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Kaithal News: कलायत विधानसभा ः हर चुनाव में चुना गया नया चेहरा
Sat, 31 Aug 2024 05:28 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
Updated Sat, 31 Aug 2024 05:28 AM IST
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निशीकांत शर्मा
कलायत। कलायत विधानसभा क्षेत्र हरियाणा राज्य के 90 विधानसभा निर्वाचन क्षेत्रों में से एक है। यह एक सामान्य श्रेणी की विधानसभा सीट है। इस विधानसभा में हर चुनाव में नया चेहरा यहां के मतदाताओं ने चुना है।
कलायत कैथल जिले में स्थित है और कुरुक्षेत्र संसदीय सीट के नौ विधानसभा क्षेत्रों में से एक है। कलायत विधानसभा सीट हरियाणा बनने के बाद 1967 में आरक्षित सीट के रूप में अस्तित्व में आई जो 2008 में हुए परिसीमन में सामान्य श्रेणी में शामिल हुई। इससे पहले भी पैप्सू राज्य में भी कलायत विधानसभा 1951 के चुनाव में आरक्षित और 1954 के चुनाव में सामान्य श्रेणी में शामिल रही।
कलायत विधानसभा सीट से जुड़े की रोचक तथ्य हैं कि 1968 के मध्यवर्ती चुनाव सहित कुल हुए 13 चुनावों में इस सीट पर कोई प्रत्याशी दूसरी बार जनप्रतिनिधि नहीं बन पाया। हर चुनाव में लोगों ने नए चेहरे को ही चुना है। हरियाणा बनने के बाद इस सीट पर कांग्रेस पार्टी का वर्चस्व रहा और 1977 के चुनाव के बाद इस सीट पर देवीलाल परिवार का कब्जा हो गया जो लगातार चार चुनाव तक बरकरार रहा। 1996 के चुनाव में कलायत सीट हविपा के कब्जे में चली गई और उसके बाद 2000 व 2009 के चुनाव में देवीलाल परिवार का इस सीट पर फिर से कब्जा रहा।
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बांगर का जाट लैंड है कलायत विधानसभा सीट ः कलायत विधानसभा सीट जाट बहुल सीट है और सामान्य श्रेणी में आने के बाद जाट उम्मीदवार ही चुनाव में जीते हैं। विधानसभा में कुल दो लाख 10 हजार मतदाता हैं और जिनमें से करीब 90 हजार जाट मतदाता हैं।
विधानसभा का लगभग 95 प्रतिशत हिस्सा ग्रामीण क्षेत्र में है और केवल पांच प्रतिशत मतदाता ही शहरी क्षेत्र में आते हैं। इस बार के चुनाव में मुख्य मुकाबला कांग्रेस व भाजपा के बीच ही होना तय है। दोनों ही पार्टियों में लगभग 50 प्रत्याशियों ने टिकट के लिए आवेदन किया है। देखना है कि इस बार फिर से कांग्रेस या भाजपा महिला प्रत्याशी पर दाव खेलती है या नहीं। दोनों की पार्टियों की महिला प्रत्याशी टिकट की दौड़ में काफी आगे चल रही हैं इस उम्मीद के साथ की इस सीट पर महिला प्रत्याशी की जीत सुनिश्चित है।
कांग्रेस-भाजपा ने एक-एक बार महिला को बनाया प्रत्याशी
इस सीट पर रोचक तथ्य यह भी रहा है कि सभी राजनीतिक पार्टियों में से कांग्रेस और भाजपा ने एक-एक बार महिला प्रत्याशी पर दांव खेला और दोनों ही बार महिला प्रत्याशी अपने पुरुष प्रत्याशियों पर भारी पड़ी। वर्ष 2005 के चुनाव में कांग्रेस पार्टी ने गीता भुक्कल को टिकट देकर चुनावी समर में उतारा और उन्होंने इनेलो के प्रीतम सिंह को हरा कर जीत दर्ज की थी। 2019 के चुनाव में भाजपा ने महिला प्रत्याशी कमलेश ढांडा पर दाव खेला और उन्होंने भी कांग्रेस पार्टी के दिग्गज जयप्रकाश को हराया। कमलेश ढांडा ने 53,805 वोटों के साथ जीत हासिल की थी। दूसरे स्थान पर कांग्रेस के जय प्रकाश रहे थे। कमलेश ढांडा को प्रदेश सरकार में राज्यमंत्री का दर्जा भी हासिल हुआ था।
