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रक्त में बिलीरुबिन के कारण होता है पीलिया रोग : डॉ. श्याम
Thu, 20 Feb 2025 01:22 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
Updated Thu, 20 Feb 2025 01:22 AM IST
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संवाद न्यूज एजेंसी
ढांड। सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र कौल की ओर से मंगलवार को पंचायत घर पबनावा में स्वास्थ्य जागरूकता शिविर लगाया। इसमें बतौर मुख्य वक्ता एसएमओ डॉ. श्याम सुंदर ने कहा कि हमारे शरीर में पीलिया रोग रक्त में बिलीरुबिन नामक पदार्थ के कारण होता है। यह लाल रक्त कोशिकाओं के टूटने से निकलने वाला अपशिष्ट उत्पाद है।
उन्होंने कहा कि वायरल हैपेटाइटिस या जॉन्डिस को साधारण भाषा में लोग पीलिया के नाम से जानते है। यह रोग बहुत ही सूक्ष्म विषाणु से होता है। उन्होंने कहा कि शुरू में जब रोग धीमी गति से होता है उस समय इसके लक्षण दिखाई नही देते है।
उन्होंने कहा कि यह रोग होने पर हमें वसायुक्त और तले हुए पदार्थ,ज्यादा मिर्च-मसालेदार खाना,ज्यादा नमक,चाय काफी,दाल और बींस, मक्खन,जंक फूड तथा प्रोसेस्ड और डिब्बाबंद खाद्य पदार्थों का सेवन नही करना चाहिए।
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उन्होंने कहा कि पीलिया सबसे ज्यादा लीवर को प्रभावित करता है। डॉ. श्याम सुंदर ने ग्रामीणों से कहा कि गांव में पीने के पानी की पाइप लाइनों में लीकेज होने से इस प्रकार का रोग ज्यादा फैलता है। हमें इसके प्रति सतर्क रहना चाहिए। उन्होंने कहा कि अगर आपको गांव में पानी की पाइप लाइन लीक नजर आए तो जन स्वास्थ्य विभाग को सूचना दें और पानी को हमेशा उबाल कर पीएं। इस अवसर पर डा. रामपाल, शमशेर,जगरूप, दीपक चंदेल मौजूद रहे।
बिलीरुबिन को जानें
n बिलीरुबिन एक पीले रंग का पदार्थ है जो आपके शरीर की पुरानी लाल रक्त कोशिकाओं को तोड़ने की सामान्य प्रक्रिया के दौरान बनता है। बिलीरुबिन पित्त में पाया जाता है, यह एक तरल पदार्थ है जिसे आपका लीवर भोजन को पचाने में मदद करने के लिए बनाता है। यदि लीवर स्वस्थ है, तो यह शरीर से अधिकांश बिलीरुबिन को आपकी पित्त नलिकाओं (आपके लीवर से पित्त ले जाने वाली नलिकाएं) के माध्यम से निकाल देगा। अगर आपका लीवर क्षतिग्रस्त है या आपकी पित्त नलिकाएं अवरुद्ध हैं, तो बिलीरुबिन आपके लीवर से निकलकर आपके रक्त में जा सकता है। जब बहुत अधिक बिलीरुबिन रक्तप्रवाह में चला जाता है, तो यह पीलिया का कारण बन सकता है।
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ढांड। सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र कौल की ओर से मंगलवार को पंचायत घर पबनावा में स्वास्थ्य जागरूकता शिविर लगाया। इसमें बतौर मुख्य वक्ता एसएमओ डॉ. श्याम सुंदर ने कहा कि हमारे शरीर में पीलिया रोग रक्त में बिलीरुबिन नामक पदार्थ के कारण होता है। यह लाल रक्त कोशिकाओं के टूटने से निकलने वाला अपशिष्ट उत्पाद है।
उन्होंने कहा कि वायरल हैपेटाइटिस या जॉन्डिस को साधारण भाषा में लोग पीलिया के नाम से जानते है। यह रोग बहुत ही सूक्ष्म विषाणु से होता है। उन्होंने कहा कि शुरू में जब रोग धीमी गति से होता है उस समय इसके लक्षण दिखाई नही देते है।
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उन्होंने कहा कि यह रोग होने पर हमें वसायुक्त और तले हुए पदार्थ,ज्यादा मिर्च-मसालेदार खाना,ज्यादा नमक,चाय काफी,दाल और बींस, मक्खन,जंक फूड तथा प्रोसेस्ड और डिब्बाबंद खाद्य पदार्थों का सेवन नही करना चाहिए।
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उन्होंने कहा कि पीलिया सबसे ज्यादा लीवर को प्रभावित करता है। डॉ. श्याम सुंदर ने ग्रामीणों से कहा कि गांव में पीने के पानी की पाइप लाइनों में लीकेज होने से इस प्रकार का रोग ज्यादा फैलता है। हमें इसके प्रति सतर्क रहना चाहिए। उन्होंने कहा कि अगर आपको गांव में पानी की पाइप लाइन लीक नजर आए तो जन स्वास्थ्य विभाग को सूचना दें और पानी को हमेशा उबाल कर पीएं। इस अवसर पर डा. रामपाल, शमशेर,जगरूप, दीपक चंदेल मौजूद रहे।
बिलीरुबिन को जानें
n बिलीरुबिन एक पीले रंग का पदार्थ है जो आपके शरीर की पुरानी लाल रक्त कोशिकाओं को तोड़ने की सामान्य प्रक्रिया के दौरान बनता है। बिलीरुबिन पित्त में पाया जाता है, यह एक तरल पदार्थ है जिसे आपका लीवर भोजन को पचाने में मदद करने के लिए बनाता है। यदि लीवर स्वस्थ है, तो यह शरीर से अधिकांश बिलीरुबिन को आपकी पित्त नलिकाओं (आपके लीवर से पित्त ले जाने वाली नलिकाएं) के माध्यम से निकाल देगा। अगर आपका लीवर क्षतिग्रस्त है या आपकी पित्त नलिकाएं अवरुद्ध हैं, तो बिलीरुबिन आपके लीवर से निकलकर आपके रक्त में जा सकता है। जब बहुत अधिक बिलीरुबिन रक्तप्रवाह में चला जाता है, तो यह पीलिया का कारण बन सकता है।