकृति, जमीन और मानव जीवन पर गंभीर व प्रतिकूल प्रभाव पड़ते हैं। इससे उर्वरा शक्ति घटती है और प्राकृतिक प्रदूषण के कारण मनुष्य अनेक जानलेवा बीमारियों का शिकार हो सकता है। किसान किसी भी स्थिति में पराली न जलाएं, बल्कि अवशेष प्रबंधन के माध्यम से जमीन की उर्वरा शक्ति बचाएं।
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कृषि एवं किसान कल्याण विभाग के उपनिदेशक डॉ. सुरेंद्र सिंह ने कहा कि किसानों को जागरूक किया जा रहा है और अधिकारी शिविरों से जानकारी दे रहे हैं। एसडीओ सतीश नारा ने मंगलवार को गांव बाबालदाना, मानस, सिरटा, खानपुर आदि गांवों में जाकर ग्रामीणों को पराली प्रबंधन के बारे में जागरूक किया।