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कलायत। कलायत विधानसभा क्षेत्र हरियाणा राज्य के 90 विधानसभा निर्वाचन क्षेत्रों में से एक है। यह एक सामान्य श्रेणी की विधानसभा सीट है। इस विधानसभा में हर चुनाव में नया चेहरा यहां के मतदाताओं ने चुना है।
कलायत कैथल जिले में स्थित है और कुरुक्षेत्र संसदीय सीट के नौ विधानसभा क्षेत्रों में से एक है। कलायत विधानसभा सीट हरियाणा बनने के बाद 1967 में आरक्षित सीट के रूप में अस्तित्व में आई जो 2008 में हुए परिसीमन में सामान्य श्रेणी में शामिल हुई। इससे पहले भी पैप्सू राज्य में भी कलायत विधानसभा 1951 के चुनाव में आरक्षित और 1954 के चुनाव में सामान्य श्रेणी में शामिल रही।
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कलायत विधानसभा सीट से जुड़े की रोचक तथ्य हैं कि 1968 के मध्यवर्ती चुनाव सहित कुल हुए 13 चुनावों में इस सीट पर कोई प्रत्याशी दूसरी बार जनप्रतिनिधि नहीं बन पाया। हर चुनाव में लोगों ने नए चेहरे को ही चुना है। हरियाणा बनने के बाद इस सीट पर कांग्रेस पार्टी का वर्चस्व रहा और 1977 के चुनाव के बाद इस सीट पर देवीलाल परिवार का कब्जा हो गया जो लगातार चार चुनाव तक बरकरार रहा। 1996 के चुनाव में कलायत सीट हविपा के कब्जे में चली गई और उसके बाद 2000 व 2009 के चुनाव में देवीलाल परिवार का इस सीट पर फिर से कब्जा रहा।
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बांगर का जाट लैंड है कलायत विधानसभा सीट ः कलायत विधानसभा सीट जाट बहुल सीट है और सामान्य श्रेणी में आने के बाद जाट उम्मीदवार ही चुनाव में जीते हैं। विधानसभा में कुल दो लाख 10 हजार मतदाता हैं और जिनमें से करीब 90 हजार जाट मतदाता हैं।
विधानसभा का लगभग 95 प्रतिशत हिस्सा ग्रामीण क्षेत्र में है और केवल पांच प्रतिशत मतदाता ही शहरी क्षेत्र में आते हैं। इस बार के चुनाव में मुख्य मुकाबला कांग्रेस व भाजपा के बीच ही होना तय है। दोनों ही पार्टियों में लगभग 50 प्रत्याशियों ने टिकट के लिए आवेदन किया है। देखना है कि इस बार फिर से कांग्रेस या भाजपा महिला प्रत्याशी पर दाव खेलती है या नहीं। दोनों की पार्टियों की महिला प्रत्याशी टिकट की दौड़ में काफी आगे चल रही हैं इस उम्मीद के साथ की इस सीट पर महिला प्रत्याशी की जीत सुनिश्चित है।
कांग्रेस-भाजपा ने एक-एक बार महिला को बनाया प्रत्याशी
इस सीट पर रोचक तथ्य यह भी रहा है कि सभी राजनीतिक पार्टियों में से कांग्रेस और भाजपा ने एक-एक बार महिला प्रत्याशी पर दांव खेला और दोनों ही बार महिला प्रत्याशी अपने पुरुष प्रत्याशियों पर भारी पड़ी। वर्ष 2005 के चुनाव में कांग्रेस पार्टी ने गीता भुक्कल को टिकट देकर चुनावी समर में उतारा और उन्होंने इनेलो के प्रीतम सिंह को हरा कर जीत दर्ज की थी। 2019 के चुनाव में भाजपा ने महिला प्रत्याशी कमलेश ढांडा पर दाव खेला और उन्होंने भी कांग्रेस पार्टी के दिग्गज जयप्रकाश को हराया। कमलेश ढांडा ने 53,805 वोटों के साथ जीत हासिल की थी। दूसरे स्थान पर कांग्रेस के जय प्रकाश रहे थे। कमलेश ढांडा को प्रदेश सरकार में राज्यमंत्री का दर्जा भी हासिल हुआ था।