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Kaithal News: कैथल डिपो को बसों में ई-टिकटिंग को लेकर अभी करना होगा इंतजार
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12-कैथल। सामान्य बस अड्डा परिसर।
- फोटो : Kaithal
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कैथल। रोडवेज डिपो को बसों में ई-टिकटिंग को लेकर अभी चालकों-परिचालकों को और यात्रियों को इंतजार करना होगा। शुरुआती चरण में चंडीगढ़, सीएम सिटी करनाल, सोनीपत और भिवानी में पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर इसे लागू किया गया है,
लेकिन कैथल में अभी तक यह योजना ठंडे बस्ते में है। लगभग एक साल पहले रोडवेज डिपो में 40 से अधिक स्मार्ट ई-टिकटिंग मशीनें पहुंचनी थी परंतु एक साल बीत जाने के बाद भी यह संभव नहीं हो पाया है।
सरकार की तरफ बसों में टिकट प्रक्रिया को सरल बनाने के लिए ई-टिकटिंग का निर्णय लिया गया है। इसके आने से बसों में जीपीएस और इंटरनेट की सुविधा भी मोबाइल सिम के माध्यम से प्रयोग की जाएगी। ई-टिकटिंग मशीन में स्कैनर से लेकर जीपीएस तक की सुविधा दी जाएगी। इससे बस चालक और परिचालक की लोकेशन भी डिपो आसानी से ट्रेस कर पाएगा। रोडवेज बसों में फ्री पास और रियायती कोटे के तहत यात्रा करने वाली सवारियों को एक नेशनल कॉमन मोबिलिटी कार्ड (एनसीएमसी) जारी किया जाएगा। इस कार्ड को जैसे ही परिचालक अपने ई-टिकटिंग कियोस्क पर स्कैन करेगा, यात्री की यात्रा से संबंधित डाटा कंट्रोल रूम में आ जाएगा। इससे विभाग को यह जानकारी रहेगी कि फ्री पास और रियायती कोटे के तहत कितने यात्रियों ने यात्रा की है। ई-टिकटिंग की सुविधा से यात्रियों की संख्या का डाटा विभाग के पास रहेगा। इससे जिस रूट पर ज्यादा सवारियां यात्रा कर रही हैं, उस रूट पर ज्यादा बसों की शेड्यूलिंग की जा सकती है। कैथल बस अड्डा इंचार्ज रोहताश जांगड़ा ने बताया कि जनवरी के बाद जिले में ई-टिकटिंग सेवा शुरू होने की उम्मीद है। मशीन आने के बाद ई-टिकटिंग प्रणाली यहां शुरू कर दी जाएगी।
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लेकिन कैथल में अभी तक यह योजना ठंडे बस्ते में है। लगभग एक साल पहले रोडवेज डिपो में 40 से अधिक स्मार्ट ई-टिकटिंग मशीनें पहुंचनी थी परंतु एक साल बीत जाने के बाद भी यह संभव नहीं हो पाया है।
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सरकार की तरफ बसों में टिकट प्रक्रिया को सरल बनाने के लिए ई-टिकटिंग का निर्णय लिया गया है। इसके आने से बसों में जीपीएस और इंटरनेट की सुविधा भी मोबाइल सिम के माध्यम से प्रयोग की जाएगी। ई-टिकटिंग मशीन में स्कैनर से लेकर जीपीएस तक की सुविधा दी जाएगी। इससे बस चालक और परिचालक की लोकेशन भी डिपो आसानी से ट्रेस कर पाएगा। रोडवेज बसों में फ्री पास और रियायती कोटे के तहत यात्रा करने वाली सवारियों को एक नेशनल कॉमन मोबिलिटी कार्ड (एनसीएमसी) जारी किया जाएगा। इस कार्ड को जैसे ही परिचालक अपने ई-टिकटिंग कियोस्क पर स्कैन करेगा, यात्री की यात्रा से संबंधित डाटा कंट्रोल रूम में आ जाएगा। इससे विभाग को यह जानकारी रहेगी कि फ्री पास और रियायती कोटे के तहत कितने यात्रियों ने यात्रा की है। ई-टिकटिंग की सुविधा से यात्रियों की संख्या का डाटा विभाग के पास रहेगा। इससे जिस रूट पर ज्यादा सवारियां यात्रा कर रही हैं, उस रूट पर ज्यादा बसों की शेड्यूलिंग की जा सकती है। कैथल बस अड्डा इंचार्ज रोहताश जांगड़ा ने बताया कि जनवरी के बाद जिले में ई-टिकटिंग सेवा शुरू होने की उम्मीद है। मशीन आने के बाद ई-टिकटिंग प्रणाली यहां शुरू कर दी जाएगी।
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