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मकर संक्रांति आध्यात्मिक शुद्धि का अवसर : महंत अवध बिहारी
Tue, 14 Jan 2025 01:16 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
Updated Tue, 14 Jan 2025 01:16 AM IST
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सीवन। मकर संक्रांति पर्व के महत्व पर प्रकाश डालते हुए महंत अवध बिहारी ने कहा कि मकर संक्रांति हिंदू धर्म का प्रमुख पर्व है, जो सूर्य के मकर राशि में प्रवेश करने पर मनाया जाता है। इस दिन से शुभ कार्यों की शुरुआत होती है। इसे प्रकृति, कृषि और आध्यात्मिकता का प्रतीक माना जाता है।
महंत अवध बिहारी ने बताया कि यह पर्व ऋतु परिवर्तन और नई ऊर्जा का संदेश देता है। उन्होंने कहा कि मकर संक्रांति पर गंगा, यमुना और अन्य पवित्र नदियों में स्नान का विशेष महत्व है। ऐसा माना जाता है कि इस दिन स्नान और दान करने से पुण्य की प्राप्ति होती है। तिल, गुड़, खिचड़ी और पतंगबाजी इस पर्व की खास पहचान हैं, जो सामाजिक और सांस्कृतिक एकता का संदेश देते हैं। महंत ने कहा कि मकर संक्रांति केवल धार्मिक नहीं, बल्कि वैज्ञानिक दृष्टिकोण से भी महत्वपूर्ण है। यह दिन सूर्य उत्तरायण होता है, जिससे दिन बड़े और रातें छोटी होने लगती हैं। उन्होंने इस पर्व को सादगी और भक्ति से मनाने की अपील की और कहा कि मकर संक्रांति न केवल आध्यात्मिक शुद्धि का अवसर है, बल्कि समाज में सद्भाव और एकता को मजबूत करने का भी माध्यम है। संवाद
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महंत अवध बिहारी ने बताया कि यह पर्व ऋतु परिवर्तन और नई ऊर्जा का संदेश देता है। उन्होंने कहा कि मकर संक्रांति पर गंगा, यमुना और अन्य पवित्र नदियों में स्नान का विशेष महत्व है। ऐसा माना जाता है कि इस दिन स्नान और दान करने से पुण्य की प्राप्ति होती है। तिल, गुड़, खिचड़ी और पतंगबाजी इस पर्व की खास पहचान हैं, जो सामाजिक और सांस्कृतिक एकता का संदेश देते हैं। महंत ने कहा कि मकर संक्रांति केवल धार्मिक नहीं, बल्कि वैज्ञानिक दृष्टिकोण से भी महत्वपूर्ण है। यह दिन सूर्य उत्तरायण होता है, जिससे दिन बड़े और रातें छोटी होने लगती हैं। उन्होंने इस पर्व को सादगी और भक्ति से मनाने की अपील की और कहा कि मकर संक्रांति न केवल आध्यात्मिक शुद्धि का अवसर है, बल्कि समाज में सद्भाव और एकता को मजबूत करने का भी माध्यम है। संवाद
